ट्विशा शर्मा दहेज मृत्यु केस: MP हाई कोर्ट ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द की
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 27 मई 2026 को पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी — यह जमानत उन्हें उनकी बहू ट्विशा शर्मा की दहेज मृत्यु के मामले में मिली थी। भोपाल की एक सत्र अदालत द्वारा 15 मई को दिए गए राहत-आदेश को हाई कोर्ट ने इस आधार पर निरस्त किया कि निचली अदालत ने केस डायरी, गवाहों के बयान और व्हाट्सअप बातचीत जैसे अहम साक्ष्यों की पर्याप्त जांच नहीं की थी।
हाई कोर्ट का आदेश और आधार
जस्टिस देव नारायण मिश्रा ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि निचली अदालत ने जमानत देते समय केस डायरी में दर्ज गवाहों की अहम गवाही और दस्तावेजी साक्ष्यों को नज़रअंदाज़ किया, जो सिंह की कथित संलिप्तता की ओर इशारा करते थे। हाई कोर्ट ने रेखांकित किया कि इस आदेश में गंभीर कमियाँ थीं।
अदालत ने यह भी कहा कि दहेज मृत्यु जैसे संवेदनशील और गंभीर सामाजिक बुराई से जुड़े मामलों में अग्रिम जमानत तभी दी जानी चाहिए, जब सभी तथ्यों की पूरी और सावधानीपूर्वक जांच हो चुकी हो।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़ा है, जिनका विवाह गिरिबाला सिंह के पुत्र समर्थ सिंह से हुआ था। ट्विशा की मृत्यु के तुरंत बाद दहेज उत्पीड़न और क्रूरता के आरोप सामने आए, जिसके आधार पर दहेज मृत्यु और आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि गिरिबाला सिंह ने अपनी न्यायिक पृष्ठभूमि के बावजूद ट्विशा के उत्पीड़न को जारी रहने दिया, जो अंततः उनकी मृत्यु का कारण बना। गौरतलब है कि निचली अदालत ने सिंह की उम्र और पूर्व न्यायाधीश के पेशेवर रुतबे को देखते हुए उन्हें राहत दी थी।
सीबीआई की भूमिका और आगे की कार्रवाई
अग्रिम जमानत रद्द होने के बाद अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के गिरिबाला सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की संभावना बताई जा रही है। इससे ट्विशा शर्मा की मृत्यु की परिस्थितियों पर और अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है।
उल्लेखनीय है कि समर्थ सिंह पहले से ही 29 मई तक रिमांड पर CBI की हिरासत में हैं। यह मामला कानूनी और सामाजिक हलकों में व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है, विशेषकर इसलिए कि आरोपी स्वयं न्यायपालिका का हिस्सा रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला न्यायपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है — चाहे व्यक्ति किसी भी पद पर रहा हो। यह आदेश दहेज से जुड़े अपराधों को अत्यंत गंभीरता से लेने के अदालत के रुख को भी दर्शाता है और इस सिद्धांत को पुष्ट करता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।
आगे क्या होगा
हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद गिरिबाला सिंह को अब गिरफ्तारी और हिरासत में पूछताछ का सामना करना पड़ सकता है। CBI की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, ट्विशा शर्मा की मौत की पूरी कहानी सामने आने की उम्मीद है।