पश्चिम बंगाल विधानसभा की बीए कमेटी में ममता-अभिषेक गुट को नहीं मिली जगह, ऋतब्रत बनर्जी गुट का दबदबा
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा की नवगठित बिजनेस एडवाइजरी (बीए) कमेटी में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के प्रति वफादार माने जाने वाले गुट को कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। 24 जून 2026 को सामने आई इस समिति की सूची ने पार्टी के भीतर गहरी होती दरार को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
बीए कमेटी का महत्व और संरचना
बिजनेस एडवाइजरी कमेटी विधानसभा की सबसे प्रभावशाली वैधानिक समितियों में गिनी जाती है। प्रत्येक सत्र से पूर्व यह समिति सदन की कार्यसूची, विधेयकों की प्रस्तुति और विभिन्न विषयों पर चर्चा के लिए समय-निर्धारण जैसे अहम निर्णय लेती है। सरल शब्दों में, विधानसभा की समूची कार्यवाही की दिशा तय करने में इस समिति की केंद्रीय भूमिका होती है।
नवगठित समिति में कुल 19 स्थायी सदस्य हैं — 14 सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) से और 5 विपक्षी तृणमूल कांग्रेस से। इसके अतिरिक्त 10 आमंत्रित सदस्य भी शामिल किए गए हैं, जिनमें 4 भाजपा से और 2 तृणमूल कांग्रेस से हैं।
ऋतब्रत बनर्जी गुट का वर्चस्व
विपक्ष के हिस्से में आए सभी पाँच स्थायी सदस्य तृणमूल कांग्रेस के उस गुट से हैं जिसका नेतृत्व निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि ऋतब्रत बनर्जी वर्तमान में विधानसभा में विपक्ष के नेता भी हैं और उन्हें स्वयं भी बीए कमेटी का स्थायी सदस्य बनाया गया है। आमंत्रित सदस्यों में भी इसी गुट का एक प्रतिनिधि शामिल है।
यह ऐसे समय में आया है जब TMC के दोनों गुटों के बीच विधानसभा के भीतर और बाहर तनातनी लगातार बढ़ रही है। ममता-अभिषेक गुट के विधायकों को समिति से पूरी तरह बाहर रखा जाना इस आंतरिक संघर्ष का एक और संकेत माना जा रहा है।
अन्य दलों को मिली जगह
आमंत्रित सदस्यों की सूची में विधानसभा में कांग्रेस के दो विधायकों में से एक मोहताब शेख को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा माकपा (CPI-M) के एकमात्र विधायक, नौशाद सिद्दीकी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट (AISF) के एकमात्र प्रतिनिधि, तथा आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के अकेले विधायक को भी आमंत्रित सदस्य के रूप में समिति में स्थान दिया गया है।
संवैधानिक पेचीदगियाँ
संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार, विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में दोनों गुटों के विधायक अब भी तृणमूल कांग्रेस के सदस्य के रूप में दर्ज हैं। इस तकनीकी स्थिति के कारण बीए कमेटी के गठन या सदस्य-चयन को औपचारिक रूप से चुनौती देना आसान नहीं होगा, क्योंकि दल-बदल विरोधी कानून की दृष्टि से दोनों गुट एक ही पार्टी के अंग माने जाते हैं।
आगे क्या होगा
ममता-अभिषेक गुट को लगातार हाशिये पर धकेले जाने से विधानसभा के अगले सत्र में विपक्षी रणनीति और अधिक जटिल हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम TMC के भीतर सत्ता-संघर्ष की एक निर्णायक कड़ी साबित हो सकती है, जिसके दूरगामी परिणाम पार्टी की विधायी उपस्थिति पर पड़ेंगे।