बांद्रा गरीब नगर ध्वस्तीकरण पर हुसैन दलवई का हमला — न सर्वे, न कोर्ट का आदेश, फिर भी कार्रवाई क्यों?
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई ने 19 मई को मुंबई के बांद्रा स्थित गरीब नगर बस्ती में की जा रही ध्वस्तीकरण कार्रवाई को पूरी तरह अनुचित और प्रक्रियाविरुद्ध करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब न तो बस्ती का सर्वे हुआ है और न ही न्यायालय की ओर से कोई आदेश आया है, तो यह कार्रवाई किस आधार पर की जा रही है।
मुख्य आरोप: प्रक्रिया का उल्लंघन
दलवई ने कहा कि गरीब नगर बस्ती का मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। उनके अनुसार, जब तक अदालत का स्पष्ट आदेश नहीं आता और बस्ती का विधिवत सर्वे नहीं होता, तब तक किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई कानूनी और नैतिक दृष्टि से उचित नहीं ठहराई जा सकती। उन्होंने कहा, 'यह पूरा मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है, तो ऐसी स्थिति में इस पर किसी भी प्रकार का फैसला करना उचित नहीं है।'
उन्होंने इस बस्ती के नाम की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि यहाँ रहने वाले अधिकांश लोग दिहाड़ी मजदूर हैं, जो मात्र ₹500 की दैनिक मजदूरी पर गुज़ारा करते हैं।
सरकार पर वर्गभेद का आरोप
दलवई ने आरोप लगाया कि सरकार गरीबों के खिलाफ तो कड़ी कार्रवाई करती है, लेकिन वर्ली जैसे संपन्न इलाकों में नियमों का उल्लंघन कर बने मकानों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता किरीट सोमैया को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि गरीबों को तकलीफ देना और उनके घर तोड़ना बहुत बड़ा पाप है।
महंगाई और ध्यान भटकाने की राजनीति
कांग्रेस नेता ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण महंगाई अपने चरम पर है और आम नागरिक बुरी तरह प्रभावित हैं। उनका आरोप था कि सरकार इन मूल आर्थिक मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए साम्प्रदायिक विभाजन की राजनीति का सहारा ले रही है। उन्होंने कहा, 'यह सरकार हर मुद्दे में सिर्फ हिंदू-मुस्लिम करती है।'
नमाज और सार्वजनिक स्थल विवाद पर प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सड़क पर नमाज संबंधी बयान पर दलवई ने कहा कि वे स्वयं सड़क पर नमाज पढ़ने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन साथ ही यह भी रेखांकित किया कि देश में गणपति उत्सव सहित अनेक त्योहार सार्वजनिक स्थलों पर ही मनाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी मसले को हिंदू-मुस्लिम के चश्मे से देखना बंद होना चाहिए।
जनसंख्या और कानून-व्यवस्था पर टिप्पणी
दलवई ने जनसंख्या नियंत्रण को शिक्षा से जोड़ते हुए कहा कि दक्षिण भारत का उदाहरण यह सिद्ध करता है कि जागरूकता और शिक्षा से जनसंख्या स्वतः नियंत्रित होती है। उन्होंने एनकाउंटर की बढ़ती घटनाओं पर भी चिंता जताई और कहा कि इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। आने वाले समय में यह देखना होगा कि न्यायालय इस बस्ती के मामले में क्या रुख अपनाता है।