13 सितंबर 2026
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आईएनएस कुलिश कंबोडिया के रीम नौसैनिक अड्डे पर, भारत-कंबोडिया समुद्री सहयोग को मिलेगी नई मजबूती

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आईएनएस कुलिश कंबोडिया के रीम नौसैनिक अड्डे पर, भारत-कंबोडिया समुद्री सहयोग को मिलेगी नई मजबूती

सारांश

आईएनएस कुलिश का कंबोडिया के रीम नौसैनिक अड्डे पर पहुँचना महज एक शिष्टाचार यात्रा नहीं — यह भारत की एक्ट ईस्ट नीति का समुद्री विस्तार है। 'सिनबैक्स-टू 2026' अभ्यास के बाद यह दौरा भारत-कंबोडिया रक्षा साझेदारी को एक नई संस्थागत ऊँचाई पर ले जाता है।

मुख्य बातें

आईएनएस कुलिश 13 सितंबर 2026 को कंबोडिया के रीम नौसैनिक अड्डे पर पहुँचा।
यह यात्रा भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े की ऑपरेशनल तैनाती का हिस्सा है।
दोनों नौसेनाओं के बीच पेशेवर वार्तालाप, खेल प्रतियोगिताएँ और नौसैनिक सुविधाओं का परिचय कार्यक्रम आयोजित होंगे।
भारत-कंबोडिया संयुक्त सैन्य अभ्यास 'सिनबैक्स-टू 2026' में ड्रोन, मोर्टार और स्नाइपर प्रशिक्षण शामिल था।
यह दौरा भारत की एक्ट ईस्ट नीति और हिंद-प्रशांत समुद्री सुरक्षा रणनीति के अनुरूप है।

भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस कुलिश 13 सितंबर 2026 को कंबोडिया के रीम नौसैनिक अड्डे पर पहुँच गया है। यह दौरा भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े की ऑपरेशनल तैनाती का हिस्सा है और इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग, ऑपरेशनल तालमेल तथा आपसी समझ को और गहरा करना है। नौसेना के अनुसार, रीम पहुँचने पर आईएनएस कुलिश का कंबोडियाई नौसेना के प्रतिनिधियों और कंबोडिया में भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने स्वागत किया।

मुख्य घटनाक्रम

आईएनएस कुलिश के रीम प्रवास के दौरान दोनों नौसेनाओं के अधिकारियों के बीच पेशेवर वार्तालाप, नौसैनिक सुविधाओं का परस्पर परिचय, खेल प्रतियोगिताएँ और अन्य समुद्री गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों का लक्ष्य दोनों देशों के नौसैनिकों को एक-दूसरे के अनुभव और समुद्री क्षेत्र से जुड़ी जानकारी साझा करने का अवसर प्रदान करना है। यह दौरा भारत-कंबोडिया के बीच सैन्य-से-सैन्य संपर्क की निरंतरता को रेखांकित करता है।

भारत की एक्ट ईस्ट नीति और हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण

आईएनएस कुलिश का यह दौरा भारत की एक्ट ईस्ट नीति और महासागर दृष्टिकोण के अनुरूप है। भारत का स्पष्ट प्रयास है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री मार्ग सुरक्षित, खुले और सभी के लिए समावेशी बने रहें। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण-पूर्व एशिया में समुद्री सुरक्षा को लेकर क्षेत्रीय चिंताएँ बढ़ रही हैं और भारत इस क्षेत्र में अपनी नौसैनिक उपस्थिति को व्यवस्थित रूप से विस्तारित कर रहा है।

सिनबैक्स-टू 2026: संयुक्त सैन्य अभ्यास की पृष्ठभूमि

इस नौसैनिक यात्रा से पहले भारत और कंबोडिया के बीच संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास 'सिनबैक्स-टू 2026' सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है। इस अभ्यास में दोनों देशों के जवानों ने ड्रोन, मोर्टार और स्नाइपर अभ्यास के साथ-साथ काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशन जैसे घातक और जटिल मिशनों का प्रशिक्षण लिया। इस अभ्यास में विशेष रणनीतियों और विशिष्ट कौशल प्रशिक्षण पर विशेष ज़ोर दिया गया। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के सैन्य दलों के बीच अंतर-संचालन क्षमता और परिचालन तालमेल को सुदृढ़ करना था।

भारत-कंबोडिया रक्षा संबंधों की दिशा

भारत और कंबोडिया के बीच सैन्य संबंध लगातार प्रगाढ़ होते जा रहे हैं। नौसैनिक यात्राएँ, संयुक्त अभ्यास और राजनयिक जुड़ाव इस द्विपक्षीय रिश्ते के तीन प्रमुख स्तंभ बन चुके हैं। आईएनएस कुलिश की यह यात्रा उसी दिशा में एक और महत्त्वपूर्ण कदम है। आने वाले समय में दोनों नौसेनाओं के बीच समन्वय और अधिक संस्थागत रूप लेने की संभावना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईएनएस कुलिश क्या है और यह कंबोडिया क्यों गया है?
आईएनएस कुलिश भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े का एक युद्धपोत है जो कंबोडिया के रीम नौसैनिक अड्डे पर समुद्री सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से पहुँचा है। यह यात्रा भारत की एक्ट ईस्ट नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नौसैनिक संपर्क बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
सिनबैक्स-टू 2026 अभ्यास में क्या हुआ था?
भारत-कंबोडिया संयुक्त सैन्य अभ्यास 'सिनबैक्स-टू 2026' में दोनों देशों के जवानों ने ड्रोन, मोर्टार और स्नाइपर अभ्यास के साथ-साथ काउंटर-टेररिज्म मिशन का प्रशिक्षण लिया। इसका मुख्य लक्ष्य दोनों सेनाओं के बीच अंतर-संचालन क्षमता और परिचालन तालमेल को मजबूत करना था।
रीम नौसैनिक अड्डे पर आईएनएस कुलिश के ठहराव के दौरान कौन-से कार्यक्रम होंगे?
आईएनएस कुलिश के प्रवास के दौरान नौसैनिक अधिकारियों के बीच पेशेवर वार्तालाप, नौसैनिक सुविधाओं का परस्पर परिचय, खेल प्रतियोगिताएँ और अन्य समुद्री गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों से दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी समझ और अनुभव साझाकरण को बढ़ावा मिलेगा।
भारत की एक्ट ईस्ट नीति में कंबोडिया की क्या भूमिका है?
एक्ट ईस्ट नीति के तहत भारत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ राजनयिक, आर्थिक और सैन्य संपर्क को प्राथमिकता देता है। कंबोडिया के साथ नौसैनिक यात्राएँ और संयुक्त अभ्यास इसी नीति के व्यावहारिक क्रियान्वयन हैं, जिनका उद्देश्य हिंद-प्रशांत में भारत की समुद्री पहुँच को विस्तार देना है।
भारत और कंबोडिया के सैन्य संबंध कितने गहरे हैं?
भारत और कंबोडिया के बीच सैन्य संबंध हाल के वर्षों में तेजी से प्रगाढ़ हुए हैं। संयुक्त सैन्य अभ्यास 'सिनबैक्स-टू 2026', काउंटर-टेररिज्म प्रशिक्षण और आईएनएस कुलिश जैसी नौसैनिक यात्राएँ इस संबंध के बढ़ते संस्थागत स्वरूप को दर्शाती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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