एमडीएमके का डीएमके गठबंधन छोड़ने का ऐलान संभव, 27 जून की जनरल काउंसिल बैठक अहम
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु की राजनीति में बड़े फेरबदल की आहट सुनाई दे रही है। मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एमडीएमके) के द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK)-नीत सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) से अलग होने और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार के करीब जाने की अटकलें 18 जून 2026 को और तेज हो गई हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, 27 जून को होने वाली एमडीएमके की जनरल काउंसिल बैठक में इस संबंध में औपचारिक निर्णय लिया जा सकता है।
राजनीतिक पुनर्गठन की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव में एमडीएमके ने DMK के चुनाव चिह्न 'राइजिंग सन' पर चार सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से दो सीटों पर जीत हासिल हुई। यही स्थिति अब पार्टी के लिए राजनीतिक पेंच बन गई है — क्योंकि DMK के चुनाव चिह्न पर जीते विधायक सीधे तौर पर टीवीके सरकार का समर्थन नहीं कर सकते। पार्टी नेताओं के अनुसार, सबसे व्यावहारिक रास्ता यही है कि दोनों विधायक अपने पद से इस्तीफा दें, उपचुनाव लड़ें और दोबारा जीतने के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन को समर्थन दें।
वाइको और दुरई वाइको की भूमिका
एमडीएमके प्रमुख वाइको और उनके पुत्र, तिरुचिरापल्ली से सांसद दुरई वाइको, दोनों सार्वजनिक रूप से DMK के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने को लेकर खेद जता चुके हैं। दुरई वाइको ने हाल ही में कहा था कि DMK के टिकट पर जीतने के कारण उनकी पार्टी टीवीके सरकार का समर्थन नहीं कर पा रही, जो उनके लिए 'दुर्भाग्य की बात' है।
मंगलवार को लोक निर्माण मंत्री आधव अर्जुना ने चेन्नई स्थित वाइको के आवास पर उनसे मुलाकात की। अगले दिन वाइको ने सचिवालय में मुख्यमंत्री विजय से करीब 45 मिनट की बैठक की, जिसमें सूत्रों के अनुसार राजनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। हालांकि वाइको ने गठबंधन बदलने की खबरों को 'महज अटकल' बताया।
टीवीके सरकार का बचाव और विपक्ष पर पलटवार
इसी बीच दुरई वाइको ने राज्य में महिलाओं के खिलाफ हालिया अपराधों को लेकर टीवीके सरकार का बचाव किया। उन्होंने विपक्ष के उन आरोपों को खारिज किया जिनमें कानून-व्यवस्था बिगड़ने की बात कही जा रही थी, और कहा कि यह सरकार के खिलाफ एक 'नैरेटिव' तैयार करने की कोशिश है। उनका तर्क था कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कोई असामान्य बढ़ोतरी नहीं हुई है और ऐसे मामले DMK शासन के दौरान भी सामने आते रहे थे।
विधानसभा पर असर: आठ सीटें हो सकती हैं रिक्त
यदि एमडीएमके के दोनों विधायक इस्तीफा देते हैं, तो विधानसभा में रिक्त सीटों की संख्या बढ़कर आठ हो जाएगी। इनमें मुख्यमंत्री विजय के पद संभालने के बाद खाली हुई तिरुचिरापल्ली (पूर्व) सीट भी शामिल है। यह ऐसे समय में आया है जब DMK के कई पूर्व सहयोगी दल — वीसीके, आईयूएमएल, सीपीआई और सीपीएम — पहले ही टीवीके सरकार को समर्थन दे चुके हैं।
आगे क्या होगा
27 जून की जनरल काउंसिल बैठक तमिलनाडु की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है। यदि एमडीएमके औपचारिक रूप से SPA से बाहर निकलती है, तो यह राज्य में गठबंधन राजनीति के नए समीकरणों की शुरुआत होगी।