तमिलनाडु विधानसभा में विजय सरकार का विश्वास मत: 119 विधायकों के समर्थन का दावा, AIADMK में फूट

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तमिलनाडु विधानसभा में विजय सरकार का विश्वास मत: 119 विधायकों के समर्थन का दावा, AIADMK में फूट

सारांश

तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की TVK सरकार 13 मई को विश्वास मत का सामना कर रही है। AIADMK में 30 से अधिक विधायकों की बगावत और सहयोगी दलों के समर्थन से सत्ताधारी खेमा 119 विधायकों के साथ मज़बूत दिख रहा है — लेकिन दलबदल विरोधी कानून और मद्रास उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप तस्वीर को पेचीदा बनाते हैं।

मुख्य बातें

TVK सरकार 13 मई को तमिलनाडु विधानसभा में विश्वास मत का सामना कर रही है; बैठक सुबह 9:30 बजे शुरू होगी।
सत्ताधारी खेमा 119 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहा है — 106 TVK , 5 कांग्रेस , और CPI, CPI(M), IUML के दो-दो विधायक।
AIADMK के वरिष्ठ नेता सी.वी.
षणमुगम के नेतृत्व में 30 से अधिक AIADMK विधायकों ने विजय सरकार को समर्थन देने की घोषणा की।
मद्रास उच्च न्यायालय ने TVK विधायक श्रीनिवासन सेतुपति को विश्वास मत में भाग लेने से रोका।
AIADMK के राज्यसभा सांसद इनबादुराई ने बागी विधायकों को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की चेतावनी दी।
बहुमत साबित न होने पर अनुच्छेद 174 के तहत राष्ट्रपति शासन की संभावना।

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) सरकार बुधवार, 13 मई को तमिलनाडु विधानसभा में अहम विश्वास मत का सामना कर रही है। अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के भीतर गहराती फूट के बीच सत्ताधारी गठबंधन 119 विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए मज़बूत स्थिति में खड़ा दिख रहा है।

चुनावी नतीजे और सरकार गठन

हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में TVK ने 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया था। हालांकि, पार्टी बहुमत के आवश्यक आँकड़े 118 से पीछे रह गई, जिससे सरकार गठन को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई। बाद में कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPI-M), विदुथलाई चिरुथाइगल काची (VCK) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के समर्थन से विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

शपथ के बाद विजय ने अपनी एक विधानसभा सीट — तिरुची ईस्ट — से इस्तीफा दे दिया, जिससे TVK की संख्या घटकर 107 रह गई। कार्यवाहक राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने नई सरकार को बुधवार तक सदन में बहुमत साबित करने का निर्देश दिया था।

विश्वास मत की प्रक्रिया

विधानसभा की बैठक सुबह 9:30 बजे शुरू होगी। इस दौरान विजय द्वारा विश्वास प्रस्ताव पेश किए जाने की उम्मीद है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संक्षिप्त बहस के बाद मतदान कराया जाएगा। यह विश्वास मत गुप्त मतदान के ज़रिए नहीं होगा — संवैधानिक प्रावधानों के तहत स्पीकर यह वोट ध्वनि मत या विभाजन के ज़रिए करवा सकते हैं।

AIADMK में फूट और समीकरणों में बदलाव

वरिष्ठ AIADMK नेता सी.वी. षणमुगम के नेतृत्व में 30 से अधिक AIADMK विधायकों ने सत्ताधारी सरकार को समर्थन देने का फैसला किया है, जिससे राजनीतिक समीकरण TVK सरकार के पक्ष में और मज़बूत हो गए हैं। इसके अलावा, मन्नारगुडी से MMK के टिकट पर निर्वाचित विधायक कामराज ने भी विजय सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है।

हालांकि, AIADMK के राज्यसभा सांसद इनबादुराई ने पार्टी विधायकों को आधिकारिक व्हिप का उल्लंघन न करने की चेतावनी दी है। उनके अनुसार, जो विधायक वोटिंग से दूर रहते हैं, तटस्थ रहते हैं या सरकार के पक्ष में मत देते हैं, उन्हें दलबदल विरोधी कानूनों के तहत अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

