15 जुलाई 2026
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भारत-यूके एफटीए लागू: 99% भारतीय निर्यात पर जीरो टैरिफ, दोनों देशों की GDP में ₹5 अरब पाउंड की बढ़त संभव

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भारत-यूके एफटीए लागू: 99% भारतीय निर्यात पर जीरो टैरिफ, दोनों देशों की GDP में ₹5 अरब पाउंड की बढ़त संभव

सारांश

भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (सीईटीए) 15 जुलाई से लागू हो गया है। भारत के 99% निर्यात पर जीरो टैरिफ लागू होगा। कपड़ा, फार्मा, आयुर्वेद और कृषि क्षेत्र को सबसे बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। दोनों देशों की GDP में 5 अरब पाउंड की बढ़ोतरी का अनुमान है।

मुख्य बातें

भारत-यूके सीईटीए 15 जुलाई 2025 से लागू; भारत से ब्रिटेन जाने वाले 99% उत्पादों पर शून्य आयात शुल्क।
ब्रिटेन से भारत आने वाले 90% उत्पाद शुल्क-मुक्त या कम शुल्क पर उपलब्ध होंगे।
दोनों देशों की जीडीपी में करीब 5 अरब पाउंड की बढ़ोतरी का अनुमान; मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार 48 अरब पाउंड ।
कपड़ा क्षेत्र में 9.6% टैरिफ बाधा हटी; AEPC को उम्मीद — कपड़ा निर्यात कुछ वर्षों में दोगुना होगा।
कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य के 95% उत्पादों को ब्रिटेन में जीरो-ड्यूटी की सुविधा — डॉ.
IOPEPC के अनुसार, ब्रिटेन में भारत की बाज़ार हिस्सेदारी 5-7% से बढ़कर 10-15% तक पहुँचने की संभावना अगले 4-5 वर्षों में।

भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (सीईटीए) 15 जुलाई 2025 से औपचारिक रूप से लागू हो गया है, जिसके तहत भारत से ब्रिटेन जाने वाले 99 प्रतिशत उत्पादों पर अब कोई आयात शुल्क नहीं लगेगा। कपड़ा, फार्मा, रत्न-आभूषण, आयुर्वेद, कृषि और इलेक्ट्रॉनिक्स सहित कई क्षेत्रों के निर्यातकों को इस समझौते से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। दोनों देशों की जीडीपी में करीब 5 अरब पाउंड की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जा रहा है।

समझौते में क्या शामिल है

भारत में ब्रिटेन की उच्चायुक्त लिंडी कैमरून ने बताया कि यह समझौता दोनों देशों के बीच पहले से चले आ रहे करीब 48 अरब पाउंड के व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करेगा। उनके अनुसार, इस एफटीए से रोज़मर्रा का व्यापार सस्ता, तेज और सरल होगा। ब्रिटेन से भारत आने वाले 90 प्रतिशत उत्पाद या तो पूरी तरह शुल्क-मुक्त होंगे या उन पर पहले के मुकाबले कम आयात शुल्क लागू होगा।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा, 'कोई भी व्यापार समझौता सिर्फ व्यापार बढ़ाने का जरिया नहीं होता। जब ऐसा समझौता होता है, तो दोनों देशों के बीच टैरिफ और नियमों को लेकर पहले से साफ और भरोसेमंद व्यवस्था बन जाती है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह समझौता निवेश बढ़ाने, सप्लाई चेन मजबूत करने और वैश्विक बाज़ारों तक भारतीय कारोबारों की पहुँच बनाने में सहायक होगा।

प्रमुख क्षेत्रों पर असर

अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) के महासचिव मिथिलेश्वर ठाकुर के अनुसार, 9.6 प्रतिशत टैरिफ की बाधा हटने से भारतीय कपड़ा उद्योग की प्रतिस्पर्धा क्षमता में उल्लेखनीय सुधार आएगा। उनका मानना है कि आने वाले कुछ वर्षों में ब्रिटेन को होने वाला भारत का कपड़ा निर्यात दोगुना हो सकता है। AEPC के चेयरमैन डॉ. ए. शक्तिवेल ने बताया कि अब तक कम विकसित देशों (LDC) को मिलने वाली शुल्क-मुक्त सुविधा के कारण ब्रिटिश खरीदार भारत से बड़ी मात्रा में खरीदारी नहीं कर पाते थे — यह बाधा अब दूर हो गई है।

भारत सरकार के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. तरुण बजाज ने कहा कि कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य क्षेत्र के करीब 95 प्रतिशत उत्पादों को ब्रिटेन के बाज़ार में जीरो-ड्यूटी की सुविधा मिलेगी, जिससे भारतीय उत्पादों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। आयुर्वेद क्षेत्र के विशेषज्ञ दीपक कुमार बडाया ने कहा कि चीन से कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद, टैरिफ लाभ और भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता पर बढ़ते भरोसे से खरीदार भारतीय निर्माताओं को प्राथमिकता दे सकते हैं।

