एआईएमई 2026: आईएनएस सह्याद्रि और कुलिश ने फिलीपींस में बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास पूरा किया
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलिश ने फिलीपींस में आयोजित बहुपक्षीय समुद्री अभ्यास एआईएमई 2026 में अपनी भागीदारी 3 अक्टूबर 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न कर ली। इस संयुक्त अभ्यास की केंद्रीय थीम 'विश्वास में जड़ें, समुद्र में एकजुट' थी, जो भाग लेने वाली नौसेनाओं के बीच आपसी भरोसे और समुद्री सहयोग को रेखांकित करती है।
अभ्यास का उद्देश्य और संरचना
एआईएमई 2026 का मुख्य लक्ष्य पेशेवर संवाद, संचालन संबंधी समन्वय और समुद्री प्रशिक्षण के माध्यम से भाग लेने वाली नौसेनाओं के बीच सहयोग और इंटरऑपरेबिलिटी को सुदृढ़ करना था। अभ्यास दो चरणों — हार्बर फेज और सी फेज — में आयोजित किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा साझेदारियाँ तेज़ी से महत्त्वपूर्ण होती जा रही हैं।
हार्बर फेज: संवाद और समन्वय
उद्घाटन समारोह के बाद आयोजित हार्बर फेज में प्रमुख अधिकारियों के बीच द्विपक्षीय संवाद, खेल गतिविधियाँ, योग सत्र और सामुदायिक संपर्क कार्यक्रम शामिल रहे। इसके अतिरिक्त विशेषज्ञ स्तर पर विचार-विमर्श, टेबल-टॉप एक्सरसाइज और ऑपरेशनल सिंक्रोनाइजेशन सत्रों के ज़रिए समुद्री चरण की योजनाओं को अंतिम रूप दिया गया। प्री-सेल ब्रीफ ने सभी भाग लेने वाली नौसेनाओं के बीच एकरूपता सुनिश्चित की।
सी फेज: समुद्री अभ्यासों की विस्तृत श्रृंखला
समुद्री चरण में आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलिश ने कई समन्वित अभ्यासों में हिस्सा लिया। इनमें मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर), विजिट-बोर्ड-सर्च-सीजर (वीबीएसएस) और अंडरवे रीप्लेनिशमेंट ड्रिल प्रमुख रहीं। हेलीकॉप्टर-आधारित गतिविधियों में क्रॉस-डेक लैंडिंग, वर्टिकल रीप्लेनिशमेंट और केसवैक (चिकित्सा निकासी) ड्रिल भी सम्पन्न हुईं, जिनसे बहु-राष्ट्रीय स्तर पर आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण किया गया।
भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी से जुड़ाव
गौरतलब है कि यह भागीदारी भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और सागर (SAGAR) विजन — 'क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास' — के अनुरूप है। आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलिश की इस संयुक्त तैनाती ने साझेदार समुद्री सेनाओं के साथ भारतीय नौसेना की निरंतर सहभागिता की प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया। यह उस व्यापक रणनीतिक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी उपस्थिति और प्रभाव को व्यवस्थित रूप से बढ़ा रहा है।
आगे की राह
एआईएमई 2026 में मिली सफलता भविष्य के बहुपक्षीय समुद्री अभ्यासों की नींव को और मज़बूत करती है। भाग लेने वाली नौसेनाओं के बीच बढ़ी हुई इंटरऑपरेबिलिटी और आपसी विश्वास से क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा ढाँचे को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।