आईयूएमएल ने डीएमके गठबंधन से तोड़ा नाता, भविष्य के राजनीतिक समीकरण चुनाव से पहले तय होंगे
सारांश
मुख्य बातें
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने 20 जून 2026 को तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के नेतृत्व वाले गठबंधन से औपचारिक रूप से अलग होने की घोषणा कर दी। चेन्नई में आयोजित पार्टी की आम परिषद (जनरल काउंसिल) की बैठक में 14 प्रस्ताव पारित किए गए, जिनमें डीएमके गठबंधन से नाता तोड़ने का प्रस्ताव प्रमुख रहा। यह निर्णय तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के बाद बदले राजनीतिक परिदृश्य की पृष्ठभूमि में लिया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
आम परिषद की बैठक में पारित प्रस्तावों के अनुसार, आईयूएमएल अब डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा नहीं रहेगी। पार्टी नेताओं ने स्पष्ट किया कि भविष्य में उपचुनावों और स्थानीय निकाय चुनावों के समय परिस्थितियों के अनुसार नए राजनीतिक समीकरण तय किए जाएंगे। पार्टी ने अपने विकल्प खुले रखे हैं।
गौरतलब है कि आईयूएमएल ने 23 अप्रैल 2026 का तमिलनाडु विधानसभा चुनाव डीएमके गठबंधन के साथ मिलकर लड़ा था और दो सीटों पर जीत दर्ज की थी। पार्टी के विधायक ए.एम. शाहजहां वर्तमान में तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) सरकार में मंत्री पद पर बने हुए हैं।
तमिलनाडु का बदला राजनीतिक परिदृश्य
23 अप्रैल 2026 को राज्य की सभी 234 विधानसभा सीटों पर एक चरण में मतदान हुआ था। इस बहुकोणीय मुकाबले में 4,000 से अधिक उम्मीदवार मैदान में थे। डीएमके गठबंधन, अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) गठबंधन, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और अन्य दलों ने चुनाव लड़ा।
अभिनेता से नेता बने विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) और नाम तमिलर कच्ची (एनटीके) ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ा। पीएमके संस्थापक डॉ. एस. रामदास और पूर्व मुख्यमंत्री वी.के. शशिकला ने मिलकर चुनावी मुकाबला किया।
चुनाव परिणाम और सरकार गठन
मतगणना में टीवीके ने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सबको चौंका दिया। डीएमके गठबंधन को 73 सीटें और एआईएडीएमके गठबंधन को 53 सीटें मिलीं।
हालांकि टीवीके को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था, लेकिन कांग्रेस, विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके), माकपा, भाकपा और आईयूएमएल समेत डीएमके गठबंधन के कुछ सहयोगी दलों के समर्थन से उसने सरकार बनाई और विधानसभा में विश्वास मत भी हासिल किया।
आईयूएमएल की स्थिति और तर्क
पार्टी नेताओं का कहना है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में डीएमके गठबंधन में बने रहने का औचित्य नहीं रह गया था। यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु की सत्ता का केंद्र डीएमके से टीवीके की ओर स्थानांतरित हो चुका है और आईयूएमएल के विधायक नई सरकार में मंत्री पद पर हैं।
आलोचकों का कहना है कि यह निर्णय व्यावहारिक राजनीति से प्रेरित है — पार्टी उस गठबंधन में औपचारिक रूप से बनी नहीं रहना चाहती जो सत्ता में नहीं है, जबकि उसके प्रतिनिधि सत्तारूढ़ दल के साथ काम कर रहे हैं।
आगे क्या होगा
आईयूएमएल ने स्पष्ट किया है कि आगामी उपचुनावों और स्थानीय निकाय चुनावों से पहले उचित समय पर नए गठबंधन के बारे में निर्णय लिया जाएगा। तमिलनाडु के राजनीतिक समीकरण अभी भी तरल अवस्था में हैं और छोटे दलों की भूमिका आने वाले चुनावों में निर्णायक हो सकती है।