शेख हसीना की वापसी के ऐलान से डरी तारिक रहमान सरकार : पूर्व उच्चायुक्त वीणा सिकरी
सारांश
मुख्य बातें
भारत की पूर्व उच्चायुक्त (बांग्लादेश) वीणा सिकरी ने 18 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में कहा कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के दिसंबर 2026 तक स्वदेश लौटने के ऐलान से भयभीत है। उनके अनुसार, अवामी लीग की बढ़ती लोकप्रियता ही वह असली कारण है जिसकी वजह से ढाका भारत से दूरी बनाए हुए है और फरवरी 2026 में दिए गए भारत के आधिकारिक न्योते का अब तक कोई जवाब नहीं दिया गया है।
भारत के न्योते पर छह महीने की चुप्पी
वीणा सिकरी ने स्पष्ट किया कि फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद तारिक रहमान को भारत यात्रा का पहला आधिकारिक न्योता दिया गया था। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि भारत सरकार की तरफ से पीएम तारिक रहमान को प्रधानमंत्री बनने के बाद मिला पहला न्योता था, और हम छह महीने से जवाब का इंतजार कर रहे हैं।' इसके बाद बिम्सटेक के चेयरमैन के रूप में उन्हें ब्रिक्स समिट के लिए दूसरा न्योता भी दिया गया, लेकिन वह भी अनुत्तरित रहा।
पूर्व राजनयिक के अनुसार, पहले यह संभावना जताई जा रही थी कि रहमान 20-22 अगस्त के बीच भारत आ सकते हैं, परंतु 5 अगस्त को शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद इस यात्रा को लेकर अनिश्चितता और गहरी हो गई।
प्रत्यर्पण मुद्दे पर वीणा सिकरी का रुख
वीणा सिकरी ने कहा कि रहमान सरकार शेख हसीना के प्रत्यर्पण के मुद्दे को भारत न आने के बहाने के रूप में इस्तेमाल कर रही है, जबकि 'प्रत्यर्पण एक कानूनी मामला है, जिसमें लंबा वक्त लगता है।' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब तारिक रहमान लंदन में निर्वासन में थे, तब शेख हसीना की सरकार ने उन पर कभी कोई प्रतिबंध नहीं लगाया था, भले ही वे वीडियो के माध्यम से सरकार-विरोधी रैलियों को संबोधित करते रहे। सिकरी के अनुसार, रहमान ने स्वयं कभी कहा था कि वे किसी भी पार्टी पर प्रतिबंध का समर्थन नहीं करते, लेकिन सत्ता में आते ही उनका रुख बदल गया।
सैन्य विशेषज्ञ की राय : प्रत्यर्पण संभव नहीं
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) ध्रुव कटोच ने इस विषय पर कहा कि शेख हसीना का प्रत्यर्पण 'किसी भी हालत में नहीं होगा।' उन्होंने स्पष्ट किया, 'शेख हसीना ने यहां शरण ली है और जब तक वह चाहेंगी, वह यहीं रहेंगी।' कटोच ने यह भी कहा कि अगर बांग्लादेश चीन और पाकिस्तान के साथ संबंध मजबूत करना चाहता है, तो यह उसका अपना निर्णय है, लेकिन उसे भारत के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देना चाहिए और सीमा सुरक्षा हर हाल में अनिवार्य है।
बांग्लादेशी उच्चायुक्त का पक्ष
भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त एम. रियाज हमीदुल्लाह ने द्विपक्षीय संबंधों पर कहा कि दोनों देशों के बीच 'बहुत सारी समस्याएँ हैं, लेकिन हर चुनौती मिलकर काम करने का एक मौका है।' उन्होंने 26 फरवरी को प्रधानमंत्री तारिक रहमान द्वारा भारत सरकार को लिखे गए पत्र का हवाला देते हुए कहा कि उसमें इस्तेमाल की गई भाषा — जैसे 'आम लोगों की उम्मीदें' और 'कोऑपरेटिव एंगेजमेंट' — सहयोग की इच्छा को दर्शाती है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्था लगभग 95-99 प्रतिशत निजी क्षेत्र पर निर्भर है, इसलिए जन-स्तरीय जुड़ाव अब और भी ज़रूरी हो गया है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-बांग्लादेश संबंध कई मोर्चों पर तनावपूर्ण हैं। शेख हसीना की संभावित वापसी, अवामी लीग की बढ़ती सक्रियता और रहमान सरकार की भारत के प्रति सतर्क नीति — ये तीनों कारक मिलकर आने वाले महीनों में द्विपक्षीय संबंधों की दिशा तय करेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, दिसंबर 2026 तक की स्थिति निर्णायक साबित हो सकती है।