थलपति विजय की ऐतिहासिक जीत: सनातन विरोध और हिंदी विरोध की राजनीति ने डीएमके को डुबोया

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थलपति विजय की ऐतिहासिक जीत: सनातन विरोध और हिंदी विरोध की राजनीति ने डीएमके को डुबोया

सारांश

थलपति विजय ने 2026 तमिलनाडु चुनाव में वह कर दिखाया जो रजनीकांत और कमल हासन नहीं कर पाए — 100 से अधिक सीटों पर बढ़त के साथ DMK की सत्ता उखाड़ फेंकी। सनातन विरोध, हिंदी विरोध और सत्ता विरोधी लहर ने स्टालिन को डुबोया, जबकि विजय का 'मास अपील' फॉर्मूला MGR की विरासत को दोहरा गया।

मुख्य बातें

थलपति विजय की पार्टी TVK ने 234 में से 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाई।
उदयनिधि स्टालिन का 2 सितंबर 2023 का सनातन विरोधी बयान DMK की हार का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
DMK का हिंदी विरोध और द्रविड़ पहचान केंद्रित अभियान युवा और शहरी मतदाताओं को प्रभावित नहीं कर पाया।
विजय ने चेन्नई पेरम्बूर और तिरुचिरापल्ली (पूर्व) दोनों सीटों पर बड़ी बढ़त बनाई।
विजय के फैन क्लब 'विजय मक्कल इयक्कम' ने 10 साल से सामाजिक कार्यों के जरिए जमीनी कैडर तैयार किया था।
करीब 50 साल बाद MGR जैसा स्क्रीन-टू-पॉलिटिक्स करिश्मा तमिलनाडु में दोहराया गया।

तमिलनाडु के 2026 विधानसभा चुनाव में सिने सुपरस्टार और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख थलपति विजय ने राज्य की दशकों पुरानी द्विध्रुवीय राजनीति को ध्वस्त करते हुए ऐतिहासिक बढ़त हासिल की है। 234 सीटों वाली विधानसभा में विजय की पार्टी 100 से अधिक सीटों पर आगे चल रही है, जबकि सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सत्ता से बाहर होती नजर आ रही है।

तमिलनाडु की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव

तमिलनाडु की राजनीति दशकों से एम. करुणानिधि की द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और जे. जयललिता की ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के बीच ही सिमटी रही। इन दोनों दलों के बीच सत्ता का हस्तांतरण एक परंपरा बन चुकी थी। लेकिन 4 मई 2026 को आए चुनाव परिणामों ने यह परंपरा तोड़ दी। विजय ने चेन्नई की पेरम्बूर और तिरुचिरापल्ली (पूर्व) — दोनों विधानसभा सीटों पर जबरदस्त बढ़त बनाई है।

गौरतलब है कि यह करिश्मा करीब 50 साल पहले एमजी रामचंद्रन (MGR) ने अपनी नई पार्टी के साथ पहले ही चुनाव में किया था, जब उन्होंने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। विजय ने उसी स्क्रीन-टू-पॉलिटिक्स विरासत को एक बार फिर जीवंत कर दिया है।

डीएमके की हार के प्रमुख कारण

मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और उनके पुत्र व राज्य सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने इस बार का पूरा चुनावी अभियान हिंदी विरोध और द्रविड़ पहचान पर केंद्रित कर दिया था, जो मतदाताओं को रास नहीं आया। विश्लेषकों के अनुसार, राज्य के युवा और शहरी मतदाता अब पुरानी द्रविड़ियन राजनीति से उब चुके हैं और गवर्नेंस, रोजगार तथा शिक्षा को प्राथमिकता देते हैं।

इसके अलावा, उदयनिधि स्टालिन का 2 सितंबर 2023 को दिया गया सनातन धर्म विरोधी बयान भी DMK की नैया डुबोने में अहम भूमिका निभाई। उस कार्यक्रम में उदयनिधि ने कहा था,

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी पार्टी ने उसी राह पर चलना जारी रखा — यह रणनीतिक अदूरदर्शिता थी। दूसरी ओर, विजय ने रजनीकांत और कमल हासन की गलतियों से सीखते हुए दस साल की जमीनी तैयारी की, जो इस चुनाव में फलीभूत हुई। असली परीक्षा अब शुरू होती है: क्या TVK सरकार बनाने के बाद वे वादे पूरे कर पाएगी जो उसने युवाओं और मध्यवर्ग से किए हैं?
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

थलपति विजय की TVK ने 2026 तमिलनाडु चुनाव में कितनी सीटें जीतीं?
TVK 234 सीटों वाली विधानसभा में 100 से अधिक सीटों पर आगे चल रही है। यह आंकड़ा ऐतिहासिक है क्योंकि विजय ने यह कमाल बिना किसी बड़े गठबंधन के हासिल किया।
DMK की हार के पीछे मुख्य कारण क्या रहे?
DMK की हार के प्रमुख कारणों में उदयनिधि स्टालिन का 2023 का सनातन विरोधी बयान, हिंदी विरोध केंद्रित चुनावी अभियान, मंदिर प्रबंधन विवाद और सत्ता विरोधी लहर शामिल हैं। युवा और शहरी मतदाताओं ने गवर्नेंस और रोजगार को प्राथमिकता दी।
उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म पर क्या कहा था?
2 सितंबर 2023 को एक कार्यक्रम में उदयनिधि स्टालिन ने कहा था कि सनातन धर्म को समाज से पूरी तरह खत्म कर देना चाहिए, जिस तरह मच्छर, डेंगू और मलेरिया को खत्म किया जाता है। इस बयान पर देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई और उन पर मुकदमे भी दर्ज हुए।
थलपति विजय ने रजनीकांत और कमल हासन से अलग क्या किया?
विजय ने रातों-रात राजनीति में छलांग लगाने के बजाय 10 साल तक अपने फैन क्लब 'विजय मक्कल इयक्कम' के जरिए रक्तदान, भोजन वितरण और आपदा राहत जैसे सामाजिक कार्यों से जमीनी कैडर तैयार किया। उन्होंने युवा और पहली बार के मतदाताओं पर फोकस किया, जो उनकी जीत का आधार बना।
TVK की जीत का MGR से तुलना क्यों की जा रही है?
करीब 50 साल पहले एमजी रामचंद्रन (MGR) ने अपनी नई पार्टी के साथ पहले ही विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। विजय ने भी पहले चुनाव में ही 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाकर उसी स्क्रीन-टू-पॉलिटिक्स विरासत को दोहराया है।
राष्ट्र प्रेस
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