तमिलनाडु: एम.के. स्टालिन ने सीएम पद से इस्तीफा दिया, राज्यपाल ने कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहने को कहा
सारांश
मुख्य बातें
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) प्रमुख और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने 5 मई 2026 को विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद अपना इस्तीफा राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को सौंप दिया। राज्यपाल ने इस्तीफा स्वीकार करते हुए स्टालिन से नई सरकार के शपथ ग्रहण तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में पद पर बने रहने का अनुरोध किया है।
चुनाव परिणाम: डीएमके गठबंधन की ऐतिहासिक हार
234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटें आवश्यक थीं, लेकिन डीएमके नीत सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) केवल 73 सीटें ही जीत सका। डीएमके ने 164 सीटों पर चुनाव लड़ा था और लगभग 60 सीटों पर ही जीत दर्ज कर सकी, जिससे पार्टी को विपक्ष में बैठने के लिए विवश होना पड़ा। सूत्रों के अनुसार, जैसे ही परिणामों से स्पष्ट हुआ कि गठबंधन बहुमत से काफी पीछे रह गया है, इस्तीफा तुरंत राज्यपाल को सौंप दिया गया।
स्टालिन की व्यक्तिगत हार: कोलाथुर सीट भी गई
स्टालिन को इस चुनाव में व्यक्तिगत स्तर पर भी बड़ा झटका लगा। वे 2011 से जिस कोलाथुर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते आ रहे थे, वह भी उन्होंने गँवा दी। उन्हें तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के उम्मीदवार वी.एस. बाबू ने पराजित किया। गौरतलब है कि किसी मौजूदा मुख्यमंत्री की इस प्रकार की चुनावी हार तमिलनाडु में अत्यंत दुर्लभ है — इससे पहले 1996 में पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता को भी ऐसी ही हार का सामना करना पड़ा था।
संवैधानिक प्रक्रिया: कार्यवाहक सरकार का गठन
लोक भवन से मंगलवार को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, राज्यपाल आर्लेकर ने संवैधानिक परंपरा के तहत स्टालिन और उनकी मंत्रिपरिषद का इस्तीफा स्वीकार किया तथा नई सरकार के शपथ ग्रहण तक कार्यभार संभालने का अनुरोध किया। यह प्रक्रिया भारतीय संसदीय परंपरा के अनुरूप है, जिसमें नई सरकार के गठन तक निवर्तमान सरकार सीमित अधिकारों के साथ कार्यवाहक के रूप में बनी रहती है।
विजय की TVK: सबसे बड़ी पार्टी, सरकार बनाने की जद्दोजहद
इस चुनाव में अभिनेता-राजनेता विजय के नेतृत्व में तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, हालाँकि वह भी अपने दम पर बहुमत से दूर है। वी.एस. बाबू की जीत को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वे पहले DMK से जुड़े रहे हैं। उनकी जीत राज्य में मतदाताओं के बदलते रुझान का संकेत देती है। ऐसे में सरकार गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं और गठबंधन की संभावनाएँ तलाशी जा रही हैं।
आगे क्या होगा
तमिलनाडु में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में सरकार गठन एक जटिल प्रक्रिया होगी। राज्यपाल सबसे बड़े दल या गठबंधन को सरकार बनाने का न्योता दे सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य की राजनीति में TVK के उदय ने परंपरागत द्विध्रुवीय DMK-AIADMK राजनीति को नई चुनौती दी है। आने वाले दिनों में गठबंधन की बातचीत और राज्यपाल के निर्णय पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।