ट्विशा शर्मा मामला: सीजेआई सूर्यकांत ने मीडिया ट्रायल पर जताई चिंता, सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने भोपाल की ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में 25 मई 2026 को स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वीएम पंचोली की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए मीडिया ट्रायल पर गहरी चिंता व्यक्त की और सभी पक्षों से कहा कि जाँच को कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ने दिया जाए।
मुख्य घटनाक्रम
ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपनी सास गिरिबाला सिंह के घर में फाँसी पर लटकी हुई मिली थीं। कटारा हिल्स पुलिस ने ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उनकी सास गिरिबाला सिंह के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की थी। रविवार को एम्स दिल्ली की टीम ने ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम किया।
सीजेआई की मीडिया को चेतावनी
सीजेआई सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्टों को देखकर पीठ को 'थोड़ी तकलीफ हुई है।' उन्होंने मीडिया से अनुरोध किया कि वे पीड़ित परिवार या दूसरे पक्ष के बयानों को प्रकाशित न करें और कैमरे पर इंटरव्यू न लें। उन्होंने कहा, 'चीजों को कानून और प्रक्रिया के हिसाब से चलने दें।'
सीजेआई ने यह भी कहा कि ट्विशा की सास एक सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश हैं और यह दुखद है कि यह आरोप लगाया जा रहा है कि न्यायपालिका निष्पक्ष सुनवाई की अनुमति नहीं दे रही। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत को राज्य एजेंसियों अथवा सीबीआई पर पूरा भरोसा है कि जाँच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचाया जाएगा।
दोनों पक्षों की दलीलें
आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने पीठ को बताया कि धारा 161 के तहत दर्ज बयान अगले दिन समाचार पत्रों में प्रकाशित हो गए थे। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से दलीलें पेश करते हुए कहा कि ट्विशा की सास एक चैनल से दूसरे चैनल पर जाकर मृतका को बदनाम कर रही हैं।
पीड़ित परिवार की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने आरोप लगाया कि एफआईआर दर्ज करने में तीन दिन की देरी हुई और पुलिस सबूत सुरक्षित रखने में नाकाम रही। उन्होंने यह भी बताया कि ट्विशा की सास अपनी सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) पेश कर रही हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और अदालत का आदेश
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि वे इस मामले को संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखेंगे ताकि सीबीआई तत्काल जाँच अपने हाथ में ले सके। अदालत ने अपने आदेश में इस आश्वासन को दर्ज किया।
सीजेआई ने सभी पक्षों से पुनः आग्रह किया कि वे समय से पहले कोई बयान न दें और जो भी कहना हो, वह जाँच एजेंसी के सामने कहें। उन्होंने कहा, 'जो भी दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई है, उसकी निष्पक्ष, स्वतंत्र और बिना किसी भेदभाव के जाँच होनी चाहिए।'
आगे की राह
यह मामला अब सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में है और सीबीआई द्वारा जाँच अपने हाथ में लेने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू होने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में महिला सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही को लेकर सवाल पहले से उठ रहे हैं। अदालत की यह सक्रियता संकेत देती है कि उच्चतम स्तर पर इस मामले की पारदर्शी जाँच सुनिश्चित की जाएगी।