पीएम मोदी की इंडोनेशिया यात्रा: रक्षा, व्यापार और समुद्री सहयोग को मिलेगी नई दिशा
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की यात्रा के पहले चरण में 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया के दौरे पर हैं। यह यात्रा दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, समुद्री सुरक्षा और डिजिटल साझेदारी को नई गति देने के उद्देश्य से आयोजित की गई है। इंडोनेशिया में प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे।
व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती
यह प्रधानमंत्री मोदी का इंडोनेशिया का चौथा दौरा है और मई 2018 में दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी स्थापित होने के बाद पहली द्विपक्षीय यात्रा है। गौरतलब है कि इंडोनेशिया आसियान क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है। 2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार $24.78 बिलियन रहने का अनुमान है। इंडोनेशिया में विभिन्न क्षेत्रों में 130 से अधिक भारतीय कंपनियाँ निवेश कर चुकी हैं।
रक्षा और समुद्री सहयोग का विस्तार
भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग में उच्च स्तरीय दौरे, नियमित द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास और रक्षा उद्योग में गहरी भागीदारी — जिसमें ब्रह्मोस मिसाइल की बिक्री भी शामिल है — के ज़रिए तेजी आई है। 2018 में दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग का साझा दृष्टिकोण अपनाया था। इस यात्रा के दौरान आईएफसी-आईओआर में एक इंडोनेशियाई संपर्क अधिकारी की तैनाती पर सहमति बनने की उम्मीद है, जिससे समुद्री क्षेत्र की जागरूकता और बेहतर होगी। इसके अलावा, भारत एनडीए और डीएसएससी में इंडोनेशियाई कैडेट्स और अधिकारियों के लिए स्लॉट आरक्षित करेगा।
व्यापार, खाद्य सुरक्षा और जरूरी खनिज
विकसित भारत 2047 और एमास इंडोनेशिया 2045 के विकास दृष्टिकोण के बीच स्पष्ट तालमेल है। खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भारत इंडोनेशिया को 100 टन उच्च गुणवत्ता वाले डीडब्ल्यूआर 162 गेहूँ के बीज की आपूर्ति करेगा। खनिज सहयोग के मोर्चे पर इंडोनेशिया वैश्विक स्तर पर अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है — दुनिया के लगभग 21 प्रतिशत निकल भंडार पर उसका नियंत्रण है और वह कॉपर, बॉक्साइट तथा टिन के शीर्ष वैश्विक उत्पादकों में शामिल है। इस यात्रा से जरूरी खनिजों के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग और मजबूत होने की संभावना है।
डिजिटल साझेदारी और विकास मॉडल का आदान-प्रदान
भारत के यूपीआई और इंडोनेशिया के क्यूआरआईएस डिजिटल भुगतान तंत्र के बीच बेहतर कनेक्टिविटी पर काम जारी है, जो पर्यटन, व्यापार और व्यवसाय को सुगम बनाएगी। इंडोनेशिया ओपन नेटवर्क (आईओएन) को भारत के ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) के समावेशी ढाँचे पर बनाया गया है, जिससे एमएसएमई को राष्ट्रीय और डिजिटल बाज़ार तक बेहतर पहुँच मिलेगी। इंडोनेशिया की रेड एंड व्हाइट विलेज कोऑपरेटिव्स पहल — जिसका लक्ष्य देश भर में 80,000 आत्मनिर्भर आर्थिक केंद्र बनाना है — भारत के सामाजिक कल्याण मॉडलों से प्रेरणा लेती है। राष्ट्रपति प्रबोवो के नेतृत्व में इंडोनेशिया की निःशुल्क पोषण भोजन पहल का दायरा 30 लाख से बढ़कर 3.6 करोड़ लाभार्थियों तक पहुँच गया है, जो भारत के मिड-डे मील / पीएम पोषण कार्यक्रम पर आधारित है।
सभ्यतागत संबंध और सांस्कृतिक कूटनीति
भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध हजारों वर्ष पुराने हैं। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो इंडोनेशिया में भगवान शिव को समर्पित सबसे बड़े मंदिर परिसर प्रम्बानन का भ्रमण करेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब भारत 2027 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की इंडोनेशिया यात्रा की 100वीं वर्षगाँठ मनाने की तैयारी कर रहा है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच सभ्यतागत धरोहर को समकालीन कूटनीतिक साझेदारी से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।