ट्विशा शर्मा दहेज हत्या: सीबीआई ने भोपाल केस अपने हाथ लिया, डीएसपी निशु कुशवाहा बनीं जांच अधिकारी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में 12 मई 2026 को हुई ट्विशा शर्मा की कथित दहेज हत्या की जांच अपने हाथ में ले ली है। एजेंसी ने कटारा हिल्स थाने में पहले से दर्ज एफआईआर को 25 मई 2026 को दोबारा पंजीकृत कर औपचारिक जांच शुरू कर दी है। डीएसपी निशु कुशवाहा को इस संवेदनशील मामले का जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
ट्विशा शर्मा की शादी 9 दिसंबर 2025 को समर्थ सिंह से हुई थी। शिकायत के अनुसार, विवाह के तुरंत बाद से ससुराल पक्ष द्वारा अतिरिक्त दहेज के लिए मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना शुरू हो गई थी। परिवार का आरोप है कि शादी के दौरान दबाव बनाकर लगभग ₹2 लाख लिए गए थे।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि अप्रैल 2026 में ट्विशा के गर्भवती होने पर उसके पति और सास ने उसके चरित्र पर सवाल उठाते हुए दबाव बनाकर गर्भपात करवाया।
मौत की रात और पोस्टमार्टम के निष्कर्ष
12 मई की रात लगभग रात 10:20 बजे पुलिस को ट्विशा की मौत की सूचना मिली। शुरुआती जांच और मेडिकल रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी लगना बताया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 'एंटेमॉर्टम हैंगिंग' यानी जीवित अवस्था में फांसी लगाने की पुष्टि हुई।
हालांकि, पोस्टमार्टम में शरीर के अन्य हिस्सों पर चोटों के निशान भी पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार, ये चोटें किसी भारी वस्तु से मारपीट या हिंसा के कारण हो सकती हैं — जिससे मामले की संदिग्ध प्रकृति और गहरी हो जाती है।
सीबीआई को सौंपे जाने की प्रक्रिया
मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट एक्ट की धारा 6 के तहत सहमति देते हुए केस सीबीआई को सौंपा। इसके बाद केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने 25 मई 2026 को अधिसूचना जारी कर सीबीआई को पूरे मध्य प्रदेश में जांच का अधिकार प्रदान किया। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में दहेज उत्पीड़न के मामलों में जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे।
दर्ज धाराएँ और आरोपी
सीबीआई ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2), 85 और 3(5) के साथ-साथ दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत केस दर्ज किया है। एफआईआर में मुख्य आरोपियों के रूप में समर्थ सिंह (पति) और गिरीबाला सिंह (सास) का नाम शामिल है।
आगे क्या होगा
सीबीआई अब दहेज हत्या, प्रताड़ना, साजिश और अन्य संभावित आपराधिक पहलुओं की विस्तृत जांच करेगी। गौरतलब है कि सीबीआई के हस्तक्षेप से पीड़ित परिवार को निष्पक्ष जांच की उम्मीद बंधी है। यह मामला देश में दहेज उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं पर एक बार फिर ध्यान केंद्रित करता है।