कोलाथुर में एमके स्टालिन की हार: जयललिता के बाद चुनाव हारने वाले तमिलनाडु के दूसरे मौजूदा मुख्यमंत्री

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कोलाथुर में एमके स्टालिन की हार: जयललिता के बाद चुनाव हारने वाले तमिलनाडु के दूसरे मौजूदा मुख्यमंत्री

सारांश

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन 2026 के विधानसभा चुनाव में कोलाथुर सीट से TVK के वीएस बाबू से हार गए — यह 1996 में जयललिता की हार के बाद राज्य में किसी मौजूदा मुख्यमंत्री की पहली विधानसभा पराजय है। यह हार DMK के लिए ऐतिहासिक झटका है और TVK के उभरती ताकत के रूप में स्थापित होने का संकेत।

मुख्य बातें

एमके स्टालिन 4 मई 2026 को कोलाथुर विधानसभा सीट से TVK के वीएस बाबू से हारे।
वे 1996 में जयललिता की हार के बाद तमिलनाडु के दूसरे मौजूदा मुख्यमंत्री हैं जिन्हें विधानसभा चुनाव में पराजय मिली।
वीएस बाबू पूर्व DMK पदाधिकारी हैं जो बाद में तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) में शामिल हुए।
स्टालिन ने 2011, 2016 और 2021 में कोलाथुर से लगातार तीन जीत दर्ज की थीं।
स्टालिन का चुनावी करियर 1984 में थाउजेंड लाइट्स से शुरू हुआ; उनके पिता करुणानिधि ने कभी कोई विधानसभा चुनाव नहीं हारा।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) अध्यक्ष एमके स्टालिन 4 मई 2026 को राज्य के राजनीतिक इतिहास में एक दुर्लभ रिकॉर्ड के हिस्सेदार बन गए — वे जे जयललिता के बाद तमिलनाडु के दूसरे ऐसे मौजूदा मुख्यमंत्री बन गए, जिन्हें विधानसभा चुनाव में पराजय का सामना करना पड़ा। कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र में स्टालिन को तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) के उम्मीदवार वीएस बाबू ने शिकस्त दी, जो इसे 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के सबसे चौंकाने वाले नतीजों में से एक बनाता है।

कौन हैं वीएस बाबू और क्यों है यह हार अप्रत्याशित

वीएस बाबू पहले DMK के पदाधिकारी रह चुके हैं, जिन्होंने बाद में अपनी राजनीतिक निष्ठा बदलकर तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) का दामन थाम लिया। स्टालिन ने 2011, 2016 और 2021 में कोलाथुर से लगातार तीन जीत दर्ज की थीं। इस अजेय रिकॉर्ड को देखते हुए इस हार को राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार यह TVK के एक उभरती हुई राजनीतिक ताकत के रूप में स्थापित होने का प्रमाण भी है।

ऐतिहासिक संदर्भ: 1996 की जयललिता की हार से तुलना

इससे पहले ऐसा वाकया 1996 में हुआ था, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री जे जयललिता को बरगुर विधानसभा क्षेत्र में DMK के ईजी सुगावनम ने हराया था। उस घटना के तीन दशक बाद स्टालिन की यह हार उसी दुर्लभ श्रेणी में दर्ज हो गई है। गौरतलब है कि तमिलनाडु में मौजूदा मुख्यमंत्री आमतौर पर अपनी विधानसभा सीट बचाने में सफल रहे हैं, इसलिए यह घटना दशकों पुराने चुनावी ट्रेंड को तोड़ती है।

स्टालिन का चार दशकों का चुनावी सफर

एमके स्टालिन ने 1984 में थाउजेंड लाइट्स विधानसभा क्षेत्र से अपना चुनावी करियर शुरू किया था, लेकिन पहले प्रयास में हार मिली। 1989 में उसी सीट से उन्होंने पहली जीत दर्ज की, हालाँकि 1991 में एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 1996 से 2006 के बीच उन्होंने थाउजेंड लाइट्स से लगातार तीन जीत हासिल कर अपनी राजनीतिक स्थिति मज़बूत की। निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्सीमांकन के बाद 2011 में वे कोलाथुर चले गए और वहाँ से 2011, 2016 और 2021 में लगातार जीत दर्ज की।

प्रशासनिक उपलब्धियाँ और DMK की विरासत

1996 में स्टालिन चेन्नई के पहले सीधे चुने गए मेयर बने और 'सिंगारा चेन्नई' पहल के ज़रिए शहर के आधुनिकीकरण का काम किया। 2006 में उन्होंने ग्रामीण विकास और स्थानीय प्रशासन विभागों की जिम्मेदारी सँभाली। 2018 में अपने पिता और DMK के दिग्गज नेता एम करुणानिधि के निधन के बाद उन्होंने पार्टी की कमान सँभाली और 2021 में DMK को सत्ता में वापस लाकर मुख्यमंत्री पद हासिल किया। यह ध्यान देने योग्य है कि करुणानिधि का चुनावी रिकॉर्ड अपराजेय रहा — उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कोई भी विधानसभा चुनाव नहीं हारा।

आगे क्या: DMK और तमिलनाडु की राजनीति पर असर

स्टालिन की इस हार ने DMK के भीतर और विपक्षी खेमों में राजनीतिक हलचल तेज़ कर दी है। TVK का यह प्रदर्शन तमिलनाडु में तीसरी राजनीतिक शक्ति के उभरने का संकेत दे रहा है। आने वाले दिनों में DMK की रणनीति और नेतृत्व की भूमिका पर नज़रें टिकी रहेंगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमके स्टालिन कोलाथुर में किससे हारे?
एमके स्टालिन को कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र में तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) के उम्मीदवार वीएस बाबू ने हराया। वीएस बाबू पहले DMK के पदाधिकारी थे और बाद में TVK में शामिल हो गए थे।
तमिलनाडु में इससे पहले किस मौजूदा मुख्यमंत्री को विधानसभा चुनाव में हार मिली थी?
1996 में बरगुर विधानसभा क्षेत्र में तत्कालीन मुख्यमंत्री जे जयललिता को DMK के ईजी सुगावनम ने हराया था। स्टालिन उस घटना के तीन दशक बाद यह दुर्लभ रिकॉर्ड दोहराने वाले दूसरे मुख्यमंत्री बने।
एमके स्टालिन का कोलाथुर से क्या राजनीतिक इतिहास रहा है?
स्टालिन 2011 में निर्वाचन क्षेत्र पुनर्सीमांकन के बाद कोलाथुर आए और 2011, 2016 तथा 2021 में लगातार तीन बार इस सीट से जीते। 2026 में यह उनकी इस सीट से पहली हार है।
TVK यानी तमिलगा वेट्री कजगम क्या है?
तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) तमिलनाडु की एक उभरती राजनीतिक पार्टी है, जिसने 2026 के विधानसभा चुनावों में उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए खुद को एक प्रमुख तीसरी शक्ति के रूप में स्थापित किया है। स्टालिन को हराना इसकी अब तक की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है।
करुणानिधि और स्टालिन के चुनावी रिकॉर्ड में क्या अंतर है?
DMK के दिग्गज नेता एम करुणानिधि ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कोई भी विधानसभा चुनाव नहीं हारा, जो उनके अपराजेय रिकॉर्ड को ऐतिहासिक बनाता है। उनके पुत्र स्टालिन ने 1984 और 1991 में भी हार झेली थी, और अब 2026 में कोलाथुर में यह तीसरी बड़ी चुनावी पराजय है।
राष्ट्र प्रेस
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