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तारिक रहमान के भारत दौरे की 50% से अधिक संभावना: JNU प्रोफेसर, शेख हसीना मुद्दे पर संयम की सलाह

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तारिक रहमान के भारत दौरे की 50% से अधिक संभावना: JNU प्रोफेसर, शेख हसीना मुद्दे पर संयम की सलाह

सारांश

JNU के प्रोफेसर डॉ. स्वर्ण सिंह का आकलन है कि बांग्लादेश PM तारिक रहमान के 20-21 तारीख को भारत आने और PM मोदी से सीधी बातचीत की 50% से अधिक संभावना है — बशर्ते शेख हसीना के प्रत्यार्पण मुद्दे पर भारत संयम बरते। दोनों देशों के लिए सहयोग अपरिहार्य है, क्योंकि बांग्लादेश की पूरी जमीनी सीमा भारत से लगती है।

मुख्य बातें

स्वर्ण सिंह के अनुसार बांग्लादेश PM तारिक रहमान के 20-21 तारीख को भारत आने की 50% से अधिक संभावना है।
तारिक रहमान को भारत की ओर से दो बार निमंत्रण भेजा जा चुका है — एक द्विपक्षीय वार्ता के लिए, दूसरा बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के लिए।
शेख हसीना के प्रत्यार्पण की माँग तक भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे भारत में रहते हुए बांग्लादेश में अस्थिरता न फैलाएँ।
गंगा नदी संधि (1996) के 29 वर्ष इस वर्ष पूरे हो रहे हैं; तीस्ता नदी पर अभी तक सहमति नहीं बनी।
शेख हसीना ने संकेत दिया है कि वे दिसंबर तक बांग्लादेश वापस जाना चाहती हैं, जिसे डॉ.
सिंह ने सकारात्मक संकेत बताया।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के प्रोफेसर डॉ. स्वर्ण सिंह ने 17 अगस्त 2026 को कहा कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत दौरे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधी द्विपक्षीय वार्ता की 50 फीसदी से अधिक संभावना है। उनके अनुसार, दोनों देशों के पास आपसी तालमेल सुधारने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, लेकिन इसके लिए शेख हसीना के प्रत्यार्पण मुद्दे पर भारत को संयम बरतना होगा।

मुख्य घटनाक्रम

प्रोफेसर डॉ. स्वर्ण सिंह ने भारत-बांग्लादेश संबंधों पर टिप्पणी करते हुए कहा, 'जब भी चुनाव होकर नए राष्ट्राध्यक्ष चुने जाते हैं तो ऐसी अपेक्षा होती है कि वो पहली विदेश यात्रा भारत की करेंगे — बांग्लादेश का इतिहास भी यही रहा है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि 2024 के बाद से माहौल बदला, जब भारत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अपने यहाँ शरण दी, जिससे बांग्लादेश में नाराजगी उत्पन्न हुई।

प्रोफेसर सिंह के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) ने इस मुद्दे को खूब उछाला। बाद में NCP की सरकार बनने और तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद उम्मीद जगी कि एक निर्वाचित सरकार के आने से संबंध बेहतर हो सकते हैं।

निमंत्रण और राजनयिक प्रयास

डॉ. सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान को भारत की ओर से दो बार निमंत्रण भेजा जा चुका है — एक बार द्विपक्षीय वार्ता के लिए और दूसरी बार बिम्सटेक के अध्यक्ष के रूप में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भागीदारी के लिए। उन्होंने यह भी कहा कि तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में भारत ने अपना प्रतिनिधि भेजा था और बाद में उच्चायुक्त भी ढाका पहुँचे थे।

प्रोफेसर सिंह के अनुसार, '20-21 तारीख को पीएम तारिक रहमान के भारत आने और पीएम मोदी से सीधी बातचीत की 50 फीसदी से ज्यादा उम्मीद की जा सकती है।' हालाँकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि शेख हसीना के प्रत्यार्पण की माँग जब तक लंबित है, तब तक यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वे भारत में रहते हुए कोई ऐसी गतिविधि न करें जिससे बांग्लादेश में अस्थिरता का माहौल बने।

भारत-बांग्लादेश संबंधों की पृष्ठभूमि

डॉ. सिंह ने याद दिलाया कि शेख हसीना के 15 वर्षों के कार्यकाल में भारत-बांग्लादेश संबंध अत्यंत मजबूत रहे थे। उन्होंने कहा, 'पीएम मोदी के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध बहुत अच्छे थे। एक समय था जब हम बांग्लादेश को पूरे दक्षिण एशिया का विकास का मॉडल कहने लगे थे।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बांग्लादेश की 100 फीसदी जमीनी सीमा भारत के साथ लगती है, इसलिए दोनों देशों के लिए सहयोग अपरिहार्य है।

