13 जुलाई 2026
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भाजपा रैली में बच्चों के कथित इस्तेमाल पर बीजेडी ने ओडिशा बाल आयोग से जांच माँगी

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भाजपा रैली में बच्चों के कथित इस्तेमाल पर बीजेडी ने ओडिशा बाल आयोग से जांच माँगी

सारांश

बीजेडी ने ओडिशा बाल आयोग का दरवाज़ा खटखटाया — आरोप है कि 12 जुलाई की भाजपा रैली में नाबालिग बच्चों को पार्टी की टोपी पहनाकर और झंडे थमाकर राजनीतिक प्रचार में उतारा गया। CM माझी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधायक बिस्वाल को नोटिस की माँग की गई है।

मुख्य बातें

बीजू जनता दल (बीजेडी) ने 13 जुलाई 2026 को ओडिशा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (ओएससीपीसीआर) में शिकायत दर्ज कराई।
आरोप है कि 12 जुलाई को भुवनेश्वर में आयोजित भाजपा की रैली में नाबालिग बच्चे पार्टी की टोपी, झंडे और बैनर के साथ शामिल हुए।
रैली पूर्व विधायक प्रभात रंजन बिस्वाल के भाजपा में शामिल होने के अवसर पर आयोजित की गई थी।
बीजेडी ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी , भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और बिस्वाल को नोटिस जारी करने की माँग की।
पार्टी ने भविष्य में बच्चों को राजनीतिक रैलियों में इस्तेमाल रोकने के लिए आयोग से दिशानिर्देश जारी करने का अनुरोध किया।

बीजू जनता दल (बीजेडी) के एक प्रतिनिधिमंडल ने 13 जुलाई 2026 को ओडिशा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (ओएससीपीसीआर) की अध्यक्ष से मुलाकात कर एक आवेदन सौंपा, जिसमें 12 जुलाई को भुवनेश्वर में आयोजित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक राजनीतिक कार्यक्रम में नाबालिग बच्चों के कथित इस्तेमाल की जांच कराने की मांग की गई। बीजेडी का आरोप है कि उक्त रैली में कई नाबालिग भाजपा की टोपी पहने और पार्टी के झंडे, पोस्टर तथा बैनर लिए हुए दिखाई दिए।

मामले की पृष्ठभूमि

12 जुलाई को पूर्व विधायक प्रभात रंजन बिस्वाल अपने समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हुए। इस अवसर पर आयोजित रैली में बच्चों की उपस्थिति को लेकर बीजेडी ने आपत्ति जताई है। बीजेडी के अनुसार, बच्चों को राजनीतिक प्रचार का माध्यम बनाना उनके मौलिक अधिकारों और कल्याण के विरुद्ध है।

बीजेडी की शिकायत में क्या है

बीजेडी ने अपनी शिकायत में आयोग से तीन नेताओं — मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और पूर्व विधायक प्रभात रंजन बिस्वाल — को नोटिस जारी कर उनका पक्ष माँगने का अनुरोध किया है। पार्टी ने कहा, 'इस तरह किसी राजनीतिक रैली में बच्चों की भागीदारी उनके अधिकारों, कल्याण और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है। बच्चों को राजनीतिक गतिविधियों या रैलियों में इस तरह शामिल नहीं किया जाना चाहिए, जिससे वे राजनीतिक प्रभाव या सार्वजनिक प्रचार का हिस्सा बनें।'

आयोग से माँगी गई कार्रवाई

बीजेडी ने ओएससीपीसीआर से इस मामले का स्वतः संज्ञान लेने और उचित जांच कराने की अपील की है। पार्टी ने यह भी माँग की कि भविष्य में किसी भी राजनीतिक रैली, प्रदर्शन या चुनाव प्रचार में बच्चों के इस्तेमाल को रोकने के लिए आयोग स्पष्ट निर्देश जारी करे। बीजेडी ने अपने आवेदन में कहा, 'हमें पूरा विश्वास है कि माननीय आयोग इस मामले का तुरंत संज्ञान लेगा और बच्चों के अधिकारों तथा उनके सर्वोत्तम हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा।'

आगे क्या होगा

अब यह देखना होगा कि ओएससीपीसीआर बीजेडी की शिकायत पर संज्ञान लेती है या नहीं। यदि आयोग नोटिस जारी करता है, तो मुख्यमंत्री माझी और भाजपा नेतृत्व को अपना पक्ष रखना होगा। यह मामला ओडिशा की राजनीति में बाल अधिकारों के सवाल को नए सिरे से केंद्र में ला सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका राजनीतिक समय भी उतना ही स्पष्ट है — बिस्वाल का भाजपा में जाना बीजेडी के लिए सीधा झटका था। असली सवाल यह है कि क्या ओएससीपीसीआर इसे एक गंभीर बाल अधिकार उल्लंघन मानकर स्वतः संज्ञान लेगा, या यह शिकायत राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की एक और मिसाल बनकर रह जाएगी। भारत के चुनाव आयोग और विभिन्न राज्य बाल आयोगों ने पहले भी राजनीतिक रैलियों में बच्चों की भागीदारी पर चिंता जताई है, पर ठोस कार्रवाई के उदाहरण दुर्लभ हैं। यदि आयोग इस बार सख्त रुख अपनाता है, तो यह ओडिशा में एक मिसाल कायम कर सकता है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीजेडी ने ओडिशा बाल आयोग में किस बात की शिकायत की है?
बीजेडी ने 12 जुलाई 2026 को भुवनेश्वर में आयोजित भाजपा की एक रैली में नाबालिग बच्चों के कथित इस्तेमाल की जांच की माँग की है। पार्टी का आरोप है कि बच्चों को भाजपा की टोपी पहनाकर और पार्टी के झंडे-बैनर थमाकर राजनीतिक प्रचार में उतारा गया।
किन नेताओं को नोटिस जारी करने की माँग की गई है?
बीजेडी ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और पूर्व विधायक प्रभात रंजन बिस्वाल को नोटिस जारी कर उनका पक्ष माँगने का अनुरोध किया है।
यह रैली किस अवसर पर आयोजित हुई थी?
12 जुलाई 2026 को पूर्व विधायक प्रभात रंजन बिस्वाल अपने समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हुए। इसी अवसर पर भुवनेश्वर में एक रैली आयोजित की गई, जिसमें बच्चों की कथित भागीदारी पर विवाद खड़ा हुआ।
ओएससीपीसीआर से और क्या माँगा गया है?
बीजेडी ने आयोग से न केवल इस मामले की जांच कराने, बल्कि भविष्य में किसी भी राजनीतिक रैली, प्रदर्शन या चुनाव प्रचार में बच्चों के इस्तेमाल को रोकने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने की भी माँग की है।
क्या राजनीतिक रैलियों में बच्चों की भागीदारी कानूनी रूप से प्रतिबंधित है?
भारत में बाल अधिकार संरक्षण कानून बच्चों को राजनीतिक प्रभाव या प्रचार के लिए इस्तेमाल करने की मनाही करता है। राज्य बाल आयोग ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान लेने और जांच कराने का अधिकार रखते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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