तारिक रहमान के भारत दौरे की 50% से अधिक संभावना: JNU प्रोफेसर, शेख हसीना मुद्दे पर संयम की सलाह
सारांश
मुख्य बातें
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के प्रोफेसर डॉ. स्वर्ण सिंह ने 17 अगस्त 2026 को कहा कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत दौरे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधी द्विपक्षीय वार्ता की 50 फीसदी से अधिक संभावना है। उनके अनुसार, दोनों देशों के पास आपसी तालमेल सुधारने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, लेकिन इसके लिए शेख हसीना के प्रत्यार्पण मुद्दे पर भारत को संयम बरतना होगा।
मुख्य घटनाक्रम
प्रोफेसर डॉ. स्वर्ण सिंह ने भारत-बांग्लादेश संबंधों पर टिप्पणी करते हुए कहा, 'जब भी चुनाव होकर नए राष्ट्राध्यक्ष चुने जाते हैं तो ऐसी अपेक्षा होती है कि वो पहली विदेश यात्रा भारत की करेंगे — बांग्लादेश का इतिहास भी यही रहा है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि 2024 के बाद से माहौल बदला, जब भारत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अपने यहाँ शरण दी, जिससे बांग्लादेश में नाराजगी उत्पन्न हुई।
प्रोफेसर सिंह के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) ने इस मुद्दे को खूब उछाला। बाद में NCP की सरकार बनने और तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद उम्मीद जगी कि एक निर्वाचित सरकार के आने से संबंध बेहतर हो सकते हैं।
निमंत्रण और राजनयिक प्रयास
डॉ. सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान को भारत की ओर से दो बार निमंत्रण भेजा जा चुका है — एक बार द्विपक्षीय वार्ता के लिए और दूसरी बार बिम्सटेक के अध्यक्ष के रूप में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भागीदारी के लिए। उन्होंने यह भी कहा कि तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में भारत ने अपना प्रतिनिधि भेजा था और बाद में उच्चायुक्त भी ढाका पहुँचे थे।
प्रोफेसर सिंह के अनुसार, '20-21 तारीख को पीएम तारिक रहमान के भारत आने और पीएम मोदी से सीधी बातचीत की 50 फीसदी से ज्यादा उम्मीद की जा सकती है।' हालाँकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि शेख हसीना के प्रत्यार्पण की माँग जब तक लंबित है, तब तक यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वे भारत में रहते हुए कोई ऐसी गतिविधि न करें जिससे बांग्लादेश में अस्थिरता का माहौल बने।
भारत-बांग्लादेश संबंधों की पृष्ठभूमि
डॉ. सिंह ने याद दिलाया कि शेख हसीना के 15 वर्षों के कार्यकाल में भारत-बांग्लादेश संबंध अत्यंत मजबूत रहे थे। उन्होंने कहा, 'पीएम मोदी के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध बहुत अच्छे थे। एक समय था जब हम बांग्लादेश को पूरे दक्षिण एशिया का विकास का मॉडल कहने लगे थे।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बांग्लादेश की 100 फीसदी जमीनी सीमा भारत के साथ लगती है, इसलिए दोनों देशों के लिए सहयोग अपरिहार्य है।
गौरतलब है कि डॉ. मुहम्मद यूनुस के अंतरिम सरकार में मुख्य सलाहकार रहने के दो वर्षों के दौरान, उनके पाकिस्तान और चीन के साथ बढ़ते संबंधों ने भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव उत्पन्न किया। प्रोफेसर सिंह के अनुसार, 'उन दो सालों में जमीनी स्तर पर जिस तरह का माहौल बनाया गया, उसको सुधारने में थोड़ा समय लगेगा।'
तीस्ता और गंगा नदी समझौते पर चर्चा की दरकार
डॉ. सिंह ने कहा कि तीस्ता नदी जल-बँटवारे पर अब तक दोनों देशों के बीच कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है। साथ ही, गंगा नदी पर 1996 में हुई 30 वर्षीय संधि के 29 वर्ष इस वर्ष पूरे हो रहे हैं, इसलिए इस पर भी नई बातचीत शुरू होनी चाहिए।
आगे क्या
प्रोफेसर सिंह ने एक सकारात्मक संकेत की ओर ध्यान दिलाया — शेख हसीना ने हाल की बातचीत में स्पष्ट किया है कि वे दिसंबर तक बांग्लादेश वापस जाने की इच्छा रखती हैं। डॉ. सिंह के अनुसार, 'भारत भी परोक्ष रूप से कोशिश कर रहा है कि यदि ऐसे रास्ते खुलते हैं कि वो वापस जा सकती हैं, तो जाएं — उससे भी तालमेल बनाने में सहायता हो सकती है।' यदि तारिक रहमान भारत आते हैं, तो दोनों देशों के संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है।