शेख हसीना दिसंबर में खुद लौटना चाहती हैं, फिर भी रहमान सरकार भारत से प्रत्यर्पण की माँग कर रही है: पूर्व उच्चायुक्त वीणा सिकरी
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने स्वयं कहा है कि वे दिसंबर 2026 में स्वदेश लौटना चाहती हैं — फिर भी तारिक रहमान सरकार भारत पर उनके औपचारिक प्रत्यर्पण का दबाव बना रही है। बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीणा सिकरी ने 18 अगस्त को यह बात कही, जब बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक अस्पष्ट प्रेस नोट ने नई दिल्ली और ढाका के बीच कूटनीतिक तनाव को और गहरा कर दिया।
विवादास्पद प्रेस नोट और रहमान के दौरे की अनिश्चितता
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत दौरे को लेकर लंबे समय से अटकलें चल रही थीं। भारत की ओर से दो बार आधिकारिक आमंत्रण भेजे गए, लेकिन रहमान ने पहले चीन और फिर मलेशिया की यात्रा की। इसके बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस नोट जारी किया, जिसमें रहमान के भारत दौरे का कोई उल्लेख नहीं था।
सिकरी ने इस प्रेस नोट को 'अस्पष्ट' बताते हुए कहा, "बांग्लादेश की तरफ से एक अस्पष्ट प्रेस रिलीज जारी किया गया, जिसमें रहमान के भारत दौरे की कोई पुष्टि नहीं की गई। ऐसा माना जा रहा है कि यह प्रेस नोट सीधे शेख हसीना के प्रत्यर्पण से जुड़ा है। यह बहुत ही ज्यादा विवादास्पद है।"
प्रत्यर्पण की माँग और हसीना की अपनी इच्छा
पूर्व उच्चायुक्त ने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश सरकार ने भारत के सामने एक अनौपचारिक शर्त रखी है — जब तक शेख हसीना वापस नहीं आतीं, रहमान भारत नहीं आएँगे। सिकरी ने इस रुख को 'बिल्कुल गलत' करार दिया।
उन्होंने कहा, "प्रत्यर्पण के मामले में दो साल से ज्यादा समय भी लग सकता है। सभी जानते हैं कि इसमें समय लगता है। शेख हसीना ने खुद कहा है कि वो इस साल दिसंबर में वहाँ जाना चाहती हैं। इसमें दिक्कत क्या है? हसीना खुद जाना चाहती हैं, लेकिन बांग्लादेश सरकार चाहती है कि भारत उनका प्रत्यर्पण करे।"
गौरतलब है कि शेख हसीना अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुए राजनीतिक उथल-पुथल के बाद से भारत में हैं। उनके खिलाफ ढाका में कई मामले दर्ज हैं, और रहमान सरकार उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के लिए वापस लाना चाहती है।
बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति और भारत पर निर्भरता
सिकरी ने बांग्लादेश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, मुहम्मद यूनुस की सरकार के आने के बाद व्यापार के तरीके बदले, जिसका सबसे ज्यादा नुकसान बांग्लादेशी कंपनियों को हुआ।
उन्होंने कहा, "जब लैंडरूट बंद हुए, तो कई कंपनियाँ और फैक्ट्रियाँ अपना ऑर्डर पूरा नहीं कर सकीं। इसके बाद कंपनियाँ बंद हुईं। लाखों की तादाद में महिलाएँ, जो रेडिमेड गारमेंट फैक्ट्री में काम करती थीं, बेरोजगार हो गईं।" उन्होंने यह भी बताया कि बांग्लादेश के वित्त मंत्री ने खुद स्वीकार किया है कि "हमारे बैंक खाली हैं, हमारी ट्रेजरी खाली है।"
सिकरी ने यह भी कहा कि रहमान सरकार इन आर्थिक संकटों के लिए शेख हसीना को जिम्मेदार ठहरा रही है, जबकि सरकार को दो साल हो चुके हैं और बजट भी रहमान सरकार ने ही पेश किए हैं।
ट्रंप ने भारतीय चुनाव आयोग की सराहना की
पूर्व उच्चायुक्त ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय चुनाव प्रणाली की तारीफ का भी स्वागत किया। ट्रंप ने 'सेव अमेरिका एक्ट' के समर्थन में भारत के मतदाता पहचान पत्र प्रणाली का उदाहरण दिया।
सिकरी ने कहा, "अमेरिका के राष्ट्रपति भारतीय चुनाव आयोग की सराहना कर रहे हैं और बता रहे हैं कि हमने 1.4 अरब लोगों की इतनी बड़ी आबादी के लिए वोटर आईडी कार्ड कैसे बनाए हैं। इस पर बेशक हम सभी को बहुत गर्व है।" उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अमेरिका में गैर-नागरिकों द्वारा मतदान के दावों को लेकर असंतुष्टि है, और हाल के न्यूयॉर्क मेयर चुनाव में जोहरान ममदानी के संदर्भ में भी रिपब्लिकन की ओर से ऐसे दावे किए गए हैं।
आगे क्या होगा
भारत-बांग्लादेश संबंधों में यह तनाव ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापार और कनेक्टिविटी के मुद्दे अनसुलझे हैं। कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, प्रत्यर्पण की माँग को भारत दौरे की शर्त बनाना द्विपक्षीय संबंधों को और जटिल बना सकता है। यदि शेख हसीना दिसंबर में स्वेच्छा से लौटती हैं, तो यह पूरी स्थिति नया मोड़ ले सकती है।