ट्विशा शर्मा मौत मामला: MP हाईकोर्ट ने सास गिरिबाला सिंह की जमानत रद्द याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 27 मई 2026 को चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में मुख्य आरोपी मानी जा रही सास गिरिबाला सिंह की जमानत रद्द करने की माँग वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। अदालत में राज्य सरकार, केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) और बचाव पक्ष के बीच लंबी और तीखी बहस हुई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और राज्य सरकार की दलीलें
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने अदालत में कहा कि ट्विशा शर्मा के शरीर पर कई जगह चोट के निशान पाए गए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, दाहिने हाथ की उंगली और कोहनी (एल्बो) सहित शरीर के अन्य हिस्सों पर भी चोटें थीं, और महत्वपूर्ण बात यह है कि ये चोटें मौत से पहले की बताई गई हैं। महाधिवक्ता ने सवाल उठाया कि जब प्रारंभिक साक्ष्य इतने गंभीर थे, तो ट्रायल कोर्ट ने किस आधार पर गिरिबाला सिंह को जमानत दी।
CBI का रुख और पोस्टमार्टम में हस्तक्षेप का आरोप
केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने अदालत में सख्त रुख अपनाते हुए गिरिबाला सिंह की न्यायिक हिरासत की माँग की। CBI के वकील ने आरोप लगाया कि पहले पोस्टमार्टम के दौरान गिरिबाला सिंह की बहन वहाँ मौजूद थीं। एजेंसी यह जाँचना चाहती है कि क्या पोस्टमार्टम प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी, क्योंकि इससे पूरे मामले की दिशा बदल सकती है।
सॉलिसिटर जनरल की ट्रायल कोर्ट पर तीखी टिप्पणी
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ट्रायल कोर्ट के जमानत आदेश पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन आधारों पर गिरिबाला सिंह को जमानत दी गई, उन्हीं आधारों पर देश के 90 प्रतिशत लोगों को जमानत मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि एफआईआर दर्ज होने से पहले ही जमानत देने का निर्णय समझ से परे है। मेहता ने यह भी आरोप लगाया कि गिरिबाला सिंह कानूनी जानकारी का फायदा उठाते हुए शाम के समय — जब किसी महिला से पूछताछ नहीं की जा सकती — एसएचओ को ईमेल और व्हाट्सऐप संदेश भेजती थीं।
बचाव पक्ष की दलीलें
गिरिबाला सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एनोश जॉर्ज ने तर्क दिया कि जमानत मिलने के बाद के आचरण के आधार पर जमानत रद्द करने की माँग के लिए पहले ट्रायल कोर्ट जाना चाहिए था। उनके अनुसार, सीधे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उनके मुवक्किल के उस कानूनी अधिकार को समाप्त कर दिया गया जिसमें ट्रायल कोर्ट के फैसले के विरुद्ध हाईकोर्ट में अपील की जा सकती थी।
आगे क्या होगा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। अदालत का फैसला तय करेगा कि गिरिबाला सिंह की जमानत बरकरार रहेगी या रद्द होगी और उन्हें न्यायिक हिरासत में लिया जाएगा। यह मामला न केवल न्यायिक प्रक्रिया बल्कि जाँच की निष्पक्षता की भी परीक्षा है।