ट्विशा शर्मा मौत मामला: पिता का आरोप — ससुराल पक्ष सिस्टम पर दबाव बनाने में सक्षम, SIT जांच जारी

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ट्विशा शर्मा मौत मामला: पिता का आरोप — ससुराल पक्ष सिस्टम पर दबाव बनाने में सक्षम, SIT जांच जारी

सारांश

ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं रहा — यह न्यायिक प्रभाव और जांच की निष्पक्षता पर सवाल बन चुका है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश सास की अर्ध-न्यायिक भूमिका और फरार पति के बीच, पिता का सार्वजनिक बयान इस मामले को एक नई और गंभीर दिशा देता है।

मुख्य बातें

ट्विशा शर्मा की मृत्यु 12 मई 2026 को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई।
पिता नव निधि शर्मा ने आरोप लगाया कि आरोपी पक्ष प्रभावशाली है और जांच प्रक्रिया पर दबाव बनाने में सक्षम है।
आरोपी पति समर्थ सिंह 12 मई से फरार हैं; उनकी अंतरिम जमानत याचिका जस्टिस पल्लवी द्विवेदी ने खारिज की।
सास गिरिबाला सिंह — सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश व वर्तमान उपभोक्ता अदालत प्रमुख — को अंतरिम जमानत मिली।
भोपाल पुलिस ने SIT गठित की; परिवार एम्स नई दिल्ली में दूसरे पोस्टमॉर्टम की माँग कर रहा है।
परिवार ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल से हस्तक्षेप की माँग की; संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का हवाला दिया।

भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में 12 मई 2026 को संदिग्ध परिस्थितियों में जान गंवाने वाली ट्विशा शर्मा के पिता नव निधि शर्मा ने मंगलवार को एक विस्तृत सार्वजनिक बयान जारी करते हुए आरोप लगाया कि आरोपी पक्ष का परिवार अत्यंत प्रभावशाली है और जांच प्रक्रिया, जनमत तथा व्यवस्था पर दबाव बनाने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि शोक में डूबा उनका परिवार लगातार सार्वजनिक हमलों और एकतरफा नैरेटिव का सामना कर रहा है।

पिता का सार्वजनिक बयान

नव निधि शर्मा ने कहा, 'टूटे हुए दिल, असहनीय पीड़ा और कभी न खत्म होने वाले नुकसान के एहसास के साथ मैं दिवंगत ट्विशा शर्मा का पिता न्याय, निष्पक्षता और अपनी बेटी की गरिमा की रक्षा के लिए यह सार्वजनिक बयान जारी करने को मजबूर हूं।' उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बेटी अब जीवित नहीं है कि वह आरोपी पक्ष द्वारा किए जा रहे सार्वजनिक हमलों और झूठे आरोपों का जवाब दे सके।

शर्मा ने कहा, 'आज जब हमारी बेटी हमेशा के लिए खामोश हो चुकी है, तब भी जिन लोगों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, वे लगातार सार्वजनिक रूप से बोल रहे हैं, अपना बचाव कर रहे हैं और अपनी मनचाही कहानी पेश कर रहे हैं। यह असमान स्थिति पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर लोगों के भरोसे को कमज़ोर कर रही है।'

आरोपी पक्ष की पृष्ठभूमि और अदालती कार्रवाई

पुलिस ने ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उनकी माँ गिरिबाला सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। गिरिबाला सिंह भोपाल जिला अदालत की सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं और वर्तमान में भोपाल उपभोक्ता अदालत की प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। भोपाल की एक जिला अदालत ने सह-आरोपी गिरिबाला सिंह को अंतरिम जमानत दे दी, जबकि समर्थ की अंतरिम जमानत याचिका को जस्टिस पल्लवी द्विवेदी ने सोमवार को खारिज कर दिया। वकील समर्थ सिंह 12 मई से ही फरार बताए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि नव निधि शर्मा ने अधिकारियों से आग्रह किया है कि जांच पूरी होने तक गिरिबाला सिंह को उनके अर्ध-न्यायिक दायित्वों से हटाया या निलंबित किया जाए, क्योंकि उनके पद पर बने रहने से जांचकर्ताओं, गवाहों और फोरेंसिक प्रक्रिया पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।

परिवार के आरोप और अभियोजन के साक्ष्य

ट्विशा के परिवार का आरोप है कि दहेज की मांग को लेकर उसे लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी गई और उस पर गर्भपात कराने का दबाव बनाया गया। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पति ने उसके अजन्मे बच्चे के पिता को लेकर भी सवाल उठाए और बार-बार मारपीट की।

