ऋतब्रत बनर्जी खेमे में मदन मित्रा शामिल, TMC में टूट तेज; 21 जुलाई की बैठक अहम
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने बुधवार, 15 जुलाई को कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनके खेमे में विधायकों की संख्या तेज़ गति से बढ़ रही है और वरिष्ठ तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता मदन मित्रा के शामिल होने से यह गठबंधन और मज़बूत हुआ है। उन्होंने इसे 'तानाशाही के खिलाफ सामूहिक लड़ाई' करार दिया।
मदन मित्रा का खेमे में प्रवेश
मदन मित्रा ने ऋतब्रत बनर्जी के गुट में शामिल होने की पुष्टि करते हुए कहा, 'ममता बनर्जी के साथ अपनी राजनीतिक पारी जारी रखना मेरे लिए मुश्किल हो गया था। मुझे वहाँ घुटन महसूस हो रही थी।' उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने TMC को नहीं, बल्कि पार्टी के सभी पदों को छोड़ा है। मित्रा ने अभिषेक बनर्जी के रवैये को 'हिटलरशाही' बताते हुए कहा कि इससे कई नेता त्रस्त हो चुके हैं।
ऋतब्रत खेमे का दावा — असली TMC हम हैं
ऋतब्रत बनर्जी के खेमे के विधायक संदीपन साहा ने कहा कि उनके गुट को 'सक्षम प्राधिकरण की ओर से मान्यता प्राप्त TMC' का दर्जा हासिल है। उनके अनुसार, ममता बनर्जी के साथ लंबे समय से जुड़े नेताओं को भी अब यह एहसास हो रहा है कि पार्टी की मूल विचारधारा उनका खेमा ही आगे ले जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरी तरफ के लोग इसी विचारधारा के साथ 'खिलवाड़' कर रहे हैं।
कोर्ट के आदेश और अभिषेक बनर्जी पर चुप्पी
अदालती मामले पर पूछे जाने पर ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, 'कोर्ट की ओर से इस संबंध में आदेश दिया जा चुका है, इसलिए मैं इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकता।' हालाँकि उन्होंने यह ज़रूर जोड़ा कि उनके अनुमान में कोर्ट का फैसला विरोधी पक्ष के हक में नहीं है। अभिषेक बनर्जी पर सीधी टिप्पणी से उन्होंने परहेज़ किया।
21 जुलाई की बैठक और अनुब्रत मंडल
ऋतब्रत बनर्जी ने बताया कि 21 जुलाई को एक अहम बैठक होने वाली है, जिसमें अनुब्रत मंडल भी शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि इस बैठक के बाद 'पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी।' यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब उनके खेमे में विधायकों की आवक इतनी तेज़ है कि उनके अपने शब्दों में — 'हम गिन भी नहीं पा रहे हैं।'
ममता बनर्जी पर मदन मित्रा की टिप्पणी
मदन मित्रा ने ममता बनर्जी के बारे में कहा कि वह सब कुछ जानती और समझती हैं, लेकिन अभिषेक बनर्जी के बारे में कुछ नहीं कह सकतीं क्योंकि 'अब वह काफी कमज़ोर हो चुकी हैं।' यह टिप्पणी TMC के भीतर की दरार को और उजागर करती है। गौरतलब है कि यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी में उस समय आंतरिक उथल-पुथल को दर्शाता है जब राज्य में विधानसभा चुनाव की आहट धीरे-धीरे सुनाई देने लगी है।