तमिलनाडु में विश्वास मत के बाद घमासान: एमके स्टालिन ने टीवीके सरकार पर 'डर्टी पॉलिटिक्स' का आरोप लगाया
सारांश
मुख्य बातें
द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (डीएमके) के अध्यक्ष एमके स्टालिन ने 13 मई 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबा बयान जारी कर तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। विश्वास मत के ठीक बाद तमिलनाडु की राजनीति में यह बयान नई बहस का केंद्र बन गया है।
डीएमके का रुख और विश्वास मत से वॉकआउट
स्टालिन ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि डीएमके टीवीके सरकार के गठन या उसके बने रहने में कोई बाधा नहीं डालेगी। इसी रुख के अनुरूप, डीएमके विधायकों ने विश्वास मत का बहिष्कार किया और विधानसभा से वॉकआउट किया।
स्टालिन ने बताया कि उनके गठबंधन सहयोगियों — प्रेमलता विजयकांत, प्रोफेसर जवाहरुल्लाह, थमिमुन अंसारी और नित्यानंदन — ने भी सदन से वॉकआउट कर एकजुटता दिखाई। उन्होंने इन सभी नेताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
सहयोगी दलों के अलग-अलग फैसले
वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), CPI(M), IUML और VCK जैसे सहयोगी दलों ने राष्ट्रपति शासन की संभावना को रोकने के लिए सरकार के पक्ष में मतदान किया। स्टालिन ने इन दलों के इस निर्णय का भी सम्मान किया और उनकी राजनीतिक समझ को स्वीकार किया।
टीवीके पर 'डर्टी पॉलिटिक्स' का आरोप
स्टालिन ने आरोप लगाया कि टीवीके अब उन लोगों का भरोसा तोड़ रही है जिन्होंने सरकार बनने का रास्ता साफ किया था। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दिनों में सत्ताधारी दल की गतिविधियों और सहयोगी दलों के बयानों से स्पष्ट हो गया है कि सरकार