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शेख हसीना मुद्दे पर भारत-बांग्लादेश संबंध न उलझें: विशेषज्ञ वाइल अव्वाद की सलाह

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शेख हसीना मुद्दे पर भारत-बांग्लादेश संबंध न उलझें: विशेषज्ञ वाइल अव्वाद की सलाह

सारांश

बांग्लादेश ने तारिक रहमान की दिल्ली यात्रा को शेख हसीना की वापसी से जोड़ दिया है। विशेषज्ञ वाइल अव्वाद की राय है कि एक मुद्दे पर दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों को दाँव पर नहीं लगाना चाहिए — क्योंकि भारत और बांग्लादेश दोनों को एक-दूसरे की ज़रूरत है।

मुख्य बातें

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा — प्रधानमंत्री तारिक रहमान तभी भारत आएंगे जब शेख हसीना को वापस भेजा जाए।
विशेषज्ञ वाइल अव्वाद ने चेताया कि शेख हसीना के मुद्दे पर भारत-बांग्लादेश संबंधों को बंधक नहीं बनाना चाहिए।
5 अगस्त को नई दिल्ली में शेख हसीना की प्रेस वार्ता ने रहमान की यात्रा को और प्रभावित किया।
पिछले 15 वर्षों तक हसीना सरकार के दौरान दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंध रहे; सरकार बदलने के 2 वर्ष बाद ढाका नई शर्तें तय कर रहा है।
अव्वाद के अनुसार, 1971 की आज़ादी में भारत की भूमिका और रणनीतिक परस्परनिर्भरता को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

विदेश मामलों के विशेषज्ञ वाइल अव्वाद ने 16 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि भारत और बांग्लादेश को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण के मुद्दे पर अपने द्विपक्षीय संबंधों को बंधक नहीं बनाना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की नई दिल्ली यात्रा के लिए भारत सरकार के निमंत्रण पर शर्त रख दी है।

बांग्लादेश की शर्त और तनाव की पृष्ठभूमि

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एकेएम शाहिदुल करीम ने कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान भारत की यात्रा तभी करेंगे, जब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को बांग्लादेश वापस भेजा जाए। करीम ने यह भी कहा, 'हमारा मानना है कि इस उच्च स्तरीय दौरे के लिए एक अनुकूल माहौल बनाया जाना आवश्यक है।' गौरतलब है कि 5 अगस्त को नई दिल्ली में शेख हसीना की एक प्रेस वार्ता ने भी रहमान की प्रस्तावित यात्रा को प्रभावित किया। दोनों देशों के अधिकारी पिछले कुछ हफ्तों से इस यात्रा को लेकर संपर्क में थे।

विशेषज्ञ की राय: द्विपक्षीय हित सर्वोपरि

विशेषज्ञ वाइल अव्वाद ने कहा, 'मेरा मानना है कि शेख हसीना के मुद्दे पर भारत और बांग्लादेश के संबंधों को बंधक नहीं बनाना चाहिए। शेख हसीना लंबे समय से भारत में हैं और निर्वासन में रह रही हैं, इसलिए इन मुद्दों पर आपसी संबंधों को उलझाना उचित नहीं होगा।' उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे की आवश्यकता है और एक मुद्दे पर टकराव के बजाय कई महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद होना चाहिए।

बदलते संबंधों का संदर्भ

अव्वाद ने स्वीकार किया कि भारत-बांग्लादेश संबंधों में निश्चित रूप से बदलाव आया है, विशेषकर बांग्लादेश की ओर से। उन्होंने कहा कि ढाका की नई सरकार 'बांग्लादेश फर्स्ट' की नीति के तहत द्विपक्षीय संबंधों की शर्तें बदलने की कोशिश कर रही है। यह ऐसे समय में है जब पिछले 15 वर्षों तक शेख हसीना के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध रहे थे। सरकार बदलने के दो वर्ष बाद बांग्लादेश की नई सरकार इस रिश्ते में कई बदलाव चाहती है।

