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चुनाव आयोग से मिले TMC बागी गुट के 10 विधायक, रितब्रत बनर्जी बोले — हम ही असली तृणमूल, दो तिहाई बहुमत हमारे साथ

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चुनाव आयोग से मिले TMC बागी गुट के 10 विधायक, रितब्रत बनर्जी बोले — हम ही असली तृणमूल, दो तिहाई बहुमत हमारे साथ

सारांश

TMC के बागी गुट ने चुनाव आयोग के सामने दावा ठोका — दो तिहाई विधायक, जिला पार्षद और पंचायत सदस्य उनके साथ हैं। रितब्रत बनर्जी का यह कदम पश्चिम बंगाल की राजनीति में पार्टी चिन्ह और संगठन पर नियंत्रण की लड़ाई को नई धार दे सकता है।

मुख्य बातें

रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में TMC बागी गुट के 10 विधायकों ने 2 जुलाई को चुनाव आयोग (ECI) की पूर्ण पीठ से मुलाकात की।
22 जून को कोलकाता में हुए प्रतिनिधि सत्र में अरूप राय को बागी गुट का चेयरपर्सन चुना गया।
बनर्जी ने दावा किया कि दो तिहाई से अधिक विधायक, जिला परिषद सदस्य और पार्षद उनके गुट के साथ हैं।
गुट ने कथित भ्रष्टाचार — रेत, कोयला, डोलोमाइट और मवेशी सिंडिकेट — में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की।
बनर्जी ने कहा कि बंगाल की जनता परिवारवाद का समर्थन नहीं करती और TMC के खिलाफ जनमत भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक फैसला है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (बागी गुट) के 10 विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने 2 जुलाई को नई दिल्ली में चुनाव आयोग (ECI) की पूर्ण पीठ से मुलाकात की। बैठक के बाद बनर्जी ने मीडिया के सामने दावा किया कि उनका गुट ही असली ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस है और उनके पास दो-तिहाई से अधिक बहुमत है।

मुख्य घटनाक्रम

22 जून को कोलकाता में आयोजित एक प्रतिनिधि सत्र के आधार पर इस गुट ने अरूप राय को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (बागी गुट) का चेयरपर्सन चुना। सत्र के अगले ही दिन, 23 जून को, इस गुट ने चुनाव आयोग से मुलाकात का समय माँगा था। बनर्जी ने बताया कि आयोग ने जितने सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल को अनुमति दी, उतने लेकर वे दिल्ली पहुँचे और पूरी बेंच ने उनसे मुलाकात की।

रितब्रत बनर्जी के दावे

बनर्जी ने कहा, "हम ही ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस हैं। दो तिहाई से भी ज़्यादा विधायक, जिला परिषद के सदस्य, पार्षद — सभी हमारे साथ हैं। ऐसे में पार्टी के चुनाव चिन्ह को लेकर माँग की कोई बात ही नहीं है।" उन्होंने यह भी कहा कि जब भी पार्टी में इस तरह का सत्र हो, चुनाव आयोग को तुरंत सूचित किया जाना चाहिए।

भ्रष्टाचार और परिवारवाद पर निशाना

बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि एक जमीनी पार्टी पर धीरे-धीरे एक व्यक्ति का वर्चस्व स्थापित हो गया और कथित तौर पर एक नौकरशाह ने उस पर कब्जा कर लिया। उन्होंने रेत, कोयला, डोलोमाइट और मवेशी तस्करी जैसे कथित सिंडिकेट से जुड़े भ्रष्टाचार का उल्लेख करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। बनर्जी के अनुसार, "तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ मिला जनमत असल में भ्रष्टाचार के खिलाफ भी एक फैसला है।"

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनकी व्यक्तिगत राय नहीं, बल्कि गुट की सामूहिक आवाज़ है। साथ ही कहा कि बंगाल की जनता परिवारवाद को समर्थन नहीं करती।

आगे क्या होगा

बनर्जी ने उम्मीद जताई कि चुनाव आयोग जल्द ही उनके गुट से संपर्क करेगा। पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अंतिम निर्णय ECI के पास है, जो दोनों गुटों के दावों की समीक्षा के बाद आदेश जारी करेगा। यह विवाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है, खासकर आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन संख्याओं का स्वतंत्र सत्यापन अभी बाकी है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो रही है और पार्टी चिन्ह पर नियंत्रण किसी भी गुट के लिए निर्णायक राजनीतिक संसाधन बन सकता है। भ्रष्टाचार और परिवारवाद के आरोप नए नहीं हैं, लेकिन इन्हें संगठनात्मक दावे के साथ जोड़कर ECI के सामने रखना एक सुनियोजित कानूनी-राजनीतिक रणनीति की ओर इशारा करता है। असली परीक्षा यह होगी कि आयोग इन दावों को किस हद तक सत्यापन-योग्य मानता है।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रितब्रत बनर्जी ने चुनाव आयोग से मुलाकात क्यों की?
रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में TMC बागी गुट के 10 विधायकों ने 2 जुलाई को चुनाव आयोग से मुलाकात कर यह दावा किया कि वे ही असली ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस हैं और उनके पास दो तिहाई से अधिक बहुमत है। इस मुलाकात का उद्देश्य पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अपना दावा आयोग के सामने पेश करना था।
TMC बागी गुट में अरूप राय की क्या भूमिका है?
22 जून को कोलकाता में हुए प्रतिनिधि सत्र में अरूप राय को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (बागी गुट) का चेयरपर्सन चुना गया। यह सत्र बागी गुट द्वारा खुद को संगठनात्मक वैधता देने की कोशिश का हिस्सा था।
TMC के चुनाव चिन्ह पर विवाद क्या है?
बागी गुट का दावा है कि दो तिहाई बहुमत उनके साथ होने के कारण पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर उनका अधिकार है। चुनाव आयोग दोनों गुटों के दावों की समीक्षा करेगा और अंतिम निर्णय जारी करेगा।
रितब्रत बनर्जी ने तृणमूल नेतृत्व पर क्या आरोप लगाए?
बनर्जी ने आरोप लगाया कि एक जमीनी पार्टी धीरे-धीरे एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द सिमट गई और कथित तौर पर एक नौकरशाह ने उस पर कब्जा कर लिया। उन्होंने रेत, कोयला, डोलोमाइट और मवेशी सिंडिकेट से जुड़े कथित भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की।
इस विवाद का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
यदि चुनाव आयोग बागी गुट के दावे को मान्यता देता है, तो पार्टी के नाम और चिन्ह पर नियंत्रण का सवाल पश्चिम बंगाल की आगामी विधानसभा राजनीति को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकता है। बनर्जी का 'परिवारवाद विरोधी' बयान मतदाताओं के बीच एक नई राजनीतिक लकीर खींचने की कोशिश है।
राष्ट्र प्रेस
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