24 सितंबर 2026
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TMC नाम-चुनाव चिह्न विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से माँगी समय-सीमा, 28 सितंबर को अगली सुनवाई

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TMC नाम-चुनाव चिह्न विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से माँगी समय-सीमा, 28 सितंबर को अगली सुनवाई

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने TMC के नाम और 'फूल और घास' चुनाव चिह्न विवाद में चुनाव आयोग को बेवजह देरी से आगाह किया। 6 अक्टूबर के नंदीग्राम-रेजीनगर उपचुनाव से पहले फैसले की दौड़ में अब 28 सितंबर की सुनवाई निर्णायक साबित हो सकती है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 24 सितंबर 2026 को ECI से TMC के नाम और चुनाव चिह्न विवाद में फैसले की व्यावहारिक समय-सीमा माँगी।
CJI की अगुवाई वाली पीठ में जस्टिस सूर्यकांत , जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी.
ECI ने अंतरिम आदेश में ममता बनर्जी के गुट को 'फुटबॉल खिलाड़ी' और विरोधी गुट को 'लिफाफा' चुनाव चिह्न आवंटित किया।
विवाद 6 अक्टूबर 2026 को होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनावों से सीधे जुड़ा है।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने ECI के अंतरिम आदेश के समय पर सवाल उठाया; विरोधी गुट के मुकुल रोहतगी ने सहयोग का आश्वासन दिया।
अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को; TMC के 20 बागी सांसदों का NCPI से गठबंधन भी विवाद का हिस्सा।

सर्वोच्च न्यायालय ने 24 सितंबर 2026 को भारत के चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश दिया कि वह तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और 'फूल और घास' आरक्षित चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद में अंतिम फैसला करने की एक व्यावहारिक समय-सीमा तय करे। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह मामला अनिश्चित काल तक नहीं खींचा जाना चाहिए और अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 के लिए निर्धारित की।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद तब शुरू हुआ जब ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले विरोधी गुट ने ECI के समक्ष 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' के नाम और संगठनात्मक ढाँचे पर अपना दावा पेश किया। आयोग ने 'चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968' के पैराग्राफ 15 के तहत एक अंतरिम आदेश पारित करते हुए दोनों गुटों को पार्टी के स्थापित नाम और चुनाव चिह्न के उपयोग से अस्थायी रूप से रोक दिया।

इसके बाद ECI ने ममता बनर्जी के गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न आवंटित किया। वहीं, विरोधी गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न दिया गया। यह अंतरिम व्यवस्था नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में 6 अक्टूबर 2026 को होने वाले उपचुनावों पर लागू होती है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अगुवाई वाली पीठ, जिसमें जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं, ने ECI के वकील से कहा — 'हमें एक उचित समय-सीमा बताएं जिसमें पार्टियों को अपने सबूत पेश करने का निष्पक्ष मौका मिले, लेकिन मामला लंबा न खिंचे और आपको भी सोचने-समझने के लिए पर्याप्त समय मिले। कुछ व्यावहारिक होना चाहिए।'

कोर्ट ने ECI को प्रस्तावित समय-सीमा अगली सुनवाई में पेश करने का निर्देश दिया। गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में शीर्ष अदालत पहुँचा है जब कोलकाता नगर निगम समेत कई स्थानीय निकाय चुनाव भी क्षितिज पर हैं।

ममता गुट के तर्क

ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि याचिका में उपचुनावों पर रोक की माँग नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने का आग्रह है कि ECI विवाद का शीघ्र निपटारा करे। उन्होंने ECI के अंतरिम आदेश के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि विवाद जुलाई 2026 में ही आयोग के पास पहुँच गया था, किंतु नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज करने का फैसला उपचुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद लिया गया।

सिब्बल ने तर्क दिया — 'क्या चुनाव आयोग मामलों में देरी कर सकता है और फिर चुनाव के बीच आदेश जारी कर सकता है, यह जानते हुए कि मेरे पास कोई उपाय नहीं बचेगा? आपने यह आदेश चुनाव के बीच जारी किया है।' उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी के गुट ने जुलाई में ही अपना जवाब दाखिल कर दिया था, लेकिन कार्यवाही जारी रहते हुए विरोधी गुट को अतिरिक्त समय दिया गया।

सिब्बल ने अनुरोध किया कि इस विवाद का निपटारा अक्टूबर 2026 तक हो जाए, क्योंकि इसके बाद कोलकाता नगर निगम सहित अन्य स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं।

विरोधी गुट के तर्क

विरोधी गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि उनका पक्ष ECI के समक्ष कार्यवाही में सहयोग करने को तैयार है — 'हम सहयोग करेंगे क्योंकि हमें चुनाव चिह्न चाहिए।' हालाँकि, उन्होंने अक्टूबर की समय-सीमा का विरोध करते हुए पर्याप्त समय की माँग रखी।

