20 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या तारिक रहमान की वापसी बांग्लादेश में बदलाव का संकेत है? - शेख हसीना

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या तारिक रहमान की वापसी बांग्लादेश में बदलाव का संकेत है? - शेख हसीना

सारांश

तारिक रहमान की 17 साल बाद बांग्लादेश में वापसी को लेकर शेख हसीना ने कहा है कि यह कोई नया बदलाव नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक ध्रुवीकरण को और बढ़ा सकता है। जानिए इस महत्वपूर्ण बातचीत में उन्होंने क्या कहा।

मुख्य बातें

तारिक रहमान की वापसी से राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ सकता है।
शेख हसीना ने इसे नया बदलाव नहीं माना।
बांग्लादेश में हिंसा की स्थिति गंभीर है।
तारिक रहमान के भ्रष्टाचार के आरोप हैं।
बांग्लादेश के चुनावों पर सभी की नजर है।

नई दिल्ली, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता और कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान ने 17 साल बाद अपने देश में वापसी की है। इसे लेकर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने राष्ट्र प्रेस से खास बातचीत में कहा कि सालों बाद तारिक की वापसी बांग्लादेश की राजनीति में कोई नई शुरुआत या सुधार नहीं है, बल्कि इससे राजनीतिक ध्रुवीकरण और बढ़ सकता है।

शेख हसीना ने कहा, “तारिक रहमान की वापसी कोई नया बदलाव या सुधार नहीं है; यह उस राजनीति की वापसी है जिसकी बांग्लादेश पहले ही भारी कीमत चुका चुका है।”

बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति शेख मुजीबुर रहमान की बेटी हसीना ने कहा, “उन्होंने सालों तक अपना जीवन देश निकाला में आराम से बिताया है, जो आम बांग्लादेशियों की रोजमर्रा की असलियत से बहुत दूर है, और यह सब भ्रष्टाचार व सत्ता के दुरुपयोग की जवाबदेही से बचने के बाद हुआ।”

बता दें, बांग्लादेश के सातवें राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया के 58 साल के बेटे को तारिक जिया के नाम से भी जाना जाता है। हसीना की सरकार ने उन पर खालिदा शासन के दौरान एक समानांतर पावर सेंटर चलाने और भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया था।

हालांकि, इस वक्त देश में जिस तरह के हालात हैं, हिंसा चरम सीमा पर है और कट्टरपंथी समूहों के अंदर से कानून का भय खत्म हो चुका है, ऐसे में सबकी नजर तारिक रहमान पर टिकी हुई है। इसका एक कारण चुनाव से बीएनपी की अनुपस्थिति भी है।

17 साल के देश निकाला के दौरान तारिक ब्रिटेन में रहे। वहीं अब जब उनकी वापसी हुई है, तो भारत-बांग्लादेश संबंधों के भविष्य पर बहस फिर से शुरू हो गई है। ऐसे में नई दिल्ली से लेकर अन्य देशों तक बांग्लादेश के चुनाव पर सबकी नजर है।

खालिदा जिया के शासन में भारत और बांग्लादेश के बीच तनावपूर्ण संबंध रहे हैं, लेकिन तारिक खुद को बांग्लादेश की संप्रभुता के डिफेंडर के रूप में दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।

हालांकि, शेख हसीना ने राष्ट्र प्रेस को बताया कि देश के नवीकरण या सुधार की तरफ बढ़ने के बजाय, तारिक की मौजूदगी बांग्लादेश में राजनीतिक ध्रुवीकरण की खाई को और चौड़ा कर सकती है।

शेख हसीना के मुताबिक, “उनकी मौजूदगी से राजनीतिक ध्रुवीकरण ठीक होने के बजाय और गहरा होने की संभावना है। नेतृत्व के लिए जवाबदेही, पारदर्शिता और लोगों से जुड़ाव की जरूरत होती है, न कि विदेश से डायरेक्शन और फिर हालात अच्छे लगने पर अचानक वापस आने की।”

सर्वे के हवाले से सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, तारिक रहमान, जिन्हें अक्सर डार्क प्रिंस कहा जाता है, बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री बनने की रेस में दूसरे नेताओं से आगे निकल गए हैं।

हसीना ने राष्ट्र प्रेस को बताया, “पिछले कुछ महीनों में, हमने बीएनपी कार्यकर्ताओं द्वारा डराने-धमकाने और दबाव बनाने की एक बहुत परेशान करने वाली लहर देखी है, जो अवामी लीग के समर्थकों समेत आम बांग्लादेशियों को हिंसा या तबाही की धमकी देकर अपनी पार्टी को वोट देने के लिए मजबूर कर रहे हैं।”

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, “बांग्लादेश का भविष्य उन लोगों के दम पर नहीं बनाया जा सकता जिनकी राजनीतिक विरासत भ्रष्टाचार, हिंसा और कट्टरपंथी ताकतों के साथ गठबंधन से तय होती है।”

संपादकीय दृष्टिकोण

हम मानते हैं कि बांग्लादेश की राजनीति में तारिक रहमान की वापसी से स्थिति और भी जटिल हो सकती है। यहां जरूरी है कि नेतृत्व जवाबदेह और पारदर्शी हो, ताकि बांग्लादेश के लोग एक स्थायी और सकारात्मक बदलाव देख सकें।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तारिक रहमान की वापसी का राजनीतिक प्रभाव क्या होगा?
तारिक रहमान की वापसी से बांग्लादेश में राजनीतिक ध्रुवीकरण और बढ़ सकता है, जैसा कि शेख हसीना ने बताया।
शेख हसीना ने तारिक रहमान के बारे में क्या कहा?
हसीना ने कहा कि यह वापसी कोई नया बदलाव नहीं है, बल्कि पुराने विवादों की वापसी है।
तारिक रहमान कौन हैं?
तारिक रहमान बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता हैं और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के बेटे हैं।
क्या बांग्लादेश में चुनावों पर असर पड़ेगा?
हां, तारिक की वापसी से बांग्लादेश के चुनावों पर प्रभाव पड़ सकता है, खासकर बीएनपी की अनुपस्थिति के कारण।
बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिति कैसी है?
इस समय बांग्लादेश में हिंसा चरम पर है और राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 6 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले