भाजपा रैली में बच्चों के कथित इस्तेमाल पर बीजेडी ने ओडिशा बाल आयोग से जांच माँगी
सारांश
मुख्य बातें
बीजू जनता दल (बीजेडी) के एक प्रतिनिधिमंडल ने 13 जुलाई 2026 को ओडिशा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (ओएससीपीसीआर) की अध्यक्ष से मुलाकात कर एक आवेदन सौंपा, जिसमें 12 जुलाई को भुवनेश्वर में आयोजित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक राजनीतिक कार्यक्रम में नाबालिग बच्चों के कथित इस्तेमाल की जांच कराने की मांग की गई। बीजेडी का आरोप है कि उक्त रैली में कई नाबालिग भाजपा की टोपी पहने और पार्टी के झंडे, पोस्टर तथा बैनर लिए हुए दिखाई दिए।
मामले की पृष्ठभूमि
12 जुलाई को पूर्व विधायक प्रभात रंजन बिस्वाल अपने समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हुए। इस अवसर पर आयोजित रैली में बच्चों की उपस्थिति को लेकर बीजेडी ने आपत्ति जताई है। बीजेडी के अनुसार, बच्चों को राजनीतिक प्रचार का माध्यम बनाना उनके मौलिक अधिकारों और कल्याण के विरुद्ध है।
बीजेडी की शिकायत में क्या है
बीजेडी ने अपनी शिकायत में आयोग से तीन नेताओं — मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और पूर्व विधायक प्रभात रंजन बिस्वाल — को नोटिस जारी कर उनका पक्ष माँगने का अनुरोध किया है। पार्टी ने कहा, 'इस तरह किसी राजनीतिक रैली में बच्चों की भागीदारी उनके अधिकारों, कल्याण और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है। बच्चों को राजनीतिक गतिविधियों या रैलियों में इस तरह शामिल नहीं किया जाना चाहिए, जिससे वे राजनीतिक प्रभाव या सार्वजनिक प्रचार का हिस्सा बनें।'
आयोग से माँगी गई कार्रवाई
बीजेडी ने ओएससीपीसीआर से इस मामले का स्वतः संज्ञान लेने और उचित जांच कराने की अपील की है। पार्टी ने यह भी माँग की कि भविष्य में किसी भी राजनीतिक रैली, प्रदर्शन या चुनाव प्रचार में बच्चों के इस्तेमाल को रोकने के लिए आयोग स्पष्ट निर्देश जारी करे। बीजेडी ने अपने आवेदन में कहा, 'हमें पूरा विश्वास है कि माननीय आयोग इस मामले का तुरंत संज्ञान लेगा और बच्चों के अधिकारों तथा उनके सर्वोत्तम हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा।'
आगे क्या होगा
अब यह देखना होगा कि ओएससीपीसीआर बीजेडी की शिकायत पर संज्ञान लेती है या नहीं। यदि आयोग नोटिस जारी करता है, तो मुख्यमंत्री माझी और भाजपा नेतृत्व को अपना पक्ष रखना होगा। यह मामला ओडिशा की राजनीति में बाल अधिकारों के सवाल को नए सिरे से केंद्र में ला सकता है।