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पश्चिम बंगाल विधानसभा की बीए कमेटी में ममता-अभिषेक गुट को नहीं मिली जगह, ऋतब्रत बनर्जी गुट का दबदबा

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पश्चिम बंगाल विधानसभा की बीए कमेटी में ममता-अभिषेक गुट को नहीं मिली जगह, ऋतब्रत बनर्जी गुट का दबदबा

सारांश

पश्चिम बंगाल विधानसभा की बीए कमेटी में ममता-अभिषेक गुट को पूरी तरह बाहर रखा गया है — सभी 5 TMC स्थायी सीटें ऋतब्रत बनर्जी के 'बागी' गुट के पास गईं। यह TMC के भीतर सत्ता-संघर्ष की एक और परत उजागर करता है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल विधानसभा की नवगठित बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के प्रति वफादार गुट का कोई विधायक शामिल नहीं।
समिति में कुल 19 स्थायी सदस्य — 14 भाजपा से और 5 तृणमूल कांग्रेस से; सभी 5 TMC सदस्य ऋतब्रत बनर्जी गुट से।
निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी स्वयं समिति के स्थायी सदस्य बनाए गए; वे विधानसभा में विपक्ष के नेता भी हैं।
आमंत्रित सदस्यों में कांग्रेस के मोहताब शेख , माकपा के एकमात्र विधायक, AISF और AJUP के प्रतिनिधि शामिल।
संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों गुट आधिकारिक रिकॉर्ड में TMC के सदस्य, इसलिए कमेटी गठन को कानूनी चुनौती देना कठिन।

पश्चिम बंगाल विधानसभा की नवगठित बिजनेस एडवाइजरी (बीए) कमेटी में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के प्रति वफादार माने जाने वाले गुट को कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। 24 जून 2026 को सामने आई इस समिति की सूची ने पार्टी के भीतर गहरी होती दरार को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

बीए कमेटी का महत्व और संरचना

बिजनेस एडवाइजरी कमेटी विधानसभा की सबसे प्रभावशाली वैधानिक समितियों में गिनी जाती है। प्रत्येक सत्र से पूर्व यह समिति सदन की कार्यसूची, विधेयकों की प्रस्तुति और विभिन्न विषयों पर चर्चा के लिए समय-निर्धारण जैसे अहम निर्णय लेती है। सरल शब्दों में, विधानसभा की समूची कार्यवाही की दिशा तय करने में इस समिति की केंद्रीय भूमिका होती है।

नवगठित समिति में कुल 19 स्थायी सदस्य हैं — 14 सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) से और 5 विपक्षी तृणमूल कांग्रेस से। इसके अतिरिक्त 10 आमंत्रित सदस्य भी शामिल किए गए हैं, जिनमें 4 भाजपा से और 2 तृणमूल कांग्रेस से हैं।

ऋतब्रत बनर्जी गुट का वर्चस्व

विपक्ष के हिस्से में आए सभी पाँच स्थायी सदस्य तृणमूल कांग्रेस के उस गुट से हैं जिसका नेतृत्व निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि ऋतब्रत बनर्जी वर्तमान में विधानसभा में विपक्ष के नेता भी हैं और उन्हें स्वयं भी बीए कमेटी का स्थायी सदस्य बनाया गया है। आमंत्रित सदस्यों में भी इसी गुट का एक प्रतिनिधि शामिल है।

यह ऐसे समय में आया है जब TMC के दोनों गुटों के बीच विधानसभा के भीतर और बाहर तनातनी लगातार बढ़ रही है। ममता-अभिषेक गुट के विधायकों को समिति से पूरी तरह बाहर रखा जाना इस आंतरिक संघर्ष का एक और संकेत माना जा रहा है।

अन्य दलों को मिली जगह

आमंत्रित सदस्यों की सूची में विधानसभा में कांग्रेस के दो विधायकों में से एक मोहताब शेख को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा माकपा (CPI-M) के एकमात्र विधायक, नौशाद सिद्दीकी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट (AISF) के एकमात्र प्रतिनिधि, तथा आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के अकेले विधायक को भी आमंत्रित सदस्य के रूप में समिति में स्थान दिया गया है।

संवैधानिक पेचीदगियाँ

संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार, विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में दोनों गुटों के विधायक अब भी तृणमूल कांग्रेस के सदस्य के रूप में दर्ज हैं। इस तकनीकी स्थिति के कारण बीए कमेटी के गठन या सदस्य-चयन को औपचारिक रूप से चुनौती देना आसान नहीं होगा, क्योंकि दल-बदल विरोधी कानून की दृष्टि से दोनों गुट एक ही पार्टी के अंग माने जाते हैं।

आगे क्या होगा

ममता-अभिषेक गुट को लगातार हाशिये पर धकेले जाने से विधानसभा के अगले सत्र में विपक्षी रणनीति और अधिक जटिल हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम TMC के भीतर सत्ता-संघर्ष की एक निर्णायक कड़ी साबित हो सकती है, जिसके दूरगामी परिणाम पार्टी की विधायी उपस्थिति पर पड़ेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह अब अपनी ही पार्टी के 'बागी' धड़े से पीछे धकेला जा रहा है। संवैधानिक तकनीकी का सहारा लेकर इस बहिष्कार को निर्विवाद बनाए रखना एक सोची-समझी रणनीति दिखती है। मुख्यधारा की कवरेज जो नज़रअंदाज़ करती है, वह यह है कि यह घटनाक्रम TMC के दीर्घकालिक विधायी एजेंडे और विपक्षी एकजुटता दोनों को कमज़ोर कर सकता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल विधानसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी क्या होती है?
बिजनेस एडवाइजरी कमेटी विधानसभा की सबसे महत्वपूर्ण वैधानिक समितियों में से एक है। यह प्रत्येक सत्र से पहले सदन की कार्यसूची, विधेयकों की प्रस्तुति और चर्चा के समय-निर्धारण जैसे अहम फैसले लेती है।
ममता-अभिषेक गुट को बीए कमेटी से क्यों बाहर रखा गया?
नवगठित समिति में TMC के सभी 5 स्थायी सदस्य ऋतब्रत बनर्जी के गुट से चुने गए, जो विधानसभा में आधिकारिक विपक्ष के नेता हैं। ममता-अभिषेक गुट के किसी भी विधायक को न स्थायी, न आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया।
ऋतब्रत बनर्जी कौन हैं और TMC से उनका क्या संबंध है?
ऋतब्रत बनर्जी तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित विधायक हैं, जो वर्तमान में पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में कार्यरत हैं। वे TMC के उस 'बागी बहुमत' गुट का नेतृत्व करते हैं जो ममता-अभिषेक खेमे से अलग है।
क्या इस कमेटी गठन को कानूनी चुनौती दी जा सकती है?
संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार, विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में दोनों गुटों के विधायक अब भी TMC के सदस्य के रूप में दर्ज हैं। इस तकनीकी स्थिति के कारण कमेटी गठन को औपचारिक रूप से चुनौती देना कठिन होगा।
बीए कमेटी में अन्य कौन-से दलों को प्रतिनिधित्व मिला है?
आमंत्रित सदस्यों में कांग्रेस के मोहताब शेख, माकपा के एकमात्र विधायक, नौशाद सिद्दीकी की अगुवाई वाली AISF के एकमात्र प्रतिनिधि और AJUP के अकेले विधायक को शामिल किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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