आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड: कड़कड़डूमा कोर्ट का फैसला 13 जुलाई तक स्थगित, ताहिर हुसैन समेत 11 आरोपी
सारांश
मुख्य बातें
कड़कड़डूमा कोर्ट ने खुफिया ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में 7 जुलाई को सुनाया जाने वाला फैसला 13 जुलाई 2026 तक के लिए स्थगित कर दिया है। यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान अंकित शर्मा की हत्या से जुड़ा है, जिसमें आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत 11 आरोपी कटघरे में हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
25 फरवरी 2020 को अंकित शर्मा घर का सामान लेने निकले और वापस नहीं लौटे। अगले दिन 26 फरवरी 2020 को उनका शव खजूरी खास इलाके के एक नाले से बरामद किया गया। उनके पिता रविंदर कुमार की शिकायत पर उसी दिन प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शिकायत के अनुसार, स्थानीय लोगों से मिली सूचना के आधार पर पता चला कि चांदबाग इलाके से एक युवक को खजूरी खास के नाले में फेंका गया था।
आरोप और कानूनी कार्यवाही
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि ताहिर हुसैन और अन्य आरोपी गैरकानूनी जमावड़े तथा आपराधिक साजिश का हिस्सा थे, जिसके चलते दंगों के दौरान अंकित शर्मा की हत्या की गई। मार्च 2023 में कड़कड़डूमा कोर्ट ने सभी 11 आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147 (दंगा), 148 (घातक हथियार के साथ दंगा), 153A (सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाना), 302 (हत्या) और 120B (आपराधिक साजिश) के तहत आरोप तय किए थे।
ताहिर हुसैन पर इसके अतिरिक्त IPC की धारा 505, 109 और 114 के तहत भी आरोप तय किए गए। आरोप तय करते समय ट्रायल कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि ताहिर हुसैन ने कथित तौर पर भीड़ को हिंदुओं को निशाना बनाने के लिए उकसाया और 'किसी को न छोड़ने' के निर्देश दिए।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगे: संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कई मुकदमे अदालतों में विचाराधीन हैं। उन दंगों में दर्जनों लोगों की जान गई थी और सैकड़ों घायल हुए थे। अंकित शर्मा का मामला इन दंगों के सबसे चर्चित और संवेदनशील मुकदमों में से एक रहा है, क्योंकि वे एक सक्रिय खुफिया अधिकारी थे। गौरतलब है कि इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक ध्यान आकर्षित किया था।
आगे क्या होगा
अदालत अब 13 जुलाई 2026 को इस मामले में सुनवाई करेगी। फैसले का इंतजार अंकित शर्मा के परिवार समेत उन सभी लोगों को है जो न्यायिक प्रक्रिया पर नज़र रख रहे हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत वर्षों से चले आ रहे इस संवेदनशील मुकदमे में क्या निर्णय सुनाती है।