अमेरिका-भारत व्यापार घाटा मार्च 2026 में 50% घटकर $3.8 अरब डॉलर, अमेरिकी आधिकारिक डेटा से खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी सरकार के आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में अमेरिका का भारत के साथ व्यापार घाटा घटकर 3.8 अरब डॉलर रह गया, जो एक साल पहले की समान अवधि में 7.4 अरब डॉलर था — यानी 48.64 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट। यह आँकड़ा ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देश व्यापार पहुँच, आपूर्ति श्रृंखला और शुल्क संबंधी मुद्दों पर सक्रिय बातचीत कर रहे हैं।
भारत के साथ आयात-निर्यात का ब्यौरा
मार्च 2026 में अमेरिका का भारत को निर्यात बढ़कर 4.3 अरब डॉलर हो गया। वहीं, भारत से अमेरिकी आयात 8.4 अरब डॉलर दर्ज किया गया। इस प्रकार दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन में पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।
अमेरिका का कुल व्यापार घाटा बढ़ा
हालाँकि भारत के साथ घाटा कम हुआ, लेकिन मार्च 2026 में अमेरिका का कुल वस्तु एवं सेवाओं का व्यापार घाटा बढ़कर 60.3 अरब डॉलर हो गया, जो फरवरी के संशोधित 57.8 अरब डॉलर से 2.5 अरब डॉलर अधिक है। इस दौरान अमेरिकी निर्यात 320.9 अरब डॉलर रहा — फरवरी से 6.2 अरब डॉलर अधिक — जबकि आयात 8.7 अरब डॉलर बढ़कर 381.2 अरब डॉलर पहुँच गया।
घाटे में वृद्धि के मुख्य कारण
आँकड़ों के अनुसार, कुल घाटे में बढ़ोतरी मुख्यतः वस्तुओं के घाटे में 4.1 अरब डॉलर की वृद्धि के कारण हुई, जो 88.7 अरब डॉलर पर पहुँच गया। दूसरी ओर, सेवाओं का अधिशेष 1.6 अरब डॉलर बढ़कर 28.4 अरब डॉलर हो गया। निर्यात की तरफ, कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों में तेज़ी के चलते औद्योगिक आपूर्ति एवं सामग्रियों के निर्यात में 5 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज हुई; अकेले कच्चे तेल के निर्यात में 2.8 अरब डॉलर का उछाल आया।
आयात में किन क्षेत्रों ने दिया योगदान
आयात में वृद्धि मुख्यतः ऑटोमोबाइल, उपभोक्ता वस्तुओं और पूंजीगत वस्तुओं के कारण रही। ऑटोमोबाइल वाहनों, पुर्जों और इंजनों के आयात में 3.6 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई, जिसमें यात्री कारों का आयात अकेले 2.8 अरब डॉलर बढ़ा। इसके अलावा, कंप्यूटर एक्सेसरीज़ के आयात में 2 अरब डॉलर की वृद्धि ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं प्रौद्योगिकी उत्पादों की निरंतर माँग को रेखांकित किया।
अन्य देशों के साथ अमेरिकी घाटे की तुलना
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में चीन के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा 14 अरब डॉलर, वियतनाम के साथ 19.2 अरब डॉलर और ताइवान के साथ 20.6 अरब डॉलर रहा। इस तुलना में भारत के साथ घटता घाटा अपेक्षाकृत सकारात्मक संकेत देता है। गौरतलब है कि यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब भारत और अमेरिका व्यापार पहुँच, आपूर्ति श्रृंखला, प्रौद्योगिकी सहयोग और शुल्क संबंधी मुद्दों पर सक्रिय वार्ता जारी रखे हुए हैं — और आने वाले महीनों में इन वार्ताओं की दिशा इन आँकड़ों से प्रभावित हो सकती है।