27 जून 2026
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एमडीएमके ने डीएमके से 9 साल पुराना गठबंधन तोड़ा, तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर

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एमडीएमके ने डीएमके से 9 साल पुराना गठबंधन तोड़ा, तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर

सारांश

तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर — एमडीएमके ने 9 साल पुराना डीएमके गठबंधन तोड़ा, डीएमके पर एआईएडीएमके से सांठगांठ का आरोप लगाया। सिरकाझी विधायक सेंथिल सेल्वन की अनुपस्थिति और उनके डीएमके में जाने की अटकलों ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को नए सिरे से उलझा दिया है।

मुख्य बातें

एमडीएमके ने 27 जून 2026 को डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन से औपचारिक रूप से अलग होने की घोषणा की, जिससे 9 साल पुरानी साझेदारी समाप्त हुई।
निर्णय चेन्नई के एग्मोर स्थित मुख्यालय में जनरल काउंसिल और हाई-लेवल कमेटी की बैठक में लिया गया; बैठक की अध्यक्षता अर्जुनाराज ने की।
एमडीएमके ने डीएमके पर प्रतिद्वंद्वी एआईएडीएमके के साथ समझौते की कोशिश का आरोप लगाते हुए कड़ा प्रस्ताव पारित किया।
सेंथिल सेल्वन बैठक से अनुपस्थित रहे; रिपोर्टों के अनुसार वह जल्द डीएमके में शामिल हो सकते हैं।
दुरई वाइको भी बैठक में नहीं आए, जिससे पार्टी के भीतर आंतरिक मतभेदों की अटकलें तेज हुईं।

मारुमलारची द्रविड़ मुनेत्र कझगम (एमडीएमके) ने शनिवार, 27 जून 2026 को द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के नेतृत्व वाले गठबंधन से औपचारिक रूप से अलग होने की घोषणा कर दी, जिससे लगभग नौ वर्ष पुरानी यह राजनीतिक साझेदारी समाप्त हो गई। यह निर्णय चेन्नई के एग्मोर स्थित एमडीएमके मुख्यालय में आयोजित जनरल काउंसिल और हाई-लेवल कमेटी की संयुक्त बैठक में लिया गया।

बैठक में क्या हुआ

बैठक की अध्यक्षता पार्टी के ऑडिटर अर्जुनाराज ने की। एमडीएमके के महासचिव वाइको सहित अन्य वरिष्ठ नेता इसमें शामिल हुए। पार्टी सूत्रों के अनुसार, नेतृत्व ने भविष्य की राजनीतिक दिशा और सहयोगी दल के साथ बढ़ते मतभेदों पर विस्तृत विचार-विमर्श के बाद गठबंधन से अलग होने का प्रस्ताव पारित किया।

बैठक में एक उल्लेखनीय अनुपस्थिति दुरई वाइको की रही, जिनके दूर रहने के फैसले ने पार्टी के भीतर आंतरिक मतभेदों को लेकर अटकलों को और हवा दे दी है।

डीएमके पर लगाए गंभीर आरोप

जनरल काउंसिल ने एक कड़े शब्दों वाला प्रस्ताव भी पारित किया, जिसमें डीएमके पर अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के साथ संबंध बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया। प्रस्ताव में कहा गया कि यह 'सबको पता' था कि डीएमके ने एआईएडीएमके के साथ समझौते की संभावना तलाशी थी — एक ऐसा कदम जिसे एमडीएमके ने राजनीतिक रूप से अस्वीकार्य करार दिया।

विधायक सेंथिल सेल्वन का भविष्य अधर में

सिरकाझी से विधायक एम. सेंथिल सेल्वन शनिवार की जनरल काउंसिल बैठक में शामिल नहीं हुए, जिससे उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। सेल्वन उन दो विधायकों में से एक हैं जो 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में डीएमके के 'राइजिंग सन' (उगते सूरज) चुनाव चिह्न पर जीते थे।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, सेंथिल सेल्वन कई मुद्दों पर नेतृत्व के रुख से असहमत थे और उन्होंने विधायक पद से इस्तीफ़ा न देने का फैसला किया है। रिपोर्टों के अनुसार वह जल्द ही डीएमके में औपचारिक रूप से शामिल हो सकते हैं। चूँकि वह डीएमके के चुनाव चिह्न पर निर्वाचित हुए थे, इसलिए उनके सिरकाझी से विधायक बने रहने की संभावना है।

गौरतलब है कि एमडीएमके ने गठबंधन के तहत डीएमके के चुनाव चिह्न पर सिरकाझी और कडायानल्लूर — दोनों विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था और दोनों जीती थीं। चुनाव के बाद सत्ताधारी सरकार को लेकर बदलते रुख और नीतिगत मतभेदों ने गठबंधन में दरारें पैदा कर दी थीं।

तमिलनाडु की राजनीति पर असर

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब तमिलनाडु में आगामी चुनावी लड़ाइयों से पहले विपक्षी खेमे में नई गोलबंदी की कोशिशें चल रही हैं। एमडीएमके के गठबंधन से बाहर होने के साथ राज्य के राजनीतिक समीकरण नए सिरे से बनने की संभावना है। आलोचकों का कहना है कि यह विभाजन द्रविड़ राजनीति की उस पुरानी परंपरा को दर्शाता है जहाँ गठबंधन चुनावी लाभ के इर्द-गिर्द बनते और टूटते रहे हैं।

एमडीएमके के इस कदम से तमिलनाडु के विपक्षी राजनीतिक परिदृश्य में बड़े पुनर्गठन की संभावना बन गई है, और आने वाले हफ्तों में नए गठजोड़ की अटकलें तेज होंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि तमिलनाडु की द्रविड़ राजनीति में उस पुरानी दरार का नया अध्याय है जहाँ छोटी पार्टियाँ चुनावी सीटें पाने के लिए बड़े दलों के साथ जुड़ती हैं और सत्ता में हिस्सेदारी न मिलने पर अलग हो जाती हैं। डीएमके पर एआईएडीएमके से सांठगांठ का आरोप वाइको की उस रणनीतिक भाषा का हिस्सा लगता है जो नए गठजोड़ की ज़मीन तैयार करती है। असली सवाल यह है कि क्या एमडीएमके के पास अकेले चुनाव लड़ने की ज़मीनी ताकत है, या यह अलगाव किसी तीसरे मोर्चे की तरफ पहला कदम है — जो तमिलनाडु में बार-बार उठता है और बार-बार बिखरता भी है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमडीएमके ने डीएमके गठबंधन क्यों छोड़ा?
पार्टी सूत्रों के अनुसार, नीतिगत मतभेद और सत्ताधारी सरकार को लेकर बदलते रुख के कारण गठबंधन में दरारें पड़ी थीं। इसके अलावा एमडीएमके ने डीएमके पर प्रतिद्वंद्वी एआईएडीएमके के साथ समझौते की संभावना तलाशने का आरोप भी लगाया, जिसे पार्टी ने राजनीतिक रूप से अस्वीकार्य बताया।
एमडीएमके और डीएमके का गठबंधन कब से था?
एमडीएमके और डीएमके के बीच यह राजनीतिक साझेदारी लगभग नौ वर्षों से चली आ रही थी। 27 जून 2026 को चेन्नई में हुई जनरल काउंसिल की बैठक में इसे औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया गया।
विधायक सेंथिल सेल्वन का क्या होगा?
रिपोर्टों के अनुसार सिरकाझी से विधायक एम. सेंथिल सेल्वन जल्द ही डीएमके में औपचारिक रूप से शामिल हो सकते हैं। चूँकि वह डीएमके के 'राइजिंग सन' चुनाव चिह्न पर निर्वाचित हुए थे और उन्होंने विधायक पद से इस्तीफ़ा न देने का फैसला किया है, इसलिए उनके सिरकाझी से विधायक बने रहने की संभावना है।
इस विभाजन से तमिलनाडु की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
एमडीएमके के गठबंधन से बाहर होने के बाद तमिलनाडु के विपक्षी राजनीतिक परिदृश्य में नए समीकरण बनने की संभावना है। आगामी चुनावों से पहले नए गठजोड़ और पुनर्गठन की अटकलें तेज होंगी।
एमडीएमके के महासचिव वाइको कौन हैं?
वाइको (पूरा नाम वी. गोपालस्वामी) मारुमलारची द्रविड़ मुनेत्र कझगम के संस्थापक और महासचिव हैं। वह तमिलनाडु की क्षेत्रीय राजनीति के प्रमुख चेहरों में से एक हैं और द्रविड़ आंदोलन से जुड़े रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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