भारत-इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस से UPI तक बड़े समझौते, समुद्री सुरक्षा व व्यापार को मिलेगी नई ताकत
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच 8 जुलाई 2025 को जकार्ता में हुई शिखर वार्ता के बाद भारत और इंडोनेशिया ने समुद्री सुरक्षा, रक्षा, डिजिटल भुगतान, महत्वपूर्ण खनिज, स्वास्थ्य और व्यापार समेत कई अहम क्षेत्रों में बहुपक्षीय समझौता ज्ञापनों (MOU) पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाले ये समझौते हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता को भी रेखांकित करते हैं।
रक्षा और समुद्री सहयोग
दोनों नेताओं ने ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली और एयर-टू-एयर मिसाइल सहयोग समझौते के ज़रिए रक्षा साझेदारी को नई ऊँचाई देने का स्वागत किया। आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों देशों ने संयुक्त उत्पादन, तकनीक हस्तांतरण, जहाज निर्माण, रखरखाव एवं मरम्मत (MRO) सुविधाओं की स्थापना और रक्षा अनुसंधान एवं विकास (R&D) में सहयोग पर सहमति जताई।
समुद्री क्षेत्र में मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (MDA), तटीय निगरानी, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR), प्रदूषण नियंत्रण और खोज एवं बचाव (SAR) में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। इंडोनेशिया की समुद्री सुरक्षा एजेंसी बाकामला RI और भारतीय तटरक्षक बल के बीच कार्यान्वयन व्यवस्था का नवीनीकरण भी किया गया।
डिजिटल अर्थव्यवस्था और UPI विस्तार
डिजिटल सहयोग के मोर्चे पर दोनों देशों ने क्रॉस-बॉर्डर QR पेमेंट लिंक लागू करने की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत किया, जिससे सीमा-पार डिजिटल भुगतान और सुगम होगा। भारत के ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) मॉडल को अपनाते हुए इंडोनेशिया में इंडोनेशिया ओपन नेटवर्क (ION) शुरू करने का भी स्वागत किया गया, जिसका उद्देश्य इंडोनेशिया के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) की डिजिटल अर्थव्यवस्था में भागीदारी बढ़ाना है।
इसके साथ ही भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और बैंक इंडोनेशिया के बीच स्थानीय मुद्रा में लेनदेन (LCT) संबंधी दिशा-निर्देशों को जल्द लागू करने पर भी सहमति बनी, जिससे डॉलर-निर्भरता घटाकर द्विपक्षीय व्यापार को बल मिलेगा।
व्यापार, निवेश और महत्वपूर्ण खनिज
दोनों नेताओं ने माना कि भारत के 'विकसित भारत 2047' और इंडोनेशिया के 'इंडोनेशिया एमास 2045' विज़न के बीच आर्थिक सहयोग की व्यापक संभावनाएँ हैं। इसी दिशा में आसियान-भारत व्यापार समझौते (AITIGA) की समीक्षा जल्द पूरी करने पर जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने 2026 में वर्किंग ग्रुप ऑन ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट (WGTI) की दूसरी बैठक, बाइएनियल ट्रेड मिनिस्टर्स फोरम (BTMF) की चौथी बैठक और जॉइंट इकोनॉमिक एंड फाइनेंशियल डायलॉग (EFD) की पहली बैठक आयोजित करने पर सहमति जताई।
क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने खनिज और स्टील सप्लाई चेन तकनीक में सहयोग संबंधी MOU पर हस्ताक्षर किए। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाना दोनों देशों की प्राथमिकता बन चुकी है।
स्वास्थ्य और संपर्क
स्वास्थ्य क्षेत्र में दोनों देशों ने स्वास्थ्य कर्मियों के कौशल विकास संबंधी कार्यान्वयन व्यवस्था पर हस्ताक्षर किए और खाद्य सुरक्षा तथा पोषण में साझेदारी बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। सैन्य चिकित्सा संस्थानों के बीच दवाइयों की आपूर्ति को लेकर हो रही प्रगति का भी स्वागत किया गया।
समुद्री और हवाई संपर्क के मोर्चे पर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने सबांग बंदरगाह के एकीकृत विकास में भारत की रुचि का स्वागत किया। गौरतलब है कि सबांग बंदरगाह हिंद महासागर में रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है।
आगे की राह
इन बहुआयामी समझौतों के साथ भारत और इंडोनेशिया ने स्पष्ट संकेत दिया है कि दोनों देश रक्षा, व्यापार, डिजिटल तकनीक और समुद्री सुरक्षा में अपनी साझेदारी को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आने वाले महीनों में इन समझौतों के क्रियान्वयन की गति ही यह तय करेगी कि यह शिखर वार्ता वास्तव में द्विपक्षीय संबंधों में कितना बड़ा बदलाव लाती है।