थलपति विजय की ऐतिहासिक जीत: सनातन विरोध और हिंदी विरोध की राजनीति ने डीएमके को डुबोया
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के 2026 विधानसभा चुनाव में सिने सुपरस्टार और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख थलपति विजय ने राज्य की दशकों पुरानी द्विध्रुवीय राजनीति को ध्वस्त करते हुए ऐतिहासिक बढ़त हासिल की है। 234 सीटों वाली विधानसभा में विजय की पार्टी 100 से अधिक सीटों पर आगे चल रही है, जबकि सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सत्ता से बाहर होती नजर आ रही है।
तमिलनाडु की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव
तमिलनाडु की राजनीति दशकों से एम. करुणानिधि की द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और जे. जयललिता की ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के बीच ही सिमटी रही। इन दोनों दलों के बीच सत्ता का हस्तांतरण एक परंपरा बन चुकी थी। लेकिन 4 मई 2026 को आए चुनाव परिणामों ने यह परंपरा तोड़ दी। विजय ने चेन्नई की पेरम्बूर और तिरुचिरापल्ली (पूर्व) — दोनों विधानसभा सीटों पर जबरदस्त बढ़त बनाई है।
गौरतलब है कि यह करिश्मा करीब 50 साल पहले एमजी रामचंद्रन (MGR) ने अपनी नई पार्टी के साथ पहले ही चुनाव में किया था, जब उन्होंने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। विजय ने उसी स्क्रीन-टू-पॉलिटिक्स विरासत को एक बार फिर जीवंत कर दिया है।
डीएमके की हार के प्रमुख कारण
मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और उनके पुत्र व राज्य सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने इस बार का पूरा चुनावी अभियान हिंदी विरोध और द्रविड़ पहचान पर केंद्रित कर दिया था, जो मतदाताओं को रास नहीं आया। विश्लेषकों के अनुसार, राज्य के युवा और शहरी मतदाता अब पुरानी द्रविड़ियन राजनीति से उब चुके हैं और गवर्नेंस, रोजगार तथा शिक्षा को प्राथमिकता देते हैं।
इसके अलावा, उदयनिधि स्टालिन का 2 सितंबर 2023 को दिया गया सनातन धर्म विरोधी बयान भी DMK की नैया डुबोने में अहम भूमिका निभाई। उस कार्यक्रम में उदयनिधि ने कहा था,