13 जुलाई 2026
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: परमहंस आचार्य को एसआईटी पर भरोसा, सीबीआई जांच पर भी कोई आपत्ति नहीं

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: परमहंस आचार्य को एसआईटी पर भरोसा, सीबीआई जांच पर भी कोई आपत्ति नहीं

सारांश

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने एसआईटी पर भरोसा जताते हुए सीबीआई जांच पर भी सहमति दी — लेकिन साथ ही अखिलेश यादव और सपा पर राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया। अयोध्या के संत वरुण दास और पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने भी निष्पक्ष जांच की मांग का समर्थन किया।

मुख्य बातें

जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी जांच पर पूरा भरोसा जताया।
उन्होंने कहा कि सीबीआई जांच की मांग पर कोई आपत्ति नहीं; न्यायालय का जो भी फैसला होगा, वह मंजूर होगा।
चाहे ₹1 की चोरी हो या ₹1 करोड़ की — दोषी के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए: परमहंस आचार्य।
समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर राजनीतिक साजिश के तहत मुद्दा उछालने का आरोप लगाया।
संत वरुण दास ने भी निष्पक्ष जांच और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी की मांग का समर्थन किया।
बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा — कानून अपना काम करेगा।

अयोध्या स्थित तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर जारी सुनवाई के बीच स्पष्ट किया कि उन्हें एसआईटी की जांच पर पूरा भरोसा है, किंतु यदि कोई पक्ष सीबीआई से जांच चाहता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं। उन्होंने कहा कि न्यायालय का जो भी निर्णय होगा, वह उन्हें स्वीकार्य होगा।

परमहंस आचार्य का पक्ष

परमहंस आचार्य ने कहा, 'सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर ही केंद्र सरकार की देखरेख में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन हुआ था। यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। किसी के भी जांच की मांग करने पर हमें कोई आपत्ति नहीं है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि चाहे ₹1 की चोरी हो या ₹1 करोड़ की — दोषी व्यक्ति के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए और वे किसी अपराधी को बचाने के पक्ष में नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और यदि किसी ने इससे जुड़ा कोई अपराध किया है तो उसे किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाना चाहिए।

अखिलेश यादव पर निशाना

परमहंस आचार्य ने समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके नेता अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो अखिलेश यादव आज तक राम मंदिर नहीं गए और जिन्होंने स्वयं कहा था कि उन्हें गौशालाओं से बदबू आती है, वे आज मंदिर पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ने कारसेवकों पर गोलियां चलवाई थीं और मुजफ्फरनगर दंगों के समय हिंदू पीड़ितों को मुआवजा नहीं दिया गया, जबकि मुस्लिम पीड़ितों को मुआवजा दिया गया — एक मामला जिस पर बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने भी टिप्पणी की थी।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अखिलेश सरकार ने आतंकवाद के आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने की घोषणा की थी, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगाई थी। आचार्य ने कहा, 'सपा का इतिहास जनता के पैसे के दुरुपयोग का रहा है। सैफई महोत्सव में जनता के हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए। ऐसे लोग आज राम मंदिर का हिसाब मांग रहे हैं।'

राजनीतिक साजिश का आरोप

परमहंस आचार्य ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने इस मुद्दे को राजनीतिक साजिश के तहत चुनावी लाभ के लिए उछाला है। उनके अनुसार, इन लोगों का उद्देश्य आगामी चुनावों को प्रभावित करना और राम मंदिर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), विश्व हिंदू परिषद (VHP) तथा भारतीय जनता पार्टी (BJP) की छवि को नुकसान पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि यदि किसी अन्य धार्मिक स्थल पर भी वित्तीय अनियमितता होती है तो उसकी भी जांच होनी चाहिए — केवल राम मंदिर को निशाना बनाकर राजनीति करना उचित नहीं है।

अन्य संतों और पूर्व पक्षकार की प्रतिक्रिया

अयोध्या के संत वरुण दास ने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुआ था, इसलिए सामने आए आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि ट्रस्ट में हुई कथित अनियमितताओं के सभी पहलुओं की जांच की जाए, संबंधित पदाधिकारियों से पूछताछ हो और सुप्रीम कोर्ट सभी तथ्यों पर विचार कर निर्णय दे। वरुण दास ने कहा कि अदालत का जो भी फैसला होगा, सभी संत उसका सम्मान करेंगे।

वहीं, बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि यदि किसी ने गलत किया है तो कानून अपना काम करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि अयोध्या में श्रद्धालुओं का उत्साह बना हुआ है और लोग बड़ी संख्या में भगवान राम के दर्शन, हनुमानगढ़ी में पूजा तथा सरयू स्नान के लिए आ रहे हैं।

आगे क्या होगा

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर न्यायालय में सुनवाई जारी है। फिलहाल एसआईटी इस मामले की जांच कर रही है। परमहंस आचार्य ने संकेत दिया कि यदि किसी पक्ष को एसआईटी पर भरोसा नहीं है, तो सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में भी जांच कराई जा सकती है — और उन्हें किसी भी निष्पक्ष जांच प्रक्रिया से कोई आपत्ति नहीं होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी तरफ अखिलेश यादव और सपा को निशाना बनाकर मामले को धार्मिक-राजनीतिक ध्रुवीकरण की ओर मोड़ते हैं। यह रणनीति उस परिचित पैटर्न से मेल खाती है जिसमें धार्मिक नेता जवाबदेही की मांग को स्वीकार करते हुए भी आलोचकों की साख को चुनौती देते हैं। असली सवाल यह है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट — जो सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर बना — में कथित वित्तीय अनियमितता की जांच किस एजेंसी द्वारा और किस पारदर्शिता के साथ होगी। जब तक जांच का दायरा और परिणाम सार्वजनिक नहीं होते, तब तक यह विवाद चुनावी मौसम में धार्मिक भावनाओं को भुनाने का माध्यम बनने का जोखिम उठाता है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला क्या है?
यह मामला श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितता से जुड़ा है, जिसमें मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए धन की कथित चोरी के आरोप लगे हैं। इस मामले में सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर न्यायालय में सुनवाई जारी है और फिलहाल एसआईटी जांच कर रही है।
परमहंस आचार्य ने एसआईटी और सीबीआई जांच पर क्या कहा?
जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि उन्हें एसआईटी जांच पर पूरा भरोसा है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई सीबीआई से जांच चाहता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है और न्यायालय का जो भी फैसला होगा, वह उन्हें मंजूर होगा।
परमहंस आचार्य ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाए?
परमहंस आचार्य ने अखिलेश यादव पर आरोप लगाया कि वे आज तक राम मंदिर नहीं गए और अब राजनीतिक साजिश के तहत इस मुद्दे को चुनावी लाभ के लिए उठा रहे हैं। उन्होंने मुजफ्फरनगर दंगों में हिंदू पीड़ितों को मुआवजा न देने और आतंकवाद के आरोपियों के मुकदमे वापस लेने की घोषणा का भी उल्लेख किया, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगाई थी।
संत वरुण दास और इकबाल अंसारी ने इस मामले में क्या कहा?
अयोध्या के संत वरुण दास ने निष्पक्ष जांच और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी की मांग का समर्थन किया तथा कहा कि संबंधित पदाधिकारियों से पूछताछ होनी चाहिए। बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि यदि किसी ने गलत किया है तो कानून अपना काम करेगा।
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन कैसे हुआ था?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर केंद्र सरकार की देखरेख में हुआ था। यह ट्रस्ट अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है।
राष्ट्र प्रेस
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