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ए. राजा ने CM विजय पर विवादित टिप्पणी वापस ली, DMK गठबंधन में बढ़ा तनाव

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ए. राजा ने CM विजय पर विवादित टिप्पणी वापस ली, DMK गठबंधन में बढ़ा तनाव

सारांश

तमिलनाडु में सियासी भूचाल: DMK सांसद ए. राजा ने CM विजय पर की विवादित टिप्पणी वापस ली, लेकिन माफी में भी आक्रामक लहजा बरकरार रहा। गठबंधन सहयोगियों और कांग्रेस की तीखी आलोचना ने DMK को बैकफुट पर धकेल दिया, और TVK-DMK के बीच सियासी खाई और गहरी हो गई।

मुख्य बातें

राजा ने 13 सितंबर 2026 को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी.
जोसेफ विजय पर की विवादित टिप्पणी वापस ली।
विवाद टीवीके सरकार के खिलाफ डीएमके के राज्यव्यापी प्रदर्शनों के दौरान शुरू हुआ।
तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष मणिकम टैगोर समेत गठबंधन सहयोगियों ने राजा की टिप्पणियों की निंदा की।
राजा ने एक्स पर पोस्ट कर टिप्पणी वापस ली, परंतु पोस्ट में आक्रामक लहजा कायम रहा।
इस घटना ने टीवीके और डीएमके के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है।

डीएमके सांसद ए. राजा ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के खिलाफ अपनी विवादित टिप्पणी वापस ले ली है। 13 सितंबर 2026 को गठबंधन सहयोगियों और अपनी ही पार्टी के नेताओं की तीखी आलोचना के बाद राजा ने यह कदम उठाया। इस घटनाक्रम ने तमिलनाडु में सत्ताधारी टीवीके और विपक्षी डीएमके के बीच राजनीतिक टकराव को और गहरा कर दिया है।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई

यह विवाद शनिवार को टीवीके सरकार के खिलाफ डीएमके द्वारा आयोजित राज्यव्यापी प्रदर्शनों के दौरान भड़का। डीएमके ने मुख्यमंत्री विजय और कानून मंत्री टी.टी.आर. निर्मल कुमार पर आरोप लगाया कि उन्होंने डीएमके नेताओं और आपातकाल के दौरान जेल गए लोगों के बलिदान का अपमान किया। इन प्रदर्शनों के दौरान डीएमके के वरिष्ठ नेताओं पी.के. सेकर बाबू और आर.एस. भारती ने मुख्यमंत्री की कड़ी आलोचना की।

राजा की टिप्पणी ने बदला घटनाक्रम

हालांकि, सांसद राजा की विजय और निर्मल कुमार पर की गई व्यक्तिगत टिप्पणियों ने एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया। आलोचकों का कहना है कि इससे सरकार के खिलाफ डीएमके के मूल आरोपों से ध्यान हट गया। टीवीके के कई पदाधिकारियों और मंत्रियों ने राजा की टिप्पणियों को व्यक्तिगत, अपमानजनक और एक वरिष्ठ सांसद के लिए अशोभनीय करार दिया।

गठबंधन साझेदारों और कांग्रेस की प्रतिक्रिया

डीएमके की सहयोगी कुछ पार्टियों के नेताओं ने भी अपनी असहमति जताई। तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने राजा के भाषण की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत अपमान करना और अपशब्दों का इस्तेमाल लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर खतरा है। टैगोर ने यह भी सवाल उठाया कि जब पार्टी के वरिष्ठ नेता बार-बार स्वीकार्य राजनीतिक बातचीत की सीमाएँ पार करते रहे, तो डीएमके नेतृत्व मौन क्यों रहा। डीएमके समर्थकों के एक वर्ग ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिये इन टिप्पणियों से खुद को अलग कर लिया।

