भोपाल नवविवाहिता ट्विशा शर्मा मौत मामला: एसआईटी जांच शुरू, पति फरार, परिवार ने लगाया लीपापोती का आरोप

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भोपाल नवविवाहिता ट्विशा शर्मा मौत मामला: एसआईटी जांच शुरू, पति फरार, परिवार ने लगाया लीपापोती का आरोप

सारांश

भोपाल में नवविवाहिता ट्विशा शर्मा की मौत का मामला अब न्यायिक जवाबदेही की परीक्षा बन गया है। आरोपी परिवार में एक रिटायर्ड जज हैं, पति फरार है और परिवार का आरोप है कि सिस्टम बचाव में जुटा है। एसआईटी जांच शुरू हो चुकी है, पर असली सवाल यह है कि क्या प्रभावशाली संबंध निष्पक्ष जांच को प्रभावित करेंगे।

मुख्य बातें

ट्विशा शर्मा (33 वर्ष) की मौत 12 मई 2026 को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में हुई — शादी के महज छह महीने बाद।
पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पल्लवी द्विवेदी ने खारिज की; वह घटना के बाद से फरार हैं।
सास गिरिबाला सिंह , भोपाल जिला अदालत की रिटायर्ड जज और वर्तमान में उपभोक्ता अदालत प्रमुख, को अग्रिम जमानत मिल चुकी है।
एसीपी रजनीश कश्यप के नेतृत्व में 6 सदस्यीय एसआईटी गठित; समर्थ सिंह की गिरफ्तारी पर ₹10,000 का इनाम घोषित।
परिवार ने एम्स दिल्ली में दोबारा पोस्टमार्टम और मध्य प्रदेश राज्यपाल से हस्तक्षेप की माँग की।
प्रारंभिक पोस्टमार्टम में मौत का कारण 'फांसी' बताया गया, लेकिन शरीर पर कई चोटों के निशान भी दर्ज।

भोपाल के कटारा हिल्स में 12 मई 2026 की रात 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद मध्य प्रदेश में दहेज हत्या का एक गंभीर मामला सामने आया है। भोपाल पुलिस ने एसीपी रजनीश कश्यप के नेतृत्व में छह सदस्यीय विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की है, जबकि मृतका के पति अधिवक्ता समर्थ सिंह घटना के बाद से फरार हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

नोएडा निवासी ट्विशा शर्मा अभिनेत्री और मॉडल के रूप में काम कर चुकी थीं और बाद में दिल्ली की एक निजी कंपनी में कार्यरत थीं। उनकी शादी 9 दिसंबर 2025 को समर्थ सिंह से हुई थी। शादी के महज छह महीने बाद 12 मई की रात भोपाल स्थित ससुराल में उनकी मौत हो गई।

बचाव पक्ष का दावा है कि ट्विशा उस दिन ब्यूटी पार्लर गई थीं और बाद में टहलने निकली थीं। घर लौटने पर परिवार ने उन्हें छत पर लोहे की रॉड से एक्सरसाइज बैंड के सहारे लटका हुआ पाया और उन्हें एम्स भोपाल ले जाया गया। हालांकि, ट्विशा के परिजनों ने इस दावे को पूरी तरह नकारते हुए कहा कि उन्हें दहेज के लिए लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी जाती थी।

अदालत का फैसला और आरोपियों की स्थिति

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पल्लवी द्विवेदी ने सोमवार को समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि शादी के छह महीने के भीतर 'असामान्य परिस्थितियों' में मौत हुई है और गवाहों के बयान, एफआईआर तथा व्हाट्सऐप चैट मुख्य रूप से समर्थ सिंह की ओर इशारा करते हैं।

इस मामले में समर्थ सिंह और उनकी माँ, भोपाल जिला अदालत की रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह — जो वर्तमान में भोपाल उपभोक्ता अदालत की प्रमुख हैं — के विरुद्ध दहेज हत्या, दहेज प्रताड़ना, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और दहेज निषेध अधिनियम की धाराओं में एफआईआर दर्ज है। गिरिबाला सिंह को पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी है। पुलिस ने फरार समर्थ सिंह की गिरफ्तारी में सहायता करने वालों के लिए ₹10,000 का इनाम घोषित किया है।

परिवार के गंभीर आरोप

ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने आरोप लगाया है कि आरोपी परिवार के न्यायपालिका, पुलिस और चिकित्सा प्रशासन में संबंध होने के कारण जांच प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि एफआईआर दर्ज कराने में भी परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ा।

