30 सितंबर 2026
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एआईएमई-2026: सुबिक बे में भारत-आसियान समुद्री अभ्यास शुरू, INS सह्याद्रि व INS कुलिश उतरे

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एआईएमई-2026: सुबिक बे में भारत-आसियान समुद्री अभ्यास शुरू, INS सह्याद्रि व INS कुलिश उतरे

सारांश

भारत और आसियान देशों की नौसेनाएं फिलीपींस के सुबिक बे में एआईएमई-2026 के ज़रिए एक साथ उतरी हैं। 'विश्वास में जुड़े, समुद्र में एकजुट' की थीम के साथ यह अभ्यास भारत की एक्ट ईस्ट नीति को ठोस रणनीतिक रूप दे रहा है — और हिंद-प्रशांत में साझेदारी की गहराई का संकेत है।

मुख्य बातें

एआईएमई-2026 का दूसरा संस्करण 30 सितंबर 2026 को फिलीपींस के सुबिक बे में शुरू हुआ।
भारतीय नौसेना के आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलिश अभ्यास में भाग ले रहे हैं।
इस वर्ष की थीम है — 'विश्वास में जुड़े, समुद्र में एकजुट' ।
उद्घाटन समारोह में फिलीपींस में भारत के राजदूत हर्ष कुमार जैन मुख्य अतिथि रहे।
अभ्यास बंदरगाह चरण और समुद्री चरण — दो चरणों में आयोजित हो रहा है।
यह अभ्यास भारत की एक्ट ईस्ट नीति और महासागर परिकल्पना के अनुरूप है।

भारतीय नौसेना के आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलिश युद्धपोत 30 सितंबर 2026 को फिलीपींस के सुबिक बे में दूसरे आसियान-भारत समुद्री अभ्यास — एआईएमई-2026 — में शामिल हो गए। इस बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास में भारत के साथ-साथ आसियान सदस्य देशों की समुद्री सेनाएं भी हिस्सा ले रही हैं। अभ्यास की थीम 'विश्वास में जुड़े, समुद्र में एकजुट' रखी गई है, जो इस पहल के व्यापक उद्देश्य को स्पष्ट करती है।

उद्घाटन समारोह और मुख्य अतिथि

अभ्यास की शुरुआत सुबिक बे में एक औपचारिक उद्घाटन समारोह से हुई। फिलीपींस में भारत के राजदूत हर्ष कुमार जैन इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अभ्यास में भाग लेने वाली विभिन्न देशों की समुद्री सेनाओं को संबोधित किया और समुद्री सहयोग के महत्व पर बल दिया।

बंदरगाह चरण: अनुभव साझा करने पर जोर

एआईएमई-2026 दो चरणों में संपन्न होगा — पहला बंदरगाह चरण और दूसरा समुद्री चरण। बंदरगाह चरण में नौसैनिक विशेषज्ञ परस्पर अनुभव और तकनीकी जानकारी साझा करेंगे। इसके साथ ही खेल प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामुदायिक गतिविधियाँ भी आयोजित की जाएंगी, ताकि भाग लेने वाली सेनाओं के बीच आपसी मेलजोल और भरोसा और गहरा हो। समुद्री चरण में उतरने से पूर्व सभी सेनाओं को परिचालन संबंधी आवश्यक जानकारी भी दी जाएगी।

समुद्री चरण: संयुक्त अभियान क्षमता का परीक्षण

बंदरगाह चरण के बाद अभ्यास समुद्री चरण में प्रवेश करेगा, जिसमें भारत और आसियान देशों की नौसेनाएं मिलकर विभिन्न समुद्री और परिचालन गतिविधियाँ संचालित करेंगी। व्यावहारिक प्रशिक्षण के ज़रिए आपसी समझ, परिचालन समन्वय और संयुक्त रूप से काम करने की क्षमता को परखा और मज़बूत किया जाएगा। नौसेना के बयान के अनुसार, यह अभ्यास एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को समझने का व्यावहारिक अवसर प्रदान करता है।

एक्ट ईस्ट नीति और महासागर परिकल्पना से जुड़ाव

नौसेना के अनुसार, एआईएमई-2026 भारत की एक्ट ईस्ट नीति और महासागर (MAHASAGAR) परिकल्पना के सीधे अनुरूप है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी समुद्री उपस्थिति और साझेदारियाँ लगातार सुदृढ़ कर रहा है। गौरतलब है कि यह एआईएमई श्रृंखला का दूसरा संस्करण है, जो भारत-आसियान समुद्री सहयोग को संस्थागत स्वरूप दे रहा है। आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलिश की भागीदारी इस बढ़ते रणनीतिक जुड़ाव की प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति है।

आगे क्या होगा

बंदरगाह चरण की गतिविधियाँ पूरी होने के बाद दोनों पक्षों की नौसेनाएं खुले समुद्र में संयुक्त अभियान करेंगी। इस अभ्यास के ज़रिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत और आसियान देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग की नींव और मज़बूत होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

समुद्र में एकजुट' की थीम कूटनीतिक भाषा नहीं, बल्कि एक संकेत है कि भारत इस क्षेत्र में दीर्घकालिक उपस्थिति सुनिश्चित करना चाहता है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब दक्षिण चीन सागर में तनाव बना हुआ है और आसियान देश बहुपक्षीय सुरक्षा साझेदारियों में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस पहलू को नजरअंदाज़ करती है कि ऐसे अभ्यास सॉफ्ट डिप्लोमेसी से आगे बढ़कर वास्तविक अंतर-संचालनीयता की नींव रखते हैं।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एआईएमई-2026 क्या है और यह कहाँ हो रहा है?
एआईएमई-2026 यानी दूसरा आसियान-भारत समुद्री अभ्यास है, जो फिलीपींस के सुबिक बे में 30 सितंबर 2026 से शुरू हुआ है। इसमें भारतीय नौसेना के आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलिश के साथ-साथ आसियान सदस्य देशों की समुद्री सेनाएं भाग ले रही हैं।
एआईएमई-2026 की थीम क्या है और इसका क्या अर्थ है?
इस वर्ष के अभ्यास की थीम 'विश्वास में जुड़े, समुद्र में एकजुट' है। इसका उद्देश्य केवल सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि भाग लेने वाले देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी भरोसा, समझ और परिचालन समन्वय को गहरा करना है।
इस अभ्यास के कितने चरण हैं और उनमें क्या होगा?
एआईएमई-2026 दो चरणों में आयोजित हो रहा है — बंदरगाह चरण और समुद्री चरण। बंदरगाह चरण में नौसैनिक विशेषज्ञ अनुभव साझा करेंगे, खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे; जबकि समुद्री चरण में संयुक्त अभियान और परिचालन समन्वय का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
यह अभ्यास भारत की विदेश नीति के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
नौसेना के अनुसार एआईएमई-2026 भारत की एक्ट ईस्ट नीति और महासागर परिकल्पना के सीधे अनुरूप है। यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की समुद्री उपस्थिति को मज़बूत करने और आसियान देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को संस्थागत रूप देने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है।
उद्घाटन समारोह में कौन शामिल हुए?
सुबिक बे में हुए उद्घाटन समारोह में फिलीपींस में भारत के राजदूत हर्ष कुमार जैन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने अभ्यास में भाग लेने वाली विभिन्न देशों की समुद्री सेनाओं को संबोधित किया।
राष्ट्र प्रेस
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