राजा की माफी — आक्रामक लहजे के साथ

बढ़ती आलोचना के बीच ए. राजा ने एक्स पर पोस्ट करते हुए घोषणा की कि वह अपनी टिप्पणी वापस लेते हैं। उन्होंने लिखा, 'मुझे अपने शब्द वापस लेने में कोई हिचकिचाहट नहीं है। अगर आप नहीं बदलते हैं, तो आपको सुधारा जाएगा।' गौरतलब है कि इस खेद-प्रकाशन में भी राजा का मूल आक्रामक लहजा बना रहा — उन्होंने उस व्यक्ति की 'पहचान' और 'सच्चाई' पर सवाल उठाने का अफसोस जताने की बात कही, जिसने कथित तौर पर बलिदान से जन्मे एक नेता की पहचान का मज़ाक उड़ाया था।

तमिलनाडु की राजनीति पर असर

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब टीवीके और डीएमके के बीच सियासी तनाव पहले से ही चरम पर है। इस विवाद ने तमिलनाडु में राजनीतिक बातचीत के गिरते स्तर पर बहस को फिर से हवा दे दी है। सभी दलों के नेता अब सार्वजनिक भाषणों में संयम और सम्मान बरतने की अपील कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या डीएमके नेतृत्व इस मामले पर कोई आधिकारिक रुख अपनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

राजा के अतिरेक की वजह से 'पीड़ित' की भूमिका में चले गए, और डीएमके को रक्षात्मक होना पड़ा। यह Nवीं बार है जब तमिलनाडु की राजनीति में व्यक्तिगत हमलों ने नीतिगत बहस को पीछे धकेल दिया। असली सवाल यह है कि डीएमके नेतृत्व इस बार चुप क्यों रहा — क्या यह आंतरिक अनुशासन की कमी है, या पार्टी के भीतर विजय सरकार के प्रति गहरी बेचैनी का संकेत?
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ए. राजा ने CM विजय पर क्या टिप्पणी की थी और उसे वापस क्यों लिया?
डीएमके सांसद ए. राजा ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और कानून मंत्री टी.टी.आर. निर्मल कुमार पर व्यक्तिगत और आक्रामक टिप्पणियाँ की थीं, जिन्हें गठबंधन सहयोगियों और पार्टी नेताओं ने अशोभनीय बताया। बढ़ती आलोचना के बाद उन्होंने 13 सितंबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर टिप्पणी वापस ली।
यह विवाद कब और किस संदर्भ में शुरू हुआ?
यह विवाद शनिवार को टीवीके सरकार के खिलाफ डीएमके द्वारा आयोजित राज्यव्यापी प्रदर्शनों के दौरान शुरू हुआ। डीएमके ने आरोप लगाया कि सरकार ने आपातकाल के दौरान जेल गए नेताओं के बलिदान का अपमान किया।
मणिकम टैगोर ने इस मामले पर क्या कहा?
तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने राजा के भाषण की निंदा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत अपमान और अपशब्दों का इस्तेमाल लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने यह भी पूछा कि ऐसे मौकों पर डीएमके नेतृत्व मौन क्यों रहता है।
क्या ए. राजा की माफी को वास्तविक खेद माना जा सकता है?
राजा की एक्स पोस्ट में तकनीकी रूप से टिप्पणी वापस ली गई, लेकिन पोस्ट का लहजा आक्रामक बना रहा — उन्होंने लिखा 'अगर आप नहीं बदलते हैं, तो आपको सुधारा जाएगा।' इसे राजनीतिक टिप्पणीकार पूर्ण खेद की बजाय सशर्त वापसी मान रहे हैं।
इस विवाद का तमिलनाडु की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
इस घटनाक्रम ने टीवीके और डीएमके के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों को और बिगाड़ दिया है। इसने राज्य में राजनीतिक बातचीत के गिरते स्तर पर बहस को नया जीवन दिया है, और आगे चुनावी गणित पर इसका असर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
राष्ट्र प्रेस
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