19 सितंबर 2026
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'लिफाफा' चुनाव चिह्न विवाद: एआईएसएफ का कोर्ट जाने का ऐलान, रितब्रत गुट को आवंटन पर सवाल

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'लिफाफा' चुनाव चिह्न विवाद: एआईएसएफ का कोर्ट जाने का ऐलान, रितब्रत गुट को आवंटन पर सवाल

सारांश

निर्वाचन आयोग ने एआईएसएफ का पंजीकृत 'लिफाफा' चिह्न रितब्रत बनर्जी के बागी गुट को दे दिया। एआईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी ने इसे पार्टी को कमजोर करने की साजिश बताया और कोर्ट जाने की चेतावनी दी — पश्चिम बंगाल उपचुनाव से ठीक पहले यह विवाद चुनावी परिदृश्य को उलझा सकता है।

मुख्य बातें

निर्वाचन आयोग ने रितब्रत बनर्जी के बागी गुट को 'लिफाफा' चिह्न और 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम आवंटित किया।
एआईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी ने कहा कि उन्होंने 10 मार्च 2026 को यह चिह्न रिन्यू कराया था और 2021 से इसी निशान पर भांगड़ से चुनाव लड़ रहे हैं।
ममता बनर्जी के मूल गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चिह्न मिला।
निर्वाचन आयोग ने मूल नाम 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' और चिह्न 'फूल और घास' को फ्रीज किया।
एआईएसएफ ने आयोग को आपत्ति-पत्र भेजा; जरूरत पड़ने पर कोर्ट जाने की तैयारी।

ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट (एआईएसएफ) ने भारत निर्वाचन आयोग के उस फैसले को कानूनी चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है, जिसमें उसका पंजीकृत चुनाव चिह्न 'लिफाफा' पूर्व सांसद रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट को आवंटित कर दिया गया। 19 सितंबर 2026 को कोलकाता से सामने आई इस खबर ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

मुख्य घटनाक्रम

निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट को 'लिफाफा' चुनाव चिह्न और 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम आवंटित किया। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले मूल गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' का निशान दिया गया।

यह आवंटन निर्वाचन आयोग के उस पहले के फैसले के बाद आया, जिसमें गुरुवार को मूल नाम 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' और मूल चिह्न 'फूल और घास' को फ्रीज कर दिया गया था। ये नई पहचान राज्य में होने वाले आगामी उपचुनावों में लागू होंगी।

एआईएसएफ की आपत्ति

पश्चिम बंगाल विधानसभा में एआईएसएफ के इकलौते विधायक नौशाद सिद्दीकी ने कहा कि 'लिफाफा' चिह्न पहले ही उनकी पार्टी को विधिवत आवंटित है। उन्होंने 2021 और 2026 के विधानसभा चुनावों में इसी निशान पर दक्षिण 24 परगना जिले के भांगड़ विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था।

सिद्दीकी ने स्पष्ट कहा, 'हमने 10 मार्च 2026 को लिफाफा चिह्न को रिन्यू कराया था। हमने 'फ्री सिंबल' में से ही अपना चिह्न चुना था और चुनाव आयोग ने इसे मंजूरी दी थी। हम 2021 के विधानसभा चुनाव से ही इस निशान पर लड़ रहे हैं। मेरा सवाल है कि ऐसी स्थिति में वही निशान किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी को क्यों आवंटित किया गया? मुझे लगता है कि हमारी पार्टी को कमजोर करने की साजिश चल रही थी।'

भाजपा पर निशाना

सिद्दीकी ने इस मौके पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, 'मैं भारतीय जनता पार्टी को बताना चाहता हूं कि जिस तरह से वे लगातार विपक्ष को कमजोर करने के लिए चुनाव आयोग का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह आखिर में उनके लिए अच्छा नहीं होगा।'

गौरतलब है कि एआईएसएफ ने पहले ही निर्वाचन आयोग को पत्र भेजकर इस आवंटन पर औपचारिक आपत्ति दर्ज करा दी है। अब जरूरत पड़ने पर पार्टी अदालत का रुख करने को तैयार है।

तृणमूल कांग्रेस का राजनीतिक इतिहास

यह ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस खुद आंतरिक संकट से जूझ रही है। 1998 में ममता बनर्जी के कांग्रेस से अलग होने के बाद स्थापित इस पार्टी ने अपनी स्थापना के बाद से सभी चुनाव 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' के नाम और 'फूल और घास' के निशान पर लड़े हैं। पार्टी 2011 में पश्चिम बंगाल में सत्ता में आई और तब से राज्य की प्रमुख सत्तारूढ़ शक्ति बनी हुई है।

आलोचकों का कहना है कि चुनाव चिह्न को लेकर यह विवाद उपचुनाव से ठीक पहले छोटे दलों की राजनीतिक पहचान को लेकर संस्थागत पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाता है। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला ही तय करेगा कि 'लिफाफा' किसे मिलेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

खासकर उस दल के लिए जिसका एकमात्र विधायक उसी निशान पर दो बार जीता हो। निर्वाचन आयोग ने यदि वास्तव में पहले से पंजीकृत चिह्न किसी अन्य दल को आवंटित किया है, तो यह प्रक्रियागत चूक बड़ी है — और अदालत इसकी समीक्षा करेगी। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस का यह विभाजन खुद दर्शाता है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति किस तरह उपचुनावों से ठीक पहले पुनर्गठित हो रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या छोटे दलों के चुनाव चिह्न संरक्षण की प्रक्रिया पारदर्शी और विवाद-मुक्त है — यह मामला उस पर एक जरूरी परीक्षण बन सकता है।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एआईएसएफ और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न विवाद क्या है?
निर्वाचन आयोग ने एआईएसएफ का पंजीकृत चुनाव चिह्न 'लिफाफा' रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' को आवंटित कर दिया। एआईएसएफ का दावा है कि उसने यह चिह्न 10 मार्च 2026 को विधिवत रिन्यू कराया था और 2021 से इस पर चुनाव लड़ रही है।
निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों को क्या-क्या दिया?
आयोग ने रितब्रत बनर्जी के बागी गुट को 'लिफाफा' चिह्न और 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम दिया, जबकि ममता बनर्जी के मूल गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चिह्न आवंटित किया। मूल नाम और 'फूल और घास' चिह्न फ्रीज रहेंगे।
नौशाद सिद्दीकी कौन हैं और उनका इस विवाद से क्या संबंध है?
नौशाद सिद्दीकी पश्चिम बंगाल विधानसभा में एआईएसएफ के इकलौते विधायक हैं, जो दक्षिण 24 परगना के भांगड़ क्षेत्र से 2021 और 2026 दोनों चुनाव 'लिफाफा' निशान पर जीते। उन्होंने इस आवंटन को अपनी पार्टी को कमजोर करने की साजिश करार दिया है।
एआईएसएफ आगे क्या कदम उठाएगी?
एआईएसएफ ने पहले ही निर्वाचन आयोग को आपत्ति-पत्र भेज दिया है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यदि आयोग अपना फैसला नहीं बदलता, तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाएगी।
यह विवाद पश्चिम बंगाल के उपचुनावों को कैसे प्रभावित कर सकता है?
नए नाम और चिह्न का आवंटन आगामी राज्य उपचुनावों में लागू होना है। यदि अदालत एआईएसएफ की याचिका पर सुनवाई करती है और 'लिफाफा' चिह्न के आवंटन पर रोक लगाती है, तो इससे 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' की चुनावी तैयारी प्रभावित हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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