केजीएमयू नॉनवेज बैन पर कांग्रेस का BJP पर हमला: 'खानपान पर भी नियंत्रण करेगी सरकार?'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने 15 जुलाई 2026 को लखनऊ में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) द्वारा हॉस्टल मेस और कैंटीन में नॉनवेज पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद का भोजन करने और पहनावा चुनने की स्वतंत्रता देता है, और इस पर राजनीति करना संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध है।
केजीएमयू का नॉनवेज प्रतिबंध — क्या है मामला
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) ने अपने सभी हॉस्टल मेस और कैंटीन में नॉनवेज भोजन बनाने और परोसने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस फैसले ने विश्वविद्यालय परिसर में रहने वाले छात्रों और कर्मचारियों के बीच असंतोष पैदा किया है, और अब यह मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है।
कांग्रेस नेता की प्रतिक्रिया
राजपूत ने कहा, 'क्या अब लोगों के खान-पान पर भी सरकार या BJP नियंत्रण करेगी?' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि हिंदू समाज में विविधता है — वैष्णव परंपरा में शाकाहार को महत्व दिया जाता है, जबकि भगवान शिव के अनेक अनुयायी मांसाहारी हैं। उनके अनुसार किसी पर भी भोजन संबंधी प्रतिबंध थोपना न केवल असंवैधानिक है बल्कि सामाजिक विभाजन को भी बढ़ावा देता है।
राजपूत ने आरोप लगाया कि BJP देश में हिंदू-मुस्लिम की सियासत को हवा दे रही है और असली मुद्दों — बेरोज़गारी, नीट विवाद, शिक्षक भर्ती — से जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे विषयों को उछाल रही है।
नीट और बेरोज़गारी पर कांग्रेस का हमला
राजपूत ने नीट परीक्षा विवाद और सरकारी नौकरियों की कमी पर भी BJP को घेरा। उन्होंने कहा कि 22 लाख परिवार और 22 लाख बच्चे विभिन्न समस्याओं से प्रभावित हुए हैं, जिससे छात्रों का भविष्य संकट में है। इसके अलावा 69 हजार शिक्षकों को अब तक नियुक्ति नहीं मिली है, जबकि देश में बेरोज़गारी लगातार बढ़ रही है।
अन्य मुद्दों पर राजपूत के बयान
मंदिर ट्रस्ट में सीईओ पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाने पर राजपूत ने सवाल उठाया कि पहले नियुक्तियाँ बिना आवेदन के क्यों हुईं और कथित घोटाले के बाद अब यह प्रक्रिया महज दिखावा है। उनका आरोप है कि यह पद पहले से ही किसी विशेष विचारधारा के व्यक्ति के लिए तय किया गया है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP — शरद पवार गुट) के नेताओं की कथित बैठक पर राजपूत ने कहा कि अटकलों पर टिप्पणी उचित नहीं है। उन्होंने शरद पवार को एक अनुभवी नेता बताते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों में उनके बारे में इस तरह की अफवाहें फैलती रही हैं, जो कभी सच साबित नहीं हुईं।
दलबदल की राजनीति पर राजपूत ने BJP पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाते हुए कहा कि अन्य दलों के सांसदों को तोड़ना इतिहास में काले अध्याय के रूप में दर्ज होगा और जनता समय आने पर ऐसे नेताओं को जवाब देगी।
पश्चिम बंगाल में पिछड़ा वर्ग की सूची में 17 मुस्लिम जातियों को शामिल किए जाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और गुजरात सहित कई राज्यों में मुस्लिम समुदाय की कुछ जातियाँ पहले से पिछड़ा वर्ग में हैं — यह कोई नई बात नहीं है। उनके अनुसार BJP इसे भी सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रही है।
धीरेंद्र शास्त्री के भाई से जुड़े मामले पर राजपूत ने स्पष्ट कहा कि परिवार का कोई भी सदस्य यदि अपराध करता है तो उसे कानून के अनुसार कठोर दंड मिलना चाहिए — कानून सभी के लिए समान है।
केजीएमयू का नॉनवेज प्रतिबंध अब केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं रहा — यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता, संवैधानिक अधिकारों और सरकार की भूमिका पर एक व्यापक राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है।