30 सितंबर 2026
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने एआईएसएफ की 'लिफाफा' चिह्न बहाली याचिका खारिज की, नंदीग्राम उपचुनाव से पहले झटका

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने एआईएसएफ की 'लिफाफा' चिह्न बहाली याचिका खारिज की, नंदीग्राम उपचुनाव से पहले झटका

सारांश

नंदीग्राम उपचुनाव से सिर्फ छह दिन पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने एआईएसएफ का 'लिफाफा' चिह्न बहाल करने से इनकार कर दिया। चुनाव आयोग वह चिह्न डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को दे चुका है। अब पार्टी को 'अलमारी' चिह्न पर मैदान में उतरना होगा — यह उसकी चुनावी साख के लिए कड़ी परीक्षा होगी।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2026 को एआईएसएफ की 'लिफाफा' चुनाव चिह्न बहाली याचिका खारिज की।
जस्टिस कृष्णा राव ने कहा — अदालत आगामी उपचुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करेगी।
चुनाव आयोग ने 'लिफाफा' चिह्न ऋतब्रत बनर्जी की डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को आवंटित किया था।
नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव, 9 अक्टूबर को मतगणना।
एआईएसएफ को अब नंदीग्राम उपचुनाव 'अलमारी' चिह्न पर लड़ना होगा।
विधायक नौशाद सिद्दीकी ने भांगड़ से 2021 और 2026 में इसी 'लिफाफा' चिह्न पर जीत हासिल की थी।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2026 को ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट (एआईएसएफ) की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें पार्टी ने अपना 'लिफाफा' चुनाव चिह्न वापस दिलाने की माँग की थी। यह फैसला 6 अक्टूबर को होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले आया है, जिससे पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है।

मामले की पृष्ठभूमि

एआईएसएफ के विधायक और पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी के एकमात्र प्रतिनिधि नौशाद सिद्दीकी ने भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) के उस निर्णय को अदालत में चुनौती दी थी, जिसमें आयोग ने इस महीने की शुरुआत में 'लिफाफा' चिह्न ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक गुट को आवंटित कर दिया था। इस गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम दिया गया है।

सिद्दीकी का तर्क था कि उन्होंने दक्षिण 24 परगना जिले की भांगड़ विधानसभा सीट से 2021 और 2026 — दोनों बार इसी 'लिफाफा' चिह्न पर चुनाव लड़ा और जीता, इसलिए इसे वापस लेने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने दलील दी कि मतदाताओं में इस चिह्न की पहचान उनसे जुड़ी हुई है।

हाईकोर्ट का फैसला

हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के जस्टिस कृष्णा राव ने 28 सितंबर को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। अपने निर्णय में उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत आगामी उपचुनाव की प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती, इसलिए याचिकाकर्ता को राहत देने से इनकार किया जाता है।

गौरतलब है कि सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्णा राव ने यह भी टिप्पणी की थी कि यदि चुनाव आयोग ने 'लिफाफा' चिह्न को किसी अन्य दल को आवंटित करने के बजाय फ्रीज करने का विकल्प चुना होता, तो यह विवाद ही उत्पन्न नहीं होता। हालाँकि, अंततः कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया में दखल न देने का निर्णय लिया।

चुनाव आयोग का पक्ष

चुनाव आयोग के वकील ने अदालत में दलील दी कि 'लिफाफा' एक 'फ्री सिंबल' है — अर्थात् यह किसी पार्टी को आरक्षित नहीं था। उन्होंने तर्क दिया कि एआईएसएफ जैसी गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों का किसी विशेष चुनाव चिह्न पर स्थायी अधिकार नहीं होता। यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव चिह्नों के आवंटन को लेकर देशभर में कई राजनीतिक विवाद सामने आ चुके हैं।

उपचुनाव पर असर

पूर्वी मेदिनीपुर जिले की नंदीग्राम विधानसभा सीट और मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट पर 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव होने हैं, जबकि 9 अक्टूबर को मतगणना निर्धारित है। एआईएसएफ ने नंदीग्राम सीट से अपना उम्मीदवार उतारा है।

हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज होने के बाद एआईएसएफ के पास अब नंदीग्राम उपचुनाव 'अलमारी' चिह्न पर लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार परिचित चुनाव चिह्न न होने से पार्टी की मतदाताओं तक पहुँच प्रभावित हो सकती है।

आगे क्या होगा

एआईएसएफ अभी उच्चतम न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने का विकल्प रख सकती है, हालाँकि चुनाव की निकटता को देखते हुए राहत मिलना कठिन माना जा रहा है। यह मामला इस बात की भी मिसाल बनता है कि छोटे और गैर-मान्यता प्राप्त दलों के लिए चुनाव चिह्न की निरंतरता कितनी अनिश्चित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिस पर व्यापक बहस की ज़रूरत है। जस्टिस कृष्णा राव की वह टिप्पणी — कि चुनाव आयोग ने चिह्न फ्रीज कर इस विवाद को टाला जा सकता था — दरअसल आयोग की प्रक्रियागत चूक की ओर संकेत करती है। नंदीग्राम, जो 2021 के बाद से बंगाल की राजनीति का केंद्र बिंदु रहा है, में यह चुनाव अब और जटिल हो गया है।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाईकोर्ट ने एआईएसएफ की याचिका क्यों खारिज की?
हाईकोर्ट ने कहा कि वह आगामी उपचुनाव की प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करना चाहता। जस्टिस कृष्णा राव ने 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव की निकटता को देखते हुए याचिकाकर्ता को राहत देने से इनकार किया।
'लिफाफा' चुनाव चिह्न किसे दिया गया और क्यों?
चुनाव आयोग ने 'लिफाफा' चिह्न ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' गुट को आवंटित किया। आयोग के अनुसार यह एक 'फ्री सिंबल' था और गैर-मान्यता प्राप्त दलों का ऐसे चिह्नों पर स्थायी अधिकार नहीं होता।
नंदीग्राम उपचुनाव में एआईएसएफ किस चिह्न पर लड़ेगी?
हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद एआईएसएफ को नंदीग्राम उपचुनाव 'अलमारी' चिह्न पर लड़ना होगा। 6 अक्टूबर को मतदान और 9 अक्टूबर को मतगणना होनी है।
नौशाद सिद्दीकी ने 'लिफाफा' चिह्न को लेकर क्या दलील दी थी?
एआईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी ने कहा था कि उन्होंने भांगड़ विधानसभा सीट से 2021 और 2026 दोनों बार 'लिफाफा' चिह्न पर जीत हासिल की थी, इसलिए मतदाताओं की पहचान को देखते हुए इसे वापस लेना अनुचित है।
पश्चिम बंगाल में किन सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं?
पूर्वी मेदिनीपुर जिले की नंदीग्राम और मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव होंगे। मतगणना 9 अक्टूबर को निर्धारित है।
राष्ट्र प्रेस
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