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बिहार पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने की योजना: 16वें वित्त आयोग की सिफारिश पर मंत्री दीपक प्रकाश का बड़ा बयान

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बिहार पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने की योजना: 16वें वित्त आयोग की सिफारिश पर मंत्री दीपक प्रकाश का बड़ा बयान

सारांश

बिहार सरकार 16वें वित्त आयोग की शर्त के तहत पंचायतों को अपना राजस्व खुद जुटाने के लिए प्रेरित कर रही है। ₹51,923 करोड़ के आवंटन में 10% परफॉर्मेंस ग्रांट OSR से जुड़ा है। राज्य ने शर्त में रियायत की माँग भी रखी है।

मुख्य बातें

16वें वित्त आयोग ने बिहार की पंचायती राज संस्थाओं के लिए अगले पाँच वर्षों में ₹51,923 करोड़ की अनुशंसा की है।
इस राशि का लगभग 10 प्रतिशत RLB परफॉर्मेंस ग्रांट से जुड़ा है, जिसके लिए पंचायतों को अपने स्तर पर आय के स्रोत (OSR) विकसित करने होंगे।
प्रति परिवार औसतन ₹1,200 वार्षिक संग्रह का लक्ष्य निर्धारित — मंत्री दीपक प्रकाश ने स्पष्ट किया यह सीधी वसूली नहीं, बल्कि औसत लक्ष्य है।
बिहार सरकार ने नई दिल्ली वर्कशॉप में इस शर्त में रियायत की माँग दर्ज कराई है।
पंचायतें खाली भूमि, तालाब निर्माण , मत्स्य पालन और सामुदायिक कार्यक्रमों से राजस्व जुटा सकती हैं।
बिहार में 100 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट खोलने की घोषणा को मंत्री ने जनहितकारी बताया।

बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने 6 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि राज्य की पंचायती राज संस्थाओं को सरकारी अनुदान पर निर्भरता कम करते हुए अपने स्तर पर आय के नए स्रोत विकसित करने होंगे। यह कदम 16वें वित्त आयोग की उन सिफारिशों का हिस्सा है, जिनके तहत बिहार की पंचायतों के लिए अगले पाँच वर्षों में लगभग ₹51,923 करोड़ की अनुशंसा की गई है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, प्रति परिवार औसतन ₹1,200 वार्षिक संग्रह का लक्ष्य रखा गया है — हालाँकि मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह एक औसत और लक्ष्य-आधारित आँकड़ा है, हर परिवार से सीधे यह राशि वसूल नहीं की जाएगी।

वित्त आयोग की सिफारिशें और परफॉर्मेंस ग्रांट

16वें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित ₹51,923 करोड़ की राशि में से लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा रूरल लोकल बॉडी (RLB) परफॉर्मेंस ग्रांट से जुड़ा है। इस ग्रांट को पाने के लिए पंचायतों को अपने स्वयं के राजस्व स्रोत (OSR) विकसित करने की शर्त पूरी करनी होगी। दीपक प्रकाश ने बताया कि इसी संदर्भ में प्रति परिवार ₹1,200 वार्षिक का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

गौरतलब है कि यह शर्त पंचायतों के लिए नई चुनौती लेकर आती है, क्योंकि बिहार की अधिकांश ग्राम पंचायतें अब तक केंद्र और राज्य सरकार के अनुदान पर ही निर्भर रही हैं। स्थानीय राजस्व संग्रह की क्षमता सीमित रही है, और यह पहली बार है जब परफॉर्मेंस-लिंक्ड ग्रांट के ज़रिये इस पर दबाव बनाया जा रहा है।

पंचायतों के लिए आय के वैकल्पिक स्रोत

मंत्री ने स्पष्ट किया कि पंचायतें आय जुटाने के लिए कई विकल्प अपना सकती हैं। इनमें पंचायत क्षेत्र की खाली भूमि का उपयोग, तालाब निर्माण, मत्स्य पालन, सामुदायिक संसाधनों का विकास और स्थानीय स्तर पर छोटे आय-सृजन कार्यक्रम शामिल हैं। उनका कहना था कि उद्देश्य यह है कि पंचायतें केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर न रहें, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ें।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस प्रक्रिया में आम जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े, इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा। पंचायतों को स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग की स्वतंत्रता दी जाएगी।

नई दिल्ली वर्कशॉप और बिहार की आपत्ति

हाल ही में नई दिल्ली में पंचायती राज मंत्रालय द्वारा आयोजित एक वर्कशॉप में इस विषय पर विस्तार से चर्चा हुई। दीपक प्रकाश ने बताया कि उस बैठक में बिहार की ओर से यह आपत्ति दर्ज कराई गई कि OSR विकास की इस शर्त में राज्य को कुछ रियायत दी जानी चाहिए, क्योंकि बिहार अभी अपने स्वयं के राजस्व स्रोत विकसित करने की प्रक्रिया में है। राज्य सरकार ने इस संबंध में औपचारिक रूप से छूट की माँग भी रखी है।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पंचायती राज संस्थाओं को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने की कोशिशें तेज हो रही हैं, लेकिन कम विकसित राज्यों के लिए OSR की शर्त पूरी करना एक बड़ी बाधा मानी जा रही है।

सहयोग कार्यक्रम और न्यायिक सुधार

जिला स्तर पर आयोजित 'सहयोग कार्यक्रम' में असंतुष्ट शिकायतकर्ताओं के पटना स्तर पर शामिल होने के प्रावधान को मंत्री ने सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रशासनिक प्रणाली में एक अपीलीय प्राधिकरण का होना आवश्यक है, ताकि नागरिक निचले स्तर पर असंतुष्ट रहने पर उच्च स्तर पर अपनी बात रख सकें।

बिहार में 100 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट खोलने की मुख्यमंत्री की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपक प्रकाश ने इसे जनहितकारी कदम बताया। उनका कहना था कि मामलों का त्वरित निपटारा होने से आम लोगों को समय पर न्याय मिल सकेगा।

बाँकीपुर उपचुनाव और राजनीतिक संदेश

बाँकीपुर उपचुनाव पर पूछे गए सवाल पर मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के विकास कार्यों पर जनता का भरोसा मजबूत हुआ है और उन्हें विश्वास है कि NDA एक बार फिर मजबूत प्रदर्शन करेगा। आगे पंचायतों के वित्तीय सशक्तिकरण की दिशा में नीतिगत कदमों की निगरानी महत्वपूर्ण होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ ग्रामीण आय और स्थानीय आर्थिक गतिविधि अभी भी सीमित है। प्रति परिवार ₹1,200 के लक्ष्य को 'औसत' बताकर नरम करने की कोशिश तो की गई है, लेकिन परफॉर्मेंस ग्रांट का 10% हिस्सा जोखिम में है, जो सीधे उन गाँवों को नुकसान पहुँचा सकता है जो यह लक्ष्य पूरा नहीं कर पाते। बिहार का रियायत माँगना यह भी दर्शाता है कि केंद्र की एक-समान नीति राज्यों की अलग-अलग क्षमताओं को नज़रअंदाज़ करती है। असली सवाल यह है कि क्या OSR की यह शर्त पंचायतों को सशक्त बनाएगी या उन्हें ग्रांट से वंचित कर और कमज़ोर करेगी।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार पंचायतों के लिए प्रति परिवार ₹1,200 वार्षिक टैक्स क्या है?
यह 16वें वित्त आयोग की OSR शर्त के तहत निर्धारित एक औसत और लक्ष्य-आधारित आँकड़ा है, न कि हर परिवार से सीधी वसूली। पंचायतों को परफॉर्मेंस ग्रांट पाने के लिए अपने स्तर पर राजस्व जुटाना होगा, जिसका औसत प्रति परिवार ₹1,200 वार्षिक निकलता है।
16वें वित्त आयोग ने बिहार पंचायतों के लिए कितनी राशि की अनुशंसा की है?
16वें वित्त आयोग ने बिहार की पंचायती राज संस्थाओं के लिए अगले पाँच वर्षों में लगभग ₹51,923 करोड़ की अनुशंसा की है। इसमें से लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा RLB परफॉर्मेंस ग्रांट से जुड़ा है, जो OSR विकास की शर्त पर निर्भर है।
बिहार सरकार ने वित्त आयोग की OSR शर्त पर क्या रुख अपनाया है?
बिहार सरकार ने नई दिल्ली में पंचायती राज मंत्रालय की वर्कशॉप में यह आपत्ति दर्ज कराई है कि OSR शर्त में राज्य को रियायत दी जानी चाहिए। राज्य का तर्क है कि वह अभी अपने स्वयं के राजस्व स्रोत विकसित करने की प्रक्रिया में है।
पंचायतें आय के कौन-से वैकल्पिक स्रोत अपना सकती हैं?
मंत्री दीपक प्रकाश के अनुसार पंचायतें खाली भूमि का उपयोग, तालाब निर्माण, मत्स्य पालन, सामुदायिक संसाधनों का विकास और स्थानीय आय-सृजन कार्यक्रमों के ज़रिये राजस्व अर्जित कर सकती हैं। उद्देश्य यह है कि पंचायतें केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर न रहें।
बिहार में 100 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट का क्या महत्व है?
मुख्यमंत्री की इस घोषणा पर मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि इससे लंबित मामलों का त्वरित निपटारा होगा और आम लोगों को समय पर न्याय मिल सकेगा। उन्होंने इसे न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में जनहितकारी कदम बताया।
राष्ट्र प्रेस
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