लाडली बहिन योजना से लाखों नाम हटाए जाने पर सांसद अरविंद सावंत का सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने 13 जुलाई को मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए महाराष्ट्र सरकार की 'लाडली बहिन' योजना से बड़ी संख्या में महिला लाभार्थियों के नाम हटाए जाने को गंभीर मामला बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस योजना का इस्तेमाल विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए किया गया।
लाखों महिलाओं के नाम हटाए जाने का मामला
सावंत ने कहा कि उन्होंने महीने की शुरुआत में भी इस मुद्दे पर चिंता जताई थी और लाडली बहिन योजना से लाखों महिलाओं के नाम सूची से हटाए जा चुके हैं। उन्होंने तर्क दिया, 'विधानसभा चुनाव के दौरान इस योजना का लाभ मिलने की उम्मीद में बड़ी संख्या में महिलाओं और उनके परिवारों ने मतदान किया था। यदि प्रत्येक परिवार के औसतन तीन वोटों का अनुमान लगाया जाए तो यह संख्या करोड़ों तक पहुँचती है।'
सावंत के अनुसार, 'जनता के धन का इस्तेमाल चुनावी लाभ के लिए किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की भावना के विपरीत है।' उन्होंने यह भी कहा कि योजना में कुछ पुरुषों द्वारा कथित तौर पर अनुचित तरीके से लाभ उठाने के मामले सामने आए हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उद्धव ठाकरे की प्रेस कॉन्फ्रेंस का संदर्भ
सांसद सावंत ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे की हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस का हवाला देते हुए बताया कि उसमें सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और देश के युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर चिंता व्यक्त की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद का सत्र जारी है और पार्टी इन विषयों को लगातार उठाती रहेगी। युवाओं के भविष्य और रोज़गार से जुड़े सवाल विपक्ष की प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर हैं।
मंत्री नितेश राणे के बयान पर प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे द्वारा अभिनेता आमिर खान की तीसरी शादी को लेकर दिए गए बयान पर सावंत ने कहा कि देश के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियाँ हैं और इस प्रकार के बयान केवल सार्वजनिक विमर्श का ध्यान भटकाने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों को अनावश्यक महत्व नहीं दिया जाना चाहिए।
हिंदू-मुस्लिम विवाद की ओर ध्यान भटकाने का आरोप
सावंत ने यह भी कहा कि जब भी कोई बड़ा जनहित का मुद्दा सामने आता है, तब चर्चा को साम्प्रदायिक विवादों की ओर मोड़ने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे वास्तविक जनहित के सवालों — जैसे रोज़गार, महिला कल्याण और संवैधानिक मूल्यों — पर ध्यान केंद्रित रखें। आने वाले संसद सत्र में विपक्ष इन मुद्दों को और अधिक प्रभावी ढंग से उठाने की तैयारी में है।