13 जुलाई 2026
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ट्विशा शर्मा मौत मामला: गिरिबाला सिंह ने MP हाईकोर्ट में पुलिस के सभी आरोप नकारे

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ट्विशा शर्मा मौत मामला: गिरिबाला सिंह ने MP हाईकोर्ट में पुलिस के सभी आरोप नकारे

सारांश

ट्विशा शर्मा की सास गिरिबाला सिंह ने MP हाईकोर्ट में पुलिस के हर आरोप को नकारा — साक्ष्य छेड़छाड़ से लेकर CCTV लीक तक। बचाव पक्ष का दावा: घर 13 मई को ही सील था, DVR पुलिस के पास है, और आत्महत्या की संभावना खारिज नहीं की जा सकती।

मुख्य बातें

गिरिबाला सिंह ने 27 मई को MP हाईकोर्ट में मध्य प्रदेश पुलिस के सभी आरोपों का खंडन किया।
बचाव पक्ष ने कहा कि परिवार का आवास 13 मई को ही सील हो चुका था, साक्ष्य से छेड़छाड़ असंभव थी।
DVR पहले से पुलिस की हिरासत में था, इसलिए CCTV फुटेज लीक का आरोप निराधार: बचाव पक्ष।
एम्स भोपाल पोस्टमार्टम में हेरफेर से गिरिबाला सिंह को जोड़ने वाला कोई साक्ष्य नहीं: अधिवक्ता।
बचाव पक्ष ने आत्महत्या की संभावना से इनकार नहीं किया; पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फाँसी का उल्लेख।
मामले की जाँच अब CBI के पास; भोपाल जिला न्यायालय की दी गई अग्रिम जमानत को चुनौती पर सुनवाई जारी।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर स्थित प्रधान पीठ में बुधवार, 27 मई को मृतक ट्विशा शर्मा की सास गिरिबाला सिंह ने अपनी अग्रिम जमानत याचिका के समर्थन में विस्तृत जवाब दाखिल करते हुए मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा लगाए गए प्रत्येक आरोप को सिरे से खारिज किया। यह मामला 12 मई को ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के बाद दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जिसकी जाँच अब केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) के हाथों में है।

बचाव पक्ष के मुख्य तर्क

गिरिबाला सिंह के अधिवक्ता मृगेंद्र सिंह ने अदालत को बताया कि उनकी मुवक्किल ने जाँच एजेंसियों के साथ पूर्ण सहयोग किया और कभी भी जाँच को प्रभावित करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने का प्रयास नहीं किया। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि इस स्तर पर गिरफ्तारी पूर्व-परीक्षण दंड के समान होगी और हिरासत में पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है।

साक्ष्य नष्ट करने के आरोपों का खंडन

बचाव पक्ष ने हाईकोर्ट को बताया कि परिवार के आवास का अधिकांश हिस्सा 13 मई को ही पुलिस द्वारा सील कर दिया गया था, जिससे किसी भी साक्ष्य से छेड़छाड़ की संभावना स्वतः समाप्त हो गई। जवाब में यह भी कहा गया कि पुलिस और बाद में CBI अधिकारी परिवार के किसी विरोध के बिना घर में दाखिल हुए और मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, पासपोर्ट तथा दस्तावेज जब्त कर लिए।

CCTV फुटेज और पोस्टमार्टम विवाद

सीसीटीवी फुटेज मीडिया को लीक होने के आरोपों पर बचाव पक्ष ने स्पष्ट किया कि DVR पहले ही पुलिस द्वारा जब्त कर लिया गया था और वह आधिकारिक हिरासत में है, इसलिए परिवार की ओर से लीक का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। एम्स भोपाल में हुए पहले पोस्टमार्टम में हेरफेर के आरोपों पर अधिवक्ता मृगेंद्र सिंह ने कहा कि गिरिबाला सिंह को चिकित्सा परीक्षण प्रक्रिया से जोड़ने वाला कोई ठोस साक्ष्य नहीं है।

गर्भपात की गोलियों और आत्महत्या की संभावना पर बचाव

गर्भपात की गोलियों से जुड़े आरोपों के संदर्भ में बचाव पक्ष ने कहा कि ट्विशा शर्मा ने डॉक्टरों से परामर्श के बाद स्वेच्छा से दवा ली थी और वह चिंता के लिए मनोरोग उपचार भी करा रही थीं। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि आत्महत्या की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता — पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फाँसी का उल्लेख है और सीसीटीवी फुटेज पुलिस के पास पहले से उपलब्ध है।

मामले की पृष्ठभूमि और आगे की सुनवाई

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था जो भोपाल जिला न्यायालय द्वारा गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत को चुनौती देती हैं। गौरतलब है कि ट्विशा शर्मा की मौत 12 मई को हुई थी और इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जाँच CBI को सौंपी गई है। अदालत का अगला आदेश इस मामले की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्विशा शर्मा मौत मामला क्या है?
ट्विशा शर्मा की मौत 12 मई 2025 को हुई थी, जिसके बाद उनके परिवार ने एफआईआर दर्ज कराई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जाँच CBI को सौंपी गई है और सास गिरिबाला सिंह समेत परिवार के सदस्यों पर आरोप लगाए गए हैं।
गिरिबाला सिंह ने MP हाईकोर्ट में क्या कहा?
गिरिबाला सिंह के अधिवक्ता मृगेंद्र सिंह ने अदालत में पुलिस के सभी आरोपों का खंडन किया — साक्ष्य से छेड़छाड़, CCTV लीक और पोस्टमार्टम में हेरफेर के आरोप नकारे। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी पूर्व-परीक्षण दंड के समान होगी।
क्या ट्विशा शर्मा मामले में CBI जाँच हो रही है?
हाँ, यह मामला हाल ही में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंपा गया है। CBI अधिकारियों ने परिवार के घर से मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, पासपोर्ट और दस्तावेज जब्त किए हैं।
MP हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत पर सुनवाई क्यों हो रही है?
भोपाल जिला न्यायालय ने गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दी थी, जिसे अन्य पक्षों ने MP हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट अब इन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।
बचाव पक्ष ने आत्महत्या की संभावना पर क्या कहा?
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आत्महत्या की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें फाँसी का उल्लेख है और कहा कि सीसीटीवी फुटेज पुलिस के पास पहले से उपलब्ध है।
राष्ट्र प्रेस
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