तमिलनाडु: त्रिशंकु विधानसभा में डीएमके-एआईएडीएमके समर्थन फॉर्मूले की कुंजी वामपंथी दलों और वीसीके के हाथ
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद उभरे त्रिशंकु जनादेश के बीच द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के अध्यक्ष और निवर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने 7 मई 2026 को चेन्नई स्थित अपने सेनोटैफ रोड आवास पर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सिस्ट (सीपीआई-एम), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) और विदुथलाई चिरुथाइगल काची (वीसीके) के शीर्ष नेताओं के साथ अहम बैठक की। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) को बाहरी समर्थन देने की संभावना पर विचार-विमर्श किया गया, ताकि राज्य में राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
मुख्य घटनाक्रम
स्टालिन ने सीपीआई-एम के राज्य सचिव पी. शनमुगम, सीपीआई के राज्य सचिव एम. वीरपांडियन और वीसीके अध्यक्ष थोल. थिरुमावलवन के साथ अलग-अलग चर्चा की। सूत्रों के अनुसार, सीपीआई-एम और सीपीआई के नेताओं ने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय लेने से पहले उनकी संबंधित राज्य समितियाँ शुक्रवार को अलग-अलग बैठकों में इस मुद्दे पर विचार करेंगी। वीसीके प्रमुख थिरुमावलवन ने संकेत दिया कि उनकी पार्टी दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों द्वारा अपनाए गए रुख का ही अनुसरण करेगी।
त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति
तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सीटें हैं और बहुमत के लिए 118 सीटों की आवश्यकता है। चुनाव परिणामों के बाद किसी भी दल या गठबंधन को यह जादुई आँकड़ा हासिल नहीं हो पाया है। यह ऐसे समय में आया है जब अभिनेता से राजनेता बने सी. जोसेफ विजय की तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) भी सरकार बनाने की दौड़ में बनी हुई है। गौरतलब है कि सीपीआई-एम, सीपीआई और वीसीके के मिलाकर 6 विधायक हैं, जो मौजूदा राजनीतिक समीकरण में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
डीएमके का रुख और विधायक दल की बैठक
DMK के सूत्रों ने संकेत दिया कि पार्टी नेतृत्व फिलहाल AIADMK के नेतृत्व वाली सरकार में औपचारिक रूप से शामिल होने के बजाय उसे बाहरी समर्थन देने की ओर झुका हुआ है। गुरुवार शाम को होने वाली DMK विधायक दल की बैठक में एक प्रस्ताव पारित किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है, जिसमें स्टालिन को AIADMK के किसी भी समर्थन अनुरोध पर उचित निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया जाएगा। हालाँकि, सूत्रों के अनुसार, गठबंधन के साझेदारों को यह तय करने की स्वतंत्रता दी जा सकती है कि वे इस व्यवस्था में भाग लेना चाहते हैं या नहीं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि वामपंथी दल और वीसीके वैचारिक प्रतिबद्धताओं और राजनीतिक स्थिरता की आवश्यकता के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि DMK का AIADMK को समर्थन देने की ओर झुकाव तमिलनाडु की राजनीति में एक अभूतपूर्व स्थिति है, जो दशकों की कट्टर प्रतिद्वंद्विता को दरकिनार करती है। खंडित जनादेश ने राज्य की राजनीति में एक ऐसी स्थिति पैदा की है जो पहले कभी नहीं देखी गई।
आगे क्या होगा
अब सबकी निगाहें शुक्रवार को सीपीआई-एम और सीपीआई की राज्य समिति बैठकों पर टिकी हैं। इन बैठकों के नतीजे तय करेंगे कि तमिलनाडु में अगली सरकार का स्वरूप क्या होगा — TVK के नेतृत्व में, AIADMK के नेतृत्व में DMK के बाहरी समर्थन से, या किसी अन्य वैकल्पिक गठबंधन के रूप में।