तमिलनाडु विधानसभा में विजय सरकार का विश्वास मत: 119 विधायकों के समर्थन का दावा, AIADMK में फूट
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) सरकार बुधवार, 13 मई को तमिलनाडु विधानसभा में अहम विश्वास मत का सामना कर रही है। अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के भीतर गहराती फूट के बीच सत्ताधारी गठबंधन 119 विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए मज़बूत स्थिति में खड़ा दिख रहा है।
चुनावी नतीजे और सरकार गठन
हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में TVK ने 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया था। हालांकि, पार्टी बहुमत के आवश्यक आँकड़े 118 से पीछे रह गई, जिससे सरकार गठन को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई। बाद में कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPI-M), विदुथलाई चिरुथाइगल काची (VCK) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के समर्थन से विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
शपथ के बाद विजय ने अपनी एक विधानसभा सीट — तिरुची ईस्ट — से इस्तीफा दे दिया, जिससे TVK की संख्या घटकर 107 रह गई। कार्यवाहक राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने नई सरकार को बुधवार तक सदन में बहुमत साबित करने का निर्देश दिया था।
विश्वास मत की प्रक्रिया
विधानसभा की बैठक सुबह 9:30 बजे शुरू होगी। इस दौरान विजय द्वारा विश्वास प्रस्ताव पेश किए जाने की उम्मीद है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संक्षिप्त बहस के बाद मतदान कराया जाएगा। यह विश्वास मत गुप्त मतदान के ज़रिए नहीं होगा — संवैधानिक प्रावधानों के तहत स्पीकर यह वोट ध्वनि मत या विभाजन के ज़रिए करवा सकते हैं।
AIADMK में फूट और समीकरणों में बदलाव
वरिष्ठ AIADMK नेता सी.वी. षणमुगम के नेतृत्व में 30 से अधिक AIADMK विधायकों ने सत्ताधारी सरकार को समर्थन देने का फैसला किया है, जिससे राजनीतिक समीकरण TVK सरकार के पक्ष में और मज़बूत हो गए हैं। इसके अलावा, मन्नारगुडी से MMK के टिकट पर निर्वाचित विधायक कामराज ने भी विजय सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है।
हालांकि, AIADMK के राज्यसभा सांसद इनबादुराई ने पार्टी विधायकों को आधिकारिक व्हिप का उल्लंघन न करने की चेतावनी दी है। उनके अनुसार, जो विधायक वोटिंग से दूर रहते हैं, तटस्थ रहते हैं या सरकार के पक्ष में मत देते हैं, उन्हें दलबदल विरोधी कानूनों के तहत अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
मद्रास उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप
मद्रास उच्च न्यायालय ने DMK उम्मीदवार पेरियाकरुप्पन द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए तिरुपत्तूर से TVK विधायक श्रीनिवासन सेतुपति को विश्वास मत में भाग लेने से रोक दिया है। इस झटके के बावजूद सत्ताधारी खेमा 119 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहा है — जिनमें 106 TVK विधायक, 5 कांग्रेस विधायक और CPI, CPI(M) तथा IUML के दो-दो विधायक शामिल हैं।
विफलता की स्थिति में क्या होगा
यदि सरकार सदन में बहुमत साबित करने में विफल रहती है, तो राज्यपाल संविधान के अनुच्छेद 174 के तहत सरकार को बर्खास्त करने और राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश कर सकते हैं। यह तमिलनाडु की राजनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ होगा। फिलहाल सभी की निगाहें विधानसभा के भीतर होने वाले घटनाक्रम पर टिकी हैं।