सरना धर्म कोड जनगणना में लागू करे केंद्र, झारखंड कांग्रेस की मांग — सवा करोड़ आदिवासियों की पहचान दांव पर
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 19 मई 2026 को रांची में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार से मांग की कि चल रही जनगणना प्रक्रिया में सरना धर्म कोड को शामिल किया जाए, ताकि देश के सवा करोड़ से अधिक आदिवासी-सरना धर्म के अनुयायियों की स्वतंत्र धार्मिक पहचान आधिकारिक रूप से दर्ज हो सके। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और झारखंड कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर आदिवासी हितों की अनदेखी का आरोप लगाया।
सरना धर्म कोड की मांग: मुख्य घटनाक्रम
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वर्तमान जनगणना प्रपत्र में सरना धर्म के लिए कोई अलग कॉलम या कोड नहीं है, जिसके कारण सवा करोड़ से अधिक आदिवासी अनुयायी अपनी धार्मिक पहचान दर्ज कराने में असमर्थ हैं। उन्होंने इसे आदिवासी समुदाय की दशकों पुरानी मांग बताया, जिसे केंद्र सरकार लगातार नजरअंदाज करती आ रही है।
केशव महतो कमलेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जानबूझकर आदिवासियों की स्वतंत्र धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को स्थापित होने से रोक रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाती रहेगी।
मतदाता सूची पुनरीक्षण पर भी चिंता
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उनका दावा है कि इस अभियान के नाम पर देशभर में करोड़ों मतदाताओं के नाम अवैध तरीके से सूची से हटाए जा रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
प्रदीप यादव ने कहा कि झारखंड में जून से चुनाव आयोग की ओर से शुरू होने वाले इस अभियान पर पार्टी की सतर्क निगाह रहेगी। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करते हुए मतदाताओं के नाम सूची में सुरक्षित रखने का अभियान पहले ही शुरू कर दिया है।
महंगाई और परीक्षा प्रणाली पर सरकार की आलोचना
प्रदीप यादव ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल समेत आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि से आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक मामले का भी उल्लेख किया और सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की।
उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियाँ छात्रों के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
आदिवासी पहचान का व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि सरना धर्म कोड की मांग केवल झारखंड तक सीमित नहीं है — ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और असम के आदिवासी समुदाय भी इस माँग में शामिल हैं। 2011 की जनगणना में लगभग 50 लाख लोगों ने अपना धर्म 'अन्य' श्रेणी में दर्ज कराया था, जिसमें से बड़ी संख्या सरना अनुयायियों की मानी जाती है। आलोचकों का कहना है कि अलग कोड के अभाव में यह समुदाय जनगणना के आँकड़ों में अदृश्य रह जाता है, जिसका सीधा असर नीति-निर्माण और संवैधानिक अधिकारों पर पड़ता है।
कांग्रेस की इस माँग के बाद अब देखना होगा कि केंद्र सरकार जनगणना प्रपत्र में संशोधन के प्रश्न पर क्या रुख अपनाती है।