जून 2026 में भारत का वस्तु निर्यात 15.5% उछला, 40.41 अरब डॉलर पर पहुंचा; व्यापार घाटा 30.43 अरब डॉलर
सारांश
मुख्य बातें
भारत का वस्तु निर्यात जून 2026 में सालाना आधार पर 15.5 प्रतिशत की मजबूत बढ़त के साथ 40.41 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो जून 2025 में 34.98 अरब डॉलर था। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा 13 जुलाई 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, यह वृद्धि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की निर्यात क्षमता की पुष्टि करती है। हालांकि, कच्चे तेल और कीमती धातुओं की ऊंची वैश्विक कीमतों ने आयात को और तेज़ी से बढ़ाया, जिससे व्यापार घाटा चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया।
मुख्य आंकड़े: निर्यात, आयात और व्यापार घाटा
आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में आयात 31 प्रतिशत उछलकर 70.84 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जबकि जून 2025 में यह 54.08 अरब डॉलर था। निर्यात की तुलना में आयात की यह तीव्र वृद्धि वस्तु व्यापार घाटे को जून 2025 के 19.10 अरब डॉलर से लगभग 59 प्रतिशत बढ़ाकर 30.43 अरब डॉलर पर ले गई।
मासिक तुलना में, मई 2026 के 45.20 अरब डॉलर के मुकाबले जून में निर्यात घटा। इसी प्रकार आयात भी मई के 73.41 अरब डॉलर से नीचे आया। सरकार के अनुसार, पेट्रोलियम, इलेक्ट्रॉनिक्स और रत्न एवं आभूषण क्षेत्रों में व्यापार घाटे में सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई।
पहली तिमाही का प्रदर्शन: Q1 FY27 में 15.9% की बढ़त
अप्रैल-जून 2026 तिमाही के दौरान भारत का कुल वस्तु निर्यात लगभग 15.9 प्रतिशत बढ़कर 129.32 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह वैश्विक बाज़ारों में बनी अनिश्चितताओं के बावजूद उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी शुल्क नीतियों और भू-राजनीतिक तनावों ने वैश्विक व्यापार को प्रभावित किया है।
खाड़ी और अमेरिका को निर्यात में सुधार
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, खाड़ी देशों को भारत का निर्यात युद्ध-पूर्व स्तर पर लौट आया है — यह मार्च 2026 के 2.62 अरब डॉलर से बढ़कर मई 2026 में 5.3 अरब डॉलर हो गया। कारोबारियों द्वारा वैकल्पिक शिपिंग मार्गों के उपयोग को इस सुधार की प्रमुख वजह बताया गया है। वहीं, अप्रैल-मई 2026 के दौरान अमेरिका को भारत का निर्यात 17.29 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
एफटीए और बाज़ार विविधीकरण की रणनीति
भारत अपने निर्यात बाज़ारों में सक्रिय रूप से विविधता ला रहा है। यूनाइटेड किंगडम (UK) के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) इसी महीने से लागू होने जा रहा है, जबकि यूरोपीय संघ (EU) के साथ समझौते के अगले वर्ष की शुरुआत तक अंतिम रूप लेने की उम्मीद है।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि अब भारत के कुल वस्तु निर्यात में आधे से अधिक हिस्सा NAFTA और यूरोप के बाहर के क्षेत्रों का है, जो निर्यात बाज़ारों के विविधीकरण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। देश में बढ़ती आय और विस्तार होते मध्यम वर्ग की मजबूत मांग के चलते इलेक्ट्रॉनिक सामानों का आयात भी लगातार बढ़ रहा है, जिसे अधिकारी आर्थिक विकास का संकेत मानते हैं।
UK एफटीए के लागू होने और EU समझौते के करीब आने के साथ, विशेषज्ञों की नज़र इस बात पर होगी कि क्या ये कदम आने वाली तिमाहियों में व्यापार घाटे को संतुलित करने में सहायक होंगे।