अभियोजन पक्ष ने उन व्हाट्सएप संदेशों का हवाला दिया जो ट्विशा ने अपनी मृत्यु से कुछ दिन पहले अपनी माँ को भेजे थे। 9 मई के एक संदेश में उसने कथित तौर पर लिखा था, 'मां, प्लीज आप कल मुझे यहां से लेने आ जाओ,' जबकि एक अन्य संदेश में उसने अपनी जिंदगी को नरक बताया था।

बचाव पक्ष ने अदालत में दावा किया कि 12 मई को ट्विशा एक ब्यूटी पार्लर गई थीं और उसके बाद टहलने निकली थीं। परिवार के अनुसार वह छत पर एक लोहे की रॉड से एक्सरसाइज रेसिस्टेंस बैंड के सहारे लटकी मिलीं। हालाँकि, ट्विशा के परिवार ने इस बयान का खंडन किया है।

SIT गठन और दूसरे पोस्टमॉर्टम की माँग

भोपाल पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। ट्विशा के अवशेष अभी एम्स भोपाल में रखे हुए हैं, क्योंकि परिवार एम्स नई दिल्ली में दूसरा पोस्टमॉर्टम कराने की माँग कर रहा है और इसके लिए 13 मई से ही मध्य प्रदेश में संपर्क कर रहा है।

नव निधि शर्मा ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल से भी हस्तक्षेप की माँग की है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का हवाला देते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की माँग की गई है।

आगे क्या

ट्विशा शर्मा ने दिसंबर 2025 में समर्थ सिंह से विवाह किया था। मामले में SIT की जांच जारी है, समर्थ सिंह अभी भी फरार हैं और अदालत में कानूनी लड़ाई आगे बढ़ रही है। परिवार का कहना है कि वे भारत के संविधान, न्यायपालिका और जांच एजेंसियों पर भरोसा बनाए हुए हैं और उम्मीद करते हैं कि बिना किसी दबाव के सच की जीत होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसकी एक सदस्य अभी भी सक्रिय अर्ध-न्यायिक पद पर बनी हुई हैं — यह संस्थागत हितों के टकराव का स्पष्ट उदाहरण है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। SIT का गठन स्वागतयोग्य है, लेकिन जब तक गिरिबाला सिंह अपने पद पर हैं, जांच की स्वतंत्रता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। दहेज उत्पीड़न के आरोप, व्हाट्सएप संदेश और दूसरे पोस्टमॉर्टम की माँग — ये सब मिलकर संकेत देते हैं कि परिवार को न्याय प्रणाली पर भरोसा तो है, लेकिन उसकी निष्पक्षता पर नहीं।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्विशा शर्मा की मौत कैसे हुई?
ट्विशा शर्मा की मृत्यु 12 मई 2026 को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई। बचाव पक्ष के अनुसार वह छत पर एक्सरसाइज रेसिस्टेंस बैंड से लटकी मिलीं, जबकि परिवार दहेज उत्पीड़न और हत्या का आरोप लगा रहा है।
ट्विशा के पिता ने क्या आरोप लगाए हैं?
पिता नव निधि शर्मा ने आरोप लगाया है कि आरोपी पक्ष का परिवार प्रभावशाली है और जांच प्रक्रिया, जनमत तथा व्यवस्था पर दबाव बनाने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि शोकाकुल परिवार लगातार सार्वजनिक हमलों और एकतरफा नैरेटिव का सामना कर रहा है।
आरोपी समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह की अदालती स्थिति क्या है?
आरोपी पति समर्थ सिंह 12 मई से फरार हैं और उनकी अंतरिम जमानत याचिका जस्टिस पल्लवी द्विवेदी ने खारिज कर दी है। उनकी माँ और सह-आरोपी गिरिबाला सिंह को भोपाल जिला अदालत ने अंतरिम जमानत दे दी है।
मामले में SIT क्यों बनाई गई और जांच कहाँ तक पहुँची है?
भोपाल पुलिस ने ट्विशा की संदिग्ध मौत की विस्तृत जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित किया है। ट्विशा के अवशेष एम्स भोपाल में रखे हैं और परिवार एम्स नई दिल्ली में दूसरे पोस्टमॉर्टम की माँग कर रहा है।
परिवार ने राज्यपाल से क्या माँग की है?
नव निधि शर्मा ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल से हस्तक्षेप की माँग करते हुए अनुरोध किया है कि जांच पूरी होने तक गिरिबाला सिंह को उनके अर्ध-न्यायिक दायित्वों से हटाया या निलंबित किया जाए। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का हवाला दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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