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भारत-यूके सीईटीए लागू: 99.5% निर्यात मूल्य शुल्क-मुक्त, रत्न-टेक्सटाइल-सेवा क्षेत्र को बड़ा फायदा

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भारत-यूके सीईटीए लागू: 99.5% निर्यात मूल्य शुल्क-मुक्त, रत्न-टेक्सटाइल-सेवा क्षेत्र को बड़ा फायदा

सारांश

भारत-यूके सीईटीए लागू होते ही 99.5% निर्यात मूल्य शुल्क-मुक्त हो गया। WTC मुंबई चेयरमैन विजय कलंत्री के अनुसार रत्न, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और सेवा क्षेत्र को सबसे बड़ा फायदा मिलेगा — और भारतीय पेशेवरों के लिए ब्रिटेन के दरवाज़े और खुले।

मुख्य बातें

भारत-यूके सीईटीए 16 जुलाई 2025 से प्रभावी; भारत के 99.5% निर्यात मूल्य पर शून्य आयात शुल्क।
तकनीकी रूप से 98.5% उत्पाद शुल्क-मुक्त; निर्यात मूल्य आधार पर यह 99.5% तक।
रत्न-आभूषण, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग सामान, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और ऑटो कंपोनेंट्स सबसे बड़े लाभार्थी।
योग प्रशिक्षकों, शेफ सहित भारतीय पेशेवरों के लिए ब्रिटेन में काम के अवसर बढ़ेंगे; वीज़ा नियमों में ढील पर सहमति।
WTC मुंबई चेयरमैन विजय कलंत्री ने भारतीय उद्योगों से उत्पादकता और उत्पादन क्षमता बढ़ाने का आह्वान किया।

भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) 16 जुलाई 2025 से प्रभावी हो गया है, जिसके तहत भारत के ब्रिटेन को होने वाले निर्यात के 99.5 प्रतिशत मूल्य पर शून्य आयात शुल्क लागू होगा। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (WTC) मुंबई के चेयरमैन विजय कलंत्री ने इस समझौते को भारत के निर्यात, रोज़गार और सेवा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक अवसर बताया है।

समझौते की मुख्य शर्तें

विजय कलंत्री ने बताया कि तकनीकी रूप से यह छूट 98.5 प्रतिशत उत्पादों पर लागू है, लेकिन निर्यात मूल्य के आधार पर यह आँकड़ा 99.5 प्रतिशत तक पहुँचता है। उन्होंने कहा, "सबसे पहले हम इस समझौते का स्वागत करते हैं। हमें खुशी है कि यह आखिरकार लागू हो गया है और आज से इसका लाभ मिलना शुरू हो गया है।" इसके साथ ही दोनों देशों के बीच वीज़ा नियमों में ढील देने पर भी सहमति बनी है।

किन क्षेत्रों को सबसे अधिक फायदा

कलंत्री के अनुसार रत्न एवं आभूषण, वस्त्र (टेक्सटाइल), इंजीनियरिंग सामान, कृषि उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण और ऑटो कंपोनेंट्स उद्योग इस समझौते के सबसे बड़े लाभार्थी होंगे। उन्होंने कहा, "रत्न एवं आभूषण, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग उत्पाद, कृषि और खाद्य क्षेत्र इस समझौते के सबसे बड़े लाभार्थी होंगे।"

सेवा क्षेत्र और पेशेवरों को अवसर

यह समझौता केवल वस्तुओं तक सीमित नहीं है — सेवा क्षेत्र को भी इससे उल्लेखनीय लाभ मिलने की उम्मीद है। भारतीय योग प्रशिक्षकों, शेफ और अन्य पेशेवरों के लिए ब्रिटेन में काम करने के अवसर बढ़ेंगे। वीज़ा नियमों में ढील से दोनों देशों के बीच पेशेवरों की आवाजाही पहले की तुलना में अधिक सुगम होगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी सेवा निर्यात क्षमता को वैश्विक स्तर पर विस्तारित करने की दिशा में काम कर रहा है।

उद्योग जगत की प्रतिक्रिया और आगे की राह

कलंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि इस अवसर का पूरा लाभ उठाने के लिए भारतीय उद्योगों को अपनी उत्पादकता बढ़ानी होगी और उत्पादन क्षमता का विस्तार करना होगा। गौरतलब है कि भारत और यूके के बीच यह समझौता वर्षों की वार्ता के बाद अंतिम रूप पाया है और इसे दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले महीनों में इसके क्रियान्वयन की निगरानी और क्षेत्रवार लाभ का आकलन उद्योग संगठनों की प्राथमिकता रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है। 99.5% शुल्क-मुक्त निर्यात का आँकड़ा प्रभावशाली है, मगर भारतीय MSME और मझोले निर्यातकों के पास ब्रिटिश बाज़ार की माँग के अनुरूप उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता मानक पूरे करने की चुनौती अभी भी बनी हुई है। सेवा क्षेत्र में वीज़ा ढील स्वागत योग्य है, लेकिन 'कुछ ढील' और 'पूर्ण श्रम गतिशीलता' के बीच की खाई को स्पष्ट करना ज़रूरी है। यह समझौता भारत की व्यापार कूटनीति की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, पर लाभ तभी मिलेगा जब उद्योग जगत तैयारी के साथ इस अवसर का दोहन करे।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-यूके सीईटीए क्या है और यह कब लागू हुआ?
भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) 16 जुलाई 2025 से प्रभावी हुआ है। यह समझौता दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को बढ़ावा देने के लिए वर्षों की वार्ता के बाद अंतिम रूप पाया है।
इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को क्या फायदा होगा?
भारत के ब्रिटेन को होने वाले निर्यात के 99.5 प्रतिशत मूल्य पर अब शून्य आयात शुल्क लागू होगा। तकनीकी रूप से 98.5 प्रतिशत उत्पाद शुल्क-मुक्त हैं, लेकिन निर्यात मूल्य के आधार पर यह 99.5 प्रतिशत तक पहुँचता है।
किन क्षेत्रों को इस व्यापार समझौते से सबसे ज़्यादा लाभ मिलेगा?
WTC मुंबई चेयरमैन विजय कलंत्री के अनुसार रत्न एवं आभूषण, वस्त्र (टेक्सटाइल), इंजीनियरिंग सामान, कृषि उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण और ऑटो कंपोनेंट्स उद्योग इस समझौते के सबसे बड़े लाभार्थी होंगे।
क्या इस समझौते से भारतीय पेशेवरों को ब्रिटेन में काम करने का मौका मिलेगा?
हाँ, सेवा क्षेत्र के तहत भारतीय योग प्रशिक्षकों, शेफ और अन्य पेशेवरों के लिए ब्रिटेन में काम करने के अवसर बढ़ेंगे। दोनों देशों के बीच वीज़ा नियमों में ढील देने पर भी सहमति बनी है, जिससे पेशेवरों की आवाजाही अधिक सुगम होगी।
भारतीय उद्योगों को इस अवसर का लाभ उठाने के लिए क्या करना होगा?
विजय कलंत्री ने कहा है कि भारतीय उद्योगों को अपनी उत्पादकता बढ़ानी होगी और उत्पादन क्षमता का विस्तार करना होगा। ब्रिटिश बाज़ार की माँग के अनुरूप गुणवत्ता मानकों को पूरा करना भी ज़रूरी होगा।
राष्ट्र प्रेस
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