26 जुलाई 2026
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झारखंड हाईकोर्ट ने बायो-मेडिकल कचरा प्रबंधन के लिए 19 बिंदुओं में दिए निर्देश, 14 साल पुरानी पीआईएल का निपटारा

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झारखंड हाईकोर्ट ने बायो-मेडिकल कचरा प्रबंधन के लिए 19 बिंदुओं में दिए निर्देश, 14 साल पुरानी पीआईएल का निपटारा

सारांश

झारखंड हाईकोर्ट ने बायो-मेडिकल कचरा प्रबंधन को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। यह निर्देश 2012 से चल रही जनहित याचिका के निपटारे के साथ आए हैं, जिससे राज्य में नियमों का पालन और भी सख्त होगा।

मुख्य बातें

19 बिंदुओं में दिए गए निर्देश नोडल अधिकारी की नियुक्ति की आवश्यकता कचरे की ट्रैकिंग के लिए बारकोड सिस्टम जेएसपीसीबी को नियमित निरीक्षण का निर्देश 30 से अधिक बेड वाले अस्पतालों में कचरा प्रबंधन कमेटी का गठन अनिवार्य

रांची, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल, 2016 के सख्त अनुपालन को लेकर गुरुवार को 19 बिंदुओं में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। यह निर्देश वर्ष 2012 से चल रही जनहित याचिका के निपटारे के साथ आए हैं।

अदालत ने बताया कि अब राज्य में नियमों के पालन की व्यवस्था पहले से कहीं अधिक मजबूत हो चुकी है। इसके बाद, निर्धारित ज़िम्मेदारियों का निर्वहन संबंधित अधिकारियों द्वारा किया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की पीठ ने राज्य सरकार से 30 दिनों के भीतर एक सचिव स्तर के नोडल अधिकारी की नियुक्ति करने का आदेश दिया। यह नोडल अधिकारी सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करके बायो-मेडिकल कचरे के प्रबंधन की निगरानी करेंगे।

झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जेएसपीसीबी) को निर्देश दिया गया है कि वह प्रत्येक जिले के अस्पतालों और अधिकृत कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट की सूची को अपडेट रखे। इसके अलावा, कचरे की उत्पत्ति से लेकर उसके अंतिम निस्तारण तक बारकोड और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम की नियुक्ति की जाएगी।

हाईकोर्ट ने जेएसपीसीबी को नियमित और आकस्मिक निरीक्षण करने का निर्देश दिया। नियमों के उल्लंघन पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। सभी जिलों के उपायुक्तों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि अस्पतालों का कचरा नगर निगम के सामान्य कचरे में न मिल सके। 30 से अधिक बेड वाले अस्पतालों में बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट कमेटी का गठन अनिवार्य किया गया है। छोटे अस्पतालों को एक जिम्मेदार अधिकारी नियुक्त करना होगा, जिनका संपर्क विवरण सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित रखा जाएगा।

यह जनहित याचिका 2012 में रांची, धनबाद और जमशेदपुर में संक्रमित मेडिकल कचरे को खुले में फेंकने के आरोपों के बाद दायर की गई थी।

अदालत ने कहा कि पिछले वर्षों में निगरानी के कारण राज्य में ढांचागत सुधार हुए हैं और अब कई ट्रीटमेंट प्लांट सक्रिय हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 से संबंधित है। हालांकि अब लगातार न्यायिक निगरानी की आवश्यकता नहीं है, लेकिन भविष्य में किसी भी उल्लंघन पर संबंधित पक्ष कानूनी कदम उठा सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बायो-मेडिकल कचरा प्रबंधन के लिए हाईकोर्ट ने क्या निर्देश दिए हैं?
हाईकोर्ट ने 19 बिंदुओं में बायो-मेडिकल कचरा प्रबंधन के सख्त अनुपालन के निर्देश दिए हैं, जिसमें नोडल अधिकारी की नियुक्ति और नियमित निरीक्षण शामिल हैं।
यह जनहित याचिका कब दायर की गई थी?
यह जनहित याचिका 2012 में रांची, धनबाद और जमशेदपुर में संक्रमित मेडिकल कचरे को खुले में फेंकने के आरोपों के बाद दायर की गई थी।
राष्ट्र प्रेस
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