उसी पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने कहा कि इस विवाद में तथ्यों से जुड़े जटिल सवाल शामिल हैं, जिनके लिए हलफनामों और विस्तृत साक्ष्यों की आवश्यकता होगी। उनके अनुसार — 'लोकतंत्र की सेहत के लिए, हमें जल्द फैसले में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन यह कहना कि इसे 10 या 20 दिनों में किया जाए, शायद सही नहीं होगा।' कौल ने यह भी तर्क दिया कि ECI के पास किसी राजनीतिक पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न के विवाद की सुनवाई के दौरान अंतरिम निर्देश जारी करने की व्यापक शक्ति है।

संसद तक फैला विवाद और आगे की राह

यह संगठनात्मक टकराव संसद तक भी पहुँचा, जहाँ TMC के 20 बागी लोकसभा सांसदों ने अलग होकर 'नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) के साथ गठबंधन किया और एक अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता का दावा किया। ममता बनर्जी के गुट ने दलबदल विरोधी कानून के तहत इन सांसदों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय में हुई देरी को भी चुनौती दी थी।

अब सबकी निगाहें 28 सितंबर 2026 की सुनवाई पर टिकी हैं, जब ECI सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष अपनी प्रस्तावित समय-सीमा प्रस्तुत करेगा — और यह तय होगा कि 6 अक्टूबर के उपचुनाव से पहले पार्टी के असल चुनाव चिह्न का सवाल सुलझ पाएगा या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे प्रभावित पक्ष के पास कानूनी उपाय की गुंजाइश सीमित हो जाए? वरिष्ठ अधिवक्ता सिब्बल का तर्क कि विवाद जुलाई में ही आयोग के संज्ञान में था, लेकिन फ्रीज का आदेश चुनाव प्रक्रिया शुरू होने पर आया — यह संवैधानिक निकाय की प्रक्रियागत निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। दूसरी ओर, विरोधी गुट का यह भी तर्क वजनदार है कि जटिल तथ्यात्मक विवादों को कृत्रिम समय-सीमा में नहीं निपटाया जाना चाहिए। असली परीक्षा यह है कि क्या ECI 6 अक्टूबर से पहले ऐसी प्रक्रिया अपनाएगा जो दोनों पक्षों को उचित अवसर दे — या यह विवाद कोलकाता नगर निगम चुनावों तक भी अनसुलझा रहेगा।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

TMC के नाम और चुनाव चिह्न विवाद का मामला क्या है?
यह विवाद तब उठा जब ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले विरोधी गुट ने 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' के नाम और संगठनात्मक ढाँचे पर ECI के समक्ष दावा किया। आयोग ने अंतरिम आदेश जारी कर दोनों गुटों को पार्टी के स्थापित नाम और 'फूल और घास' चुनाव चिह्न के उपयोग से रोक दिया, जिसे ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
ECI ने दोनों गुटों को कौन-से नाम और चुनाव चिह्न दिए हैं?
ECI ने ममता बनर्जी के गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न आवंटित किया है। ऋतब्रत बनर्जी के गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न दिया गया है। यह व्यवस्था 6 अक्टूबर 2026 के नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनावों के लिए अंतरिम है।
सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर की सुनवाई में क्या निर्देश दिए?
सर्वोच्च न्यायालय ने ECI को निर्देश दिया कि वह 28 सितंबर की अगली सुनवाई में एक व्यावहारिक समय-सीमा प्रस्तुत करे, जिसमें दोनों पक्षों को साक्ष्य पेश करने का उचित अवसर मिले और मामला अनावश्यक रूप से लंबा न खिंचे।
कपिल सिब्बल ने ECI के अंतरिम आदेश पर क्या आपत्ति जताई?
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि विवाद जुलाई 2026 में ही ECI के पास पहुँच गया था, लेकिन नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज करने का आदेश उपचुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद आया — जिससे प्रभावित गुट के पास कानूनी उपाय खोजने का समय नहीं रहा। उनका तर्क था कि यही आदेश चुनाव की घोषणा से पहले भी दिया जा सकता था।
TMC के 20 बागी सांसदों का इस विवाद से क्या संबंध है?
TMC के 20 बागी लोकसभा सांसदों ने अलग होकर 'नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) के साथ गठबंधन किया और अलग संसदीय समूह की मान्यता माँगी। ममता बनर्जी के गुट ने इन सांसदों के खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय में देरी को भी चुनौती दी है, क्योंकि ये सांसद TMC के चुनाव चिह्न पर निर्वाचित हुए थे।
राष्ट्र प्रेस
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