15 जुलाई 2026
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केजीएमयू नॉनवेज बैन पर कांग्रेस का BJP पर हमला: 'खानपान पर भी नियंत्रण करेगी सरकार?'

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केजीएमयू नॉनवेज बैन पर कांग्रेस का BJP पर हमला: 'खानपान पर भी नियंत्रण करेगी सरकार?'

सारांश

केजीएमयू में नॉनवेज बैन ने राजनीतिक बहस छेड़ दी है। कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने BJP पर संविधान-प्रदत्त खानपान की स्वतंत्रता के हनन का आरोप लगाया और कहा कि 22 लाख छात्रों की समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे मुद्दे उछाले जा रहे हैं।

मुख्य बातें

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) ने सभी हॉस्टल मेस और कैंटीन में नॉनवेज पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया।
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने BJP पर संविधान-प्रदत्त खानपान की स्वतंत्रता के विरुद्ध राजनीति करने का आरोप लगाया।
राजपूत के अनुसार 22 लाख परिवार और 22 लाख छात्र नीट विवाद और बेरोज़गारी से प्रभावित हैं; 69 हजार शिक्षकों को अब तक नौकरी नहीं मिली।
पश्चिम बंगाल में पिछड़ा वर्ग सूची में 17 मुस्लिम जातियों को शामिल किए जाने पर BJP की आलोचना को राजपूत ने सांप्रदायिक राजनीति बताया।
दलबदल और मंदिर ट्रस्ट सीईओ नियुक्ति पर भी कांग्रेस ने BJP पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया।

कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने 15 जुलाई 2026 को लखनऊ में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) द्वारा हॉस्टल मेस और कैंटीन में नॉनवेज पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद का भोजन करने और पहनावा चुनने की स्वतंत्रता देता है, और इस पर राजनीति करना संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध है।

केजीएमयू का नॉनवेज प्रतिबंध — क्या है मामला

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) ने अपने सभी हॉस्टल मेस और कैंटीन में नॉनवेज भोजन बनाने और परोसने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस फैसले ने विश्वविद्यालय परिसर में रहने वाले छात्रों और कर्मचारियों के बीच असंतोष पैदा किया है, और अब यह मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है।

कांग्रेस नेता की प्रतिक्रिया

राजपूत ने कहा, 'क्या अब लोगों के खान-पान पर भी सरकार या BJP नियंत्रण करेगी?' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि हिंदू समाज में विविधता है — वैष्णव परंपरा में शाकाहार को महत्व दिया जाता है, जबकि भगवान शिव के अनेक अनुयायी मांसाहारी हैं। उनके अनुसार किसी पर भी भोजन संबंधी प्रतिबंध थोपना न केवल असंवैधानिक है बल्कि सामाजिक विभाजन को भी बढ़ावा देता है।

राजपूत ने आरोप लगाया कि BJP देश में हिंदू-मुस्लिम की सियासत को हवा दे रही है और असली मुद्दों — बेरोज़गारी, नीट विवाद, शिक्षक भर्ती — से जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे विषयों को उछाल रही है।

नीट और बेरोज़गारी पर कांग्रेस का हमला

राजपूत ने नीट परीक्षा विवाद और सरकारी नौकरियों की कमी पर भी BJP को घेरा। उन्होंने कहा कि 22 लाख परिवार और 22 लाख बच्चे विभिन्न समस्याओं से प्रभावित हुए हैं, जिससे छात्रों का भविष्य संकट में है