तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026: डीएमके को करारा झटका, CM स्टालिन समेत 15 प्रमुख मंत्री हारे
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) को ऐतिहासिक पराजय का सामना करना पड़ा है। पार्टी ने जिन 164 सीटों पर सीधे चुनाव लड़ा, उनमें से केवल 59 सीटें ही जीत पाई और अब विपक्ष की भूमिका में आ गई है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, विधानसभा अध्यक्ष और कम-से-कम 15 वरिष्ठ मंत्रियों की हार ने पूरे राज्य में सत्ता-विरोधी लहर की पुष्टि की।
मुख्य घटनाक्रम
तमिलनाडु में इस बार डीएमके, तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के बीच जबरदस्त त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला। टीवीके की मजबूत लहर के चलते सत्ताधारी डीएमके अपना दबदबा कायम रखने में नाकाम रही। यह परिणाम इसलिए भी चौंकाने वाले रहे क्योंकि विधानसभा अध्यक्ष तक को हार का सामना करना पड़ा।
कौन-कौन से मंत्री हारे
स्वास्थ्य मंत्री एम. सुब्रमण्यम सैदापेट से लगभग 28,500 वोटों के बड़े अंतर से चुनाव हार गए। स्कूली शिक्षा मंत्री अनबिल महेश पोय्यामोझी तिरुवेरुम्बुर से पराजित हुए, जबकि वित्त मंत्री पी.टी.आर. पलानीवेल त्यागराजन को मदुरै मध्य से अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा, जहाँ टीवीके के उम्मीदवार ने बहुकोणीय मुकाबले में जीत दर्ज की।
मंत्री टी.आर.बी. राजा मन्नारगुडी से हारे, जबकि मंत्री मूर्ति मदुरै पूर्व से 16,500 से अधिक वोटों से पराजित हुए। वरिष्ठ नेता दुरई मुरुगन काटपाडी से 7,600 से अधिक वोटों से हारे और मंत्री मुथुसामी इरोड पश्चिम से 22,000 से अधिक वोटों से चुनाव हार गए।
के.के.एस.एस.आर. रामचंद्रन अरुप्पुकोट्टई से और थंगम थेन्नारासु अपने ही निर्वाचन क्षेत्र में हार गए। मंत्री नासर (अवाडी), मतिवेंधन (रासीपुरम), आर. राजेंद्रन (सेलम उत्तर), गांधी (रानीपेट) और सामिनाथन (कांगेयम) भी पराजित नेताओं में शामिल रहे। अलंदूर में टी.एम. अनबरसन 25,000 से अधिक वोटों के अंतर से हारे।
सबसे चर्चित मुकाबला तिरुपत्तूर में रहा, जहाँ मंत्री पेरियाकरुप्पन मात्र एक वोट के अंतर से चुनाव हार गए — यह इस चुनाव की असाधारण प्रतिस्पर्धी प्रकृति का प्रमाण है।
डीएमके के जीतने वाले नेता
व्यापक पराजय के बावजूद डीएमके के कुछ वरिष्ठ नेता अपनी सीटें बचाने में सफल रहे। उदयनिधि स्टालिन चेपॉक से 7,300 से अधिक वोटों के अंतर से जीते। मंत्री शेखरबाबू ने हार्बर सीट बरकरार रखी, जबकि के.एन. नेहरू ने तिरुचिरापल्ली पश्चिम और आई. पेरियासामी ने अथूर से जीत दर्ज की।
चक्रपाणि ने ओडनछत्रम से आसानी से जीत हासिल की, जबकि ई.वी. वेलू ने तिरुवन्नामलाई सीट बेहद कम अंतर से बचाई। मंत्री एम.आर.के. पन्नीरसेल्वम, मैय्यनाथन, सी.वी. गणेशन और के. चेझियान के अलावा तिरुचेंदुर से अनीता राधाकृष्णन और रघुपति, शिवशंकर तथा राजकन्नप्पन भी विजेताओं में शामिल रहे।
तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य पर असर
इन नतीजों ने तमिलनाडु की राजनीति में एक निर्णायक बदलाव का संकेत दिया है। टीवीके के उभरने से वोट देने के पारंपरिक समीकरण बदल गए हैं और डीएमके तथा एआईएडीएमके, दोनों का वर्चस्व कमजोर पड़ा है। गौरतलब है कि यह पहली बार है जब किसी तीसरी ताकत ने राज्य की दोनों प्रमुख पार्टियों को एक साथ चुनौती देने में सफलता पाई है।
आगे क्या होगा
अब डीएमके को सत्ता से विपक्ष की भूमिका में जाने की तैयारी करनी होगी। पार्टी नेतृत्व के सामने न केवल आंतरिक पुनर्गठन की चुनौती है, बल्कि उसे टीवीके के रूप में उभरी नई राजनीतिक शक्ति से भी निपटना होगा। आने वाले महीनों में पार्टी की रणनीति और नेतृत्व की दिशा तय करेगी कि डीएमके अपनी खोई जमीन वापस पा सकती है या नहीं।