भारत की रणनीतिक अहमियत

अव्वाद ने रेखांकित किया कि बांग्लादेश की रणनीतिक स्वायत्तता के लिए भारत का सहयोग अनिवार्य रहेगा। उनके अनुसार, 'भारत व्यवसाय, विस्तार, अंतरराष्ट्रीय पहचान और यहाँ तक कि बांग्लादेश की संप्रभुता का प्रवेशद्वार है।' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भारत ने 1971 में बांग्लादेश की आज़ादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और इस ऐतिहासिक रिश्ते का सम्मान दोनों पक्षों की ज़िम्मेदारी है। विशेषज्ञ का मानना है कि बांग्लादेश वास्तव में भारत के साथ संबंधों को नकारात्मक दिशा में नहीं ले जाएगा।

आगे की राह

विश्लेषकों के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापार, जल-बँटवारे, सीमा प्रबंधन और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दे लंबित हैं, जो एकमात्र प्रत्यर्पण विवाद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। आने वाले हफ्तों में दोनों पक्षों के बीच राजनयिक संपर्क जारी रहने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह दोधारी तलवार है। ढाका जितना इस एकल मुद्दे पर अड़ेगा, उतना ही वह उन व्यापक हितों को जोखिम में डालेगा जो व्यापार, पानी, और सीमा सुरक्षा से जुड़े हैं। दूसरी ओर, नई दिल्ली के लिए भी यह संकेत है कि 'हसीना-केंद्रित' बांग्लादेश नीति की सीमाएँ अब स्पष्ट हो चुकी हैं। असली प्रश्न यह है कि क्या दोनों पक्ष एक व्यक्ति के भाग्य को पूरे उपमहाद्वीपीय सहयोग से ऊपर रखने की राजनीतिक कीमत चुकाने को तैयार हैं।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश ने तारिक रहमान की भारत यात्रा पर क्या शर्त रखी है?
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान भारत की यात्रा तभी करेंगे जब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को बांग्लादेश वापस भेजा जाए। प्रवक्ता एकेएम शाहिदुल करीम ने कहा कि उच्च स्तरीय दौरे के लिए अनुकूल माहौल बनाना ज़रूरी है।
विशेषज्ञ वाइल अव्वाद ने भारत-बांग्लादेश संबंधों पर क्या कहा?
वाइल अव्वाद ने कहा कि दोनों देशों को शेख हसीना के मुद्दे पर अपने संबंधों को बंधक नहीं बनाना चाहिए। उनके अनुसार, भारत और बांग्लादेश दोनों को एक-दूसरे की ज़रूरत है और एक मुद्दे पर टकराव के बजाय कई महत्वपूर्ण विषयों पर बातचीत होनी चाहिए।
शेख हसीना इस समय कहाँ हैं और वे भारत में क्यों हैं?
शेख हसीना लंबे समय से भारत में निर्वासन में रह रही हैं। 5 अगस्त को नई दिल्ली में उनकी एक प्रेस वार्ता ने तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा को और जटिल बना दिया।
बांग्लादेश की 'बांग्लादेश फर्स्ट' नीति का भारत पर क्या असर है?
सरकार बदलने के दो वर्ष बाद बांग्लादेश की नई सरकार 'बांग्लादेश फर्स्ट' नीति के तहत द्विपक्षीय संबंधों की शर्तें बदलना चाहती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव व्यापार, सीमा प्रबंधन और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को प्रभावित कर सकता है।
भारत और बांग्लादेश के बीच ऐतिहासिक संबंध कैसे रहे हैं?
1971 में बांग्लादेश की आज़ादी में भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पिछले 15 वर्षों तक शेख हसीना के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच घनिष्ठ और सौहार्दपूर्ण संबंध रहे, जो अब नई सरकार के आने के बाद बदलाव के दौर से गुज़र रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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