कलकत्ता हाईकोर्ट ने एआईएसएफ की 'लिफाफा' चिह्न बहाली याचिका खारिज की, नंदीग्राम उपचुनाव से पहले झटका
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2026 को ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट (एआईएसएफ) की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें पार्टी ने अपना 'लिफाफा' चुनाव चिह्न वापस दिलाने की माँग की थी। यह फैसला 6 अक्टूबर को होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले आया है, जिससे पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है।
मामले की पृष्ठभूमि
एआईएसएफ के विधायक और पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी के एकमात्र प्रतिनिधि नौशाद सिद्दीकी ने भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) के उस निर्णय को अदालत में चुनौती दी थी, जिसमें आयोग ने इस महीने की शुरुआत में 'लिफाफा' चिह्न ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक गुट को आवंटित कर दिया था। इस गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम दिया गया है।
सिद्दीकी का तर्क था कि उन्होंने दक्षिण 24 परगना जिले की भांगड़ विधानसभा सीट से 2021 और 2026 — दोनों बार इसी 'लिफाफा' चिह्न पर चुनाव लड़ा और जीता, इसलिए इसे वापस लेने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने दलील दी कि मतदाताओं में इस चिह्न की पहचान उनसे जुड़ी हुई है।
हाईकोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के जस्टिस कृष्णा राव ने 28 सितंबर को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। अपने निर्णय में उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत आगामी उपचुनाव की प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती, इसलिए याचिकाकर्ता को राहत देने से इनकार किया जाता है।
गौरतलब है कि सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्णा राव ने यह भी टिप्पणी की थी कि यदि चुनाव आयोग ने 'लिफाफा' चिह्न को किसी अन्य दल को आवंटित करने के बजाय फ्रीज करने का विकल्प चुना होता, तो यह विवाद ही उत्पन्न नहीं होता। हालाँकि, अंततः कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया में दखल न देने का निर्णय लिया।
चुनाव आयोग का पक्ष
चुनाव आयोग के वकील ने अदालत में दलील दी कि 'लिफाफा' एक 'फ्री सिंबल' है — अर्थात् यह किसी पार्टी को आरक्षित नहीं था। उन्होंने तर्क दिया कि एआईएसएफ जैसी गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों का किसी विशेष चुनाव चिह्न पर स्थायी अधिकार नहीं होता। यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव चिह्नों के आवंटन को लेकर देशभर में कई राजनीतिक विवाद सामने आ चुके हैं।
उपचुनाव पर असर
पूर्वी मेदिनीपुर जिले की नंदीग्राम विधानसभा सीट और मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट पर 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव होने हैं, जबकि 9 अक्टूबर को मतगणना निर्धारित है। एआईएसएफ ने नंदीग्राम सीट से अपना उम्मीदवार उतारा है।
हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज होने के बाद एआईएसएफ के पास अब नंदीग्राम उपचुनाव 'अलमारी' चिह्न पर लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार परिचित चुनाव चिह्न न होने से पार्टी की मतदाताओं तक पहुँच प्रभावित हो सकती है।
आगे क्या होगा
एआईएसएफ अभी उच्चतम न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने का विकल्प रख सकती है, हालाँकि चुनाव की निकटता को देखते हुए राहत मिलना कठिन माना जा रहा है। यह मामला इस बात की भी मिसाल बनता है कि छोटे और गैर-मान्यता प्राप्त दलों के लिए चुनाव चिह्न की निरंतरता कितनी अनिश्चित हो सकती है।