मद्रास उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप

मद्रास उच्च न्यायालय ने DMK उम्मीदवार पेरियाकरुप्पन द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए तिरुपत्तूर से TVK विधायक श्रीनिवासन सेतुपति को विश्वास मत में भाग लेने से रोक दिया है। इस झटके के बावजूद सत्ताधारी खेमा 119 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहा है — जिनमें 106 TVK विधायक, 5 कांग्रेस विधायक और CPI, CPI(M) तथा IUML के दो-दो विधायक शामिल हैं।

विफलता की स्थिति में क्या होगा

यदि सरकार सदन में बहुमत साबित करने में विफल रहती है, तो राज्यपाल संविधान के अनुच्छेद 174 के तहत सरकार को बर्खास्त करने और राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश कर सकते हैं। यह तमिलनाडु की राजनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ होगा। फिलहाल सभी की निगाहें विधानसभा के भीतर होने वाले घटनाक्रम पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन AIADMK के बागी विधायकों पर दलबदल विरोधी कानून की लटकती तलवार इस समर्थन को कानूनी दृष्टि से कमज़ोर बना सकती है। असली सवाल यह है कि क्या षणमुगम गुट की बगावत एक सुनियोजित राजनीतिक पुनर्गठन है या महज़ सत्ता की ओर झुकाव — क्योंकि दोनों के निहितार्थ बिल्कुल अलग हैं। मद्रास उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप यह भी संकेत देता है कि इस विश्वास मत की वैधता को न्यायिक चुनौती मिल सकती है। तमिलनाडु की राजनीति में यह क्षण महज़ संख्याओं का खेल नहीं — यह राज्य में नई राजनीतिक धुरी के उभरने की परीक्षा है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में विश्वास मत क्या है और यह क्यों ज़रूरी है?
विश्वास मत वह प्रक्रिया है जिसमें नई सरकार को विधानसभा में बहुमत साबित करना होता है। कार्यवाहक राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने TVK सरकार को 13 मई तक बहुमत साबित करने का निर्देश दिया था, क्योंकि TVK अकेले 234 सदस्यीय सदन में 118 के बहुमत के आँकड़े से पीछे रही थी।
विजय सरकार के पास अभी कितने विधायकों का समर्थन है?
सत्ताधारी खेमा 119 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहा है — जिनमें 106 TVK, 5 कांग्रेस, और CPI, CPI(M) तथा IUML के दो-दो विधायक शामिल हैं। इसके अलावा AIADMK के 30 से अधिक विधायक भी समर्थन में हैं।
AIADMK में क्या फूट पड़ी है?
वरिष्ठ AIADMK नेता सी.वी. षणमुगम के नेतृत्व में 30 से अधिक AIADMK विधायकों ने पार्टी व्हिप के विरुद्ध जाकर विजय सरकार को समर्थन देने का फैसला किया है। हालांकि पार्टी के राज्यसभा सांसद इनबादुराई ने इन विधायकों को दलबदल विरोधी कानूनों के तहत अयोग्यता की चेतावनी दी है।
मद्रास उच्च न्यायालय ने विश्वास मत में क्यों हस्तक्षेप किया?
मद्रास उच्च न्यायालय ने DMK उम्मीदवार पेरियाकरुप्पन की याचिका पर सुनवाई करते हुए तिरुपत्तूर से TVK विधायक श्रीनिवासन सेतुपति को विश्वास मत में भाग लेने से रोक दिया है। यह आदेश चुनाव संबंधी विवाद के चलते जारी किया गया।
यदि विजय सरकार विश्वास मत हार जाए तो क्या होगा?
यदि सरकार सदन में बहुमत साबित करने में विफल रहती है, तो राज्यपाल संविधान के अनुच्छेद 174 के तहत सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश कर सकते हैं। यह तमिलनाडु की राजनीति के लिए एक बड़ा संवैधानिक संकट होगा।
राष्ट्र प्रेस