दिल्ली दंगा: आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन समेत 5 दोषी करार, कड़कड़डूमा कोर्ट का बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
कड़कड़डूमा कोर्ट ने 14 जुलाई 2025 को इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पूर्व एमसीडी पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 आरोपियों को दोषी करार दिया। यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की सांप्रदायिक हिंसा के दौरान हुई हत्या से जुड़ा है, जिसे 2020 दिल्ली दंगों के सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में गिना जाता है।
मुख्य घटनाक्रम
इस मामले में कुल 11 आरोपी ट्रायल का सामना कर रहे थे। कोर्ट ने ताहिर हुसैन के अलावा नाजिम, जावेद, कासिम और अनस को भी दोषी ठहराया, जबकि शेष 6 आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने सभी दोषियों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या), 365, 188, 153ए, 147, 148 और 149 के तहत दोषी माना। हालाँकि, आपराधिक साजिश की धारा 120बी के आरोप से सभी को बरी किया गया।
फैसले के बाद कोर्ट परिसर का दृश्य
फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद कोर्ट परिसर में ताहिर हुसैन रो पड़े। दोषसिद्धि की घोषणा होते ही उनके समर्थकों में सन्नाटा छा गया। अदालत ने सजा पर बहस की तारीख अभी तय नहीं की है — लिखित आदेश आने के बाद, जो मंगलवार को अपेक्षित है, सजा पर जिरह की तारीख निर्धारित होगी।
अंकित शर्मा हत्याकांड की पृष्ठभूमि
अंकित शर्मा की हत्या फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांद बाग इलाके में दंगों के दौरान हुई थी। उनका शव उसी क्षेत्र के एक नाले से बरामद किया गया था। इस घटना के बाद अंकित शर्मा के पिता की शिकायत पर दयालपुर पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। गौरतलब है कि ताहिर हुसैन उस समय आम आदमी पार्टी (AAP) के पार्षद थे और उनका घर चांद बाग इलाके में ही स्थित था।
अभियोजन पक्ष की दलीलें और साक्ष्य
दिल्ली पुलिस की जाँच में ताहिर हुसैन समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया था। अभियोजन पक्ष ने गवाहों की गवाही, दस्तावेज़ों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर दलीलें रखीं। जाँच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि दंगों के दौरान हिंसा को अंजाम देने में आरोपियों की सक्रिय भूमिका रही। बचाव पक्ष ने सभी आरोपों को खारिज किया था, परंतु अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्कों और साक्ष्यों को विश्वसनीय पाया।
आगे क्या होगा
दोषसिद्धि के बाद अब अदालत सजा की मात्रा तय करने के लिए सुनवाई करेगी। आईपीसी धारा 302 के तहत दोषसिद्धि में अधिकतम सजा मृत्युदंड या आजीवन कारावास हो सकती है। यह फैसला 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में अदालती प्रक्रिया का एक निर्णायक पड़ाव है और आने वाले दिनों में सजा पर सुनवाई इस मामले की अगली अहम कड़ी होगी।