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16वें वित्त आयोग से झारखंड पंचायतों को ₹14,231 करोड़ का अनुदान, 15वें आयोग की बकाया राशि जारी करने की मांग

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16वें वित्त आयोग से झारखंड पंचायतों को ₹14,231 करोड़ का अनुदान, 15वें आयोग की बकाया राशि जारी करने की मांग

सारांश

16वें वित्त आयोग की राष्ट्रीय कार्यशाला में झारखंड ने अपना दाँव खेला — ₹14,231 करोड़ के प्रस्तावित अनुदान के साथ पंचायतों को नई ताकत मिलने की उम्मीद है। लेकिन राज्य की असली चिंता 15वें आयोग की बकाया राशि और परफॉर्मेंस ग्रांट के कड़े मानदंड हैं, जो कमज़ोर राज्यों पर भारी पड़ सकते हैं।

मुख्य बातें

16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत झारखंड की पंचायती राज संस्थाओं को 2026-27 से 2030-31 के बीच ₹14,231 करोड़ का केंद्रीय अनुदान मिलेगा।
अनुदान में ₹11,385 करोड़ बेसिक ग्रांट और ₹2,846 करोड़ परफॉर्मेंस ग्रांट शामिल हैं।
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने 3 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में झारखंड का प्रतिनिधित्व किया।
राज्य ने केंद्र से 15वें वित्त आयोग की लंबित अनुदान राशि शीघ्र जारी करने की माँग की, ताकि चालू विकास योजनाएँ प्रभावित न हों।
झारखंड ने परफॉर्मेंस ग्रांट मानदंड तय करते समय सीमित राजस्व क्षमता वाले राज्यों के लिए उदार दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया।

झारखंड की ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों को 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच कुल ₹14,231 करोड़ का केंद्रीय अनुदान मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। यह घोषणा 3 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित 16वें वित्त आयोग की राष्ट्रीय कार्यशाला के बाद सामने आई।

अनुदान की संरचना

प्रस्तावित ₹14,231 करोड़ की राशि दो हिस्सों में विभाजित है — ₹11,385 करोड़ बेसिक ग्रांट के रूप में और ₹2,846 करोड़ परफॉर्मेंस ग्रांट के रूप में। झारखंड की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कार्यशाला में राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा कि यह राशि राज्य की पंचायती राज संस्थाओं को ठोस मजबूती प्रदान करेगी।

परफॉर्मेंस ग्रांट पर झारखंड की चिंता

मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने आयोग से आग्रह किया कि परफॉर्मेंस ग्रांट के मानदंड तय करते समय झारखंड जैसे अपेक्षाकृत कमज़ोर राज्यों की सीमित राजस्व क्षमता और वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए। उन्होंने तर्क दिया कि एकसमान मानदंड लागू करने से कमज़ोर राज्यों की पंचायतें विकास के समान अवसरों से वंचित रह सकती हैं। आयोग से उदार और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने का अनुरोध किया गया।

15वें वित्त आयोग की बकाया राशि का मुद्दा

कार्यशाला में मंत्री ने केंद्र सरकार से 15वें वित्त आयोग के तहत झारखंड की लंबित अनुदान राशि शीघ्र जारी करने की माँग भी रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बकाया राशि के अभाव में राज्य की पंचायतों में पहले से संचालित विकास योजनाएँ प्रभावित हो रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार ग्रामीण स्तर पर बुनियादी ढाँचे को गति देने की कोशिश कर रही है।

डिजिटल सशक्तिकरण और प्रशासनिक सुधार की माँग

दीपिका पांडेय सिंह ने पंचायतों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने, प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने और स्थानीय निकायों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि पंचायतों को मजबूत किए बिना ग्रामीण विकास के लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं है।

आगे की राह

16वें वित्त आयोग की सिफारिशें वर्ष 2026-27 से लागू होनी हैं। मंत्री ने विश्वास जताया कि इन सिफारिशों के प्रभावी क्रियान्वयन से झारखंड में स्थानीय स्वशासन संस्थाएँ और अधिक सक्षम होंगी। गौरतलब है कि 16वें वित्त आयोग की राष्ट्रीय कार्यशाला में देशभर के राज्यों ने अपनी प्राथमिकताएँ रखीं, और झारखंड का यह पक्ष इस संदर्भ में महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

231 करोड़ का यह प्रस्तावित अनुदान झारखंड की पंचायतों के लिए महत्त्वपूर्ण है, लेकिन असली सवाल यह है कि परफॉर्मेंस ग्रांट के एकसमान मानदंड कमज़ोर राज्यों के साथ न्याय करते हैं या नहीं। 15वें वित्त आयोग की बकाया राशि अभी तक न मिलना यह भी दर्शाता है कि केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों में ज़मीनी क्रियान्वयन अक्सर घोषणाओं से पीछे रह जाता है। झारखंड जैसे संसाधन-सीमित राज्यों के लिए डिजिटल सशक्तिकरण और प्रशासनिक क्षमता निर्माण की माँग सही दिशा में है, परंतु बिना समयबद्ध वितरण तंत्र के, ये लक्ष्य कागज़ पर ही रह सकते हैं।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

16वें वित्त आयोग से झारखंड को कितना अनुदान मिलेगा?
16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत झारखंड की पंचायती राज संस्थाओं को 2026-27 से 2030-31 के बीच कुल ₹14,231 करोड़ का केंद्रीय अनुदान मिलेगा। इसमें ₹11,385 करोड़ बेसिक ग्रांट और ₹2,846 करोड़ परफॉर्मेंस ग्रांट के रूप में हैं।
झारखंड ने 15वें वित्त आयोग की बकाया राशि की माँग क्यों की?
15वें वित्त आयोग के तहत झारखंड की पंचायतों को मिलने वाली अनुदान राशि अभी तक लंबित है, जिससे राज्य में पहले से चल रही विकास योजनाएँ प्रभावित हो रही हैं। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने केंद्र से इस बकाया राशि का शीघ्र भुगतान करने का आग्रह किया।
परफॉर्मेंस ग्रांट पर झारखंड की क्या आपत्ति है?
झारखंड का मानना है कि परफॉर्मेंस ग्रांट के मानदंड तय करते समय सीमित राजस्व क्षमता वाले राज्यों की वास्तविक परिस्थितियों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। एकसमान मानदंड लागू करने से कमज़ोर राज्यों की पंचायतें विकास के समान अवसरों से वंचित रह सकती हैं।
16वें वित्त आयोग की राष्ट्रीय कार्यशाला कब और कहाँ हुई?
यह कार्यशाला 3 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित की गई। इसमें झारखंड का प्रतिनिधित्व ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने किया।
झारखंड की पंचायतों के डिजिटल सशक्तिकरण के लिए क्या माँग की गई?
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने पंचायतों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने, प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत करने और स्थानीय निकायों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पंचायतों को मजबूत किए बिना ग्रामीण विकास के लक्ष्य हासिल नहीं किए जा सकते।
राष्ट्र प्रेस
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