गौरतलब है कि डॉ. मुहम्मद यूनुस के अंतरिम सरकार में मुख्य सलाहकार रहने के दो वर्षों के दौरान, उनके पाकिस्तान और चीन के साथ बढ़ते संबंधों ने भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव उत्पन्न किया। प्रोफेसर सिंह के अनुसार, 'उन दो सालों में जमीनी स्तर पर जिस तरह का माहौल बनाया गया, उसको सुधारने में थोड़ा समय लगेगा।'

तीस्ता और गंगा नदी समझौते पर चर्चा की दरकार

डॉ. सिंह ने कहा कि तीस्ता नदी जल-बँटवारे पर अब तक दोनों देशों के बीच कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है। साथ ही, गंगा नदी पर 1996 में हुई 30 वर्षीय संधि के 29 वर्ष इस वर्ष पूरे हो रहे हैं, इसलिए इस पर भी नई बातचीत शुरू होनी चाहिए।

आगे क्या

प्रोफेसर सिंह ने एक सकारात्मक संकेत की ओर ध्यान दिलाया — शेख हसीना ने हाल की बातचीत में स्पष्ट किया है कि वे दिसंबर तक बांग्लादेश वापस जाने की इच्छा रखती हैं। डॉ. सिंह के अनुसार, 'भारत भी परोक्ष रूप से कोशिश कर रहा है कि यदि ऐसे रास्ते खुलते हैं कि वो वापस जा सकती हैं, तो जाएं — उससे भी तालमेल बनाने में सहायता हो सकती है।' यदि तारिक रहमान भारत आते हैं, तो दोनों देशों के संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर इसमें कई परतें हैं। तारिक रहमान की BNP सरकार पर चीन-झुकाव का ऐतिहासिक दबाव है और घरेलू राजनीति में शेख हसीना-विरोधी भावना अभी भी तीव्र है — ऐसे में भारत दौरा उनके लिए आंतरिक राजनीतिक जोखिम भी उठाता है। यूनुस-काल में जो कूटनीतिक क्षति हुई, उसकी भरपाई एक यात्रा से नहीं होगी। तीस्ता गतिरोध और हसीना प्रत्यार्पण जैसे संरचनात्मक मुद्दे बिना ठोस एजेंडे के किसी भी शिखर वार्ता को प्रतीकात्मक बना देंगे।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश PM तारिक रहमान का भारत दौरा कब होने की संभावना है?
JNU प्रोफेसर डॉ. स्वर्ण सिंह के अनुसार 20-21 तारीख को तारिक रहमान के भारत आने और PM मोदी से सीधी वार्ता की 50 फीसदी से अधिक संभावना है। हालाँकि, यह शेख हसीना मुद्दे पर भारत के रुख पर भी निर्भर करता है।
शेख हसीना का प्रत्यार्पण मुद्दा भारत-बांग्लादेश संबंधों को कैसे प्रभावित कर रहा है?
बांग्लादेश सरकार की माँग है कि शेख हसीना का प्रत्यार्पण हो। डॉ. स्वर्ण सिंह के अनुसार, जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे भारत में रहते हुए कोई ऐसा कदम न उठाएँ जिससे बांग्लादेश में आक्रोश या अस्थिरता पैदा हो।
भारत ने तारिक रहमान को कितनी बार निमंत्रण दिया है?
डॉ. स्वर्ण सिंह के अनुसार भारत की ओर से तारिक रहमान को दो बार निमंत्रण भेजा जा चुका है — एक बार द्विपक्षीय वार्ता के लिए और दूसरी बार बिम्सटेक के अध्यक्ष के रूप में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए।
डॉ. मुहम्मद यूनुस के कार्यकाल में भारत-बांग्लादेश संबंध क्यों बिगड़े?
डॉ. स्वर्ण सिंह के अनुसार, अंतरिम सरकार में मुख्य सलाहकार रहे डॉ. यूनुस का काम कानून-व्यवस्था बनाकर चुनाव कराना था, लेकिन उन्होंने पाकिस्तान से संबंध बढ़ाए, चीन के साथ दोस्ती गहरी की और बांग्लादेश के इतिहास को बदलने की कोशिश की। इस कारण दो वर्षों में भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव आया।
तीस्ता और गंगा नदी विवाद भारत-बांग्लादेश वार्ता में क्यों अहम हैं?
तीस्ता नदी जल-बँटवारे पर अभी तक दोनों देशों के बीच कोई सहमति नहीं बनी है। वहीं, गंगा नदी पर 1996 में हुई 30 वर्षीय संधि के 29 वर्ष इस वर्ष पूरे हो रहे हैं, इसलिए डॉ. स्वर्ण सिंह के अनुसार इस पर भी नई बातचीत शुरू होनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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