अभियोजन पक्ष ने अदालत में कथित व्हाट्सऐप संदेशों का हवाला दिया, जो ट्विशा ने अपनी मृत्यु से कुछ दिन पहले अपनी माँ को भेजे थे। 9 मई के एक संदेश में उन्होंने लिखा था कि 'माँ, आप मुझे यहाँ से लेने आ जाओ कल प्लीज।' एक अन्य संदेश में उन्होंने अपनी जिंदगी को नरक बताया। बचाव पक्ष ने इन संदेशों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इनसे छेड़छाड़ की गई है।

कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर ट्विशा के गर्भ में पल रहे बच्चे के पिता को लेकर सवाल उठाए और कई बार उनके साथ मारपीट की। परिवार का यह भी आरोप है कि उन पर गर्भपात कराने का दबाव बनाया गया।

पोस्टमार्टम विवाद और राज्यपाल से गुहार

प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण 'फांसी' बताया गया है, लेकिन रिपोर्ट में शरीर पर कई चोटों के निशान होने का भी उल्लेख है। ट्विशा के परिवार ने शव लेने से इनकार कर दिया है और एम्स दिल्ली में दोबारा पोस्टमार्टम कराने की माँग की है।

नवनिधि शर्मा ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल से हस्तक्षेप की माँग करते हुए अनुरोध किया है कि जांच पूरी होने तक गिरिबाला सिंह को उनके पद से हटाया या निलंबित किया जाए। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का हवाला देते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की माँग की गई है।

आगे की राह

एसआईटी अब दहेज प्रताड़ना, मारपीट और सबूत मिटाने के आरोपों की जांच कर रही है। समर्थ सिंह की गिरफ्तारी के लिए कई पुलिस टीमें सक्रिय हैं और उनके मोबाइल फोन बंद बताए जा रहे हैं। यह मामला न्यायिक जवाबदेही, दहेज उत्पीड़न और प्रभावशाली परिवारों के विरुद्ध निष्पक्ष जांच के व्यापक सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जांच की विश्वसनीयता पर स्वाभाविक सवाल खड़ा करता है। परिवार की एफआईआर दर्ज कराने में हुई कथित कठिनाई और शव लेने से इनकार — ये संकेत हैं कि पीड़ित पक्ष को संस्थागत प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। एसआईटी का गठन सही दिशा में कदम है, लेकिन जब तक गिरिबाला सिंह पद पर बनी हैं और समर्थ सिंह फरार हैं, तब तक निष्पक्ष जांच का दावा अधूरा ही रहेगा।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्विशा शर्मा कौन थीं और उनकी मौत कैसे हुई?
ट्विशा शर्मा 33 वर्षीय नोएडा निवासी थीं, जो पहले अभिनेत्री और मॉडल रह चुकी थीं। 12 मई 2026 की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई — शादी के महज छह महीने बाद।
इस मामले में एसआईटी क्यों बनाई गई?
दहेज प्रताड़ना, मारपीट और सबूत मिटाने के गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए भोपाल पुलिस ने एसीपी रजनीश कश्यप के नेतृत्व में छह सदस्यीय एसआईटी गठित की है। मृतका के परिवार ने स्थानीय प्रशासन पर लीपापोती का आरोप लगाया था।
समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत क्यों खारिज हुई?
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पल्लवी द्विवेदी ने पाया कि शादी के छह महीने के भीतर 'असामान्य परिस्थितियों' में मौत हुई और गवाहों के बयान, एफआईआर तथा व्हाट्सऐप चैट समर्थ सिंह की ओर इशारा करते हैं। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं माना गया।
गिरिबाला सिंह कौन हैं और उनकी क्या भूमिका है?
गिरिबाला सिंह भोपाल जिला अदालत की रिटायर्ड जज हैं और वर्तमान में भोपाल उपभोक्ता अदालत की प्रमुख हैं। वह समर्थ सिंह की माँ हैं और उनके विरुद्ध भी दहेज प्रताड़ना की एफआईआर दर्ज है, हालांकि उन्हें अग्रिम जमानत मिल चुकी है।
ट्विशा के परिवार ने क्या माँगें रखी हैं?
परिवार ने एम्स दिल्ली में दोबारा पोस्टमार्टम, मध्य प्रदेश के राज्यपाल से हस्तक्षेप और जांच पूरी होने तक गिरिबाला सिंह को पद से हटाने की माँग की है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत निष्पक्ष जांच की अपील की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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