उद्योग जगत की प्रतिक्रिया

कॉन्टिनेंटल कैरियर्स ग्रुप के चेयरमैन विपिन वोहरा ने कहा कि यह समझौता भारत-ब्रिटेन के बीच निर्यात-आयात के पूरे माहौल को बदल देगा। उन्होंने दोनों देशों के बीच उड़ानों की संख्या बढ़ाने और अधिक लैंडिंग राइट्स देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि व्यापारिक गतिविधियाँ और गति पकड़ सकें। सहस्रा ग्रुप के सीएमडी अमृत मनवानी ने कहा कि सीईटीए के लागू होने से इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर, दोनों के निर्यात में काफी बढ़ोतरी की उम्मीद है।

आईओपीईपीसी के चेयरमैन संदीप भूरा ने बताया कि ब्रिटेन का उनके क्षेत्र का बाज़ार करीब 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर का है। उनके अनुसार, अगले 4 से 5 वर्षों में भारत की बाज़ार हिस्सेदारी मौजूदा 5-7 प्रतिशत से बढ़कर 10-15 प्रतिशत तक पहुँच सकती है।

व्यापक संदर्भ और महत्व

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है और वैश्विक सप्लाई चेन में चीन के विकल्प के रूप में उभर रहा है। गौरतलब है कि भारत और ब्रिटेन के बीच यह एफटीए वार्ता करीब तीन वर्षों से अधिक समय से चल रही थी। इस समझौते को दोनों देशों के कारोबारी संबंधों में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।

आगे क्या

समझौते के लागू होने के साथ ही निर्यातकों को तत्काल टैरिफ लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। उद्योग संगठनों का कहना है कि अब दोनों सरकारों को कनेक्टिविटी, मानक-मान्यता और निवेश सुविधा पर भी ध्यान देना होगा, ताकि समझौते की पूरी क्षमता का उपयोग हो सके। डिंपल लांबा के अनुसार, जीरो टैरिफ की सुविधा से भारतीय उत्पाद ब्रिटेन के बाज़ार में ज्यादा किफायती और प्रतिस्पर्धी बनेंगे, जिससे कारोबार के नए और बड़े अवसर खुलेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है — क्या भारतीय निर्यातक इस टैरिफ लाभ को बाज़ार हिस्सेदारी में बदल पाएंगे? कपड़ा और रत्न-आभूषण जैसे क्षेत्रों में बांग्लादेश और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धियों से मुकाबला केवल शुल्क घटाने से नहीं जीता जाता — लॉजिस्टिक्स, गुणवत्ता मानक और ब्रांडिंग भी उतनी ही अहम हैं। तीन वर्षों की लंबी वार्ता के बाद मिला यह समझौता एक मजबूत आधार देता है, परंतु उद्योग जगत द्वारा उठाई गई उड़ान कनेक्टिविटी और लैंडिंग राइट्स जैसी माँगें बताती हैं कि ज़मीनी तैयारी अभी अधूरी है। सरकार को अब टैरिफ की जीत को व्यापार-सुगमता में तब्दील करने की दिशा में ठोस और समयबद्ध कदम उठाने होंगे।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-यूके एफटीए (सीईटीए) क्या है और यह कब लागू हुआ?
भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (सीईटीए) एक द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौता है जो 15 जुलाई 2025 से लागू हुआ। इसके तहत भारत से ब्रिटेन जाने वाले 99% उत्पादों पर आयात शुल्क शून्य हो गया है और ब्रिटेन से भारत आने वाले 90% उत्पाद शुल्क-मुक्त या कम शुल्क पर उपलब्ध होंगे।
इस एफटीए से भारत के किन क्षेत्रों को सबसे ज्यादा फायदा होगा?
कपड़ा, फार्मा, रत्न-आभूषण, आयुर्वेद, कृषि, प्रसंस्कृत खाद्य, इलेक्ट्रॉनिक्स और हस्तशिल्प क्षेत्रों को सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य के 95% उत्पादों को जीरो-ड्यूटी मिलेगी और कपड़ा क्षेत्र में 9.6% टैरिफ की बाधा पूरी तरह हट गई है।
भारत-यूके एफटीए से दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
ब्रिटेन की उच्चायुक्त लिंडी कैमरून के अनुसार, इस समझौते से भारत और ब्रिटेन दोनों की जीडीपी में करीब 5 अरब पाउंड तक की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच मौजूदा 48 अरब पाउंड का व्यापार और मजबूत होगा।
कपड़ा निर्यातकों के लिए यह समझौता क्यों महत्वपूर्ण है?
अब तक कम विकसित देशों (LDC) को ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त निर्यात की सुविधा मिलती थी, जिससे भारत प्रतिस्पर्धा में पिछड़ता था। AEPC के महासचिव मिथिलेश्वर ठाकुर के अनुसार, 9.6% टैरिफ हटने से भारतीय कपड़ा उद्योग की प्रतिस्पर्धा क्षमता काफी बढ़ेगी और कुछ वर्षों में ब्रिटेन को कपड़ा निर्यात दोगुना होने की उम्मीद है।
इस समझौते में आगे क्या होगा और उद्योग की क्या माँगें हैं?
समझौता लागू होने के साथ ही टैरिफ लाभ तत्काल मिलना शुरू हो जाएगा। उद्योग जगत ने दोनों देशों के बीच उड़ानों की संख्या बढ़ाने और अधिक लैंडिंग राइट्स देने की माँग की है, ताकि व्यापारिक कनेक्टिविटी और मजबूत हो और समझौते का पूरा लाभ मिल सके।
राष्ट्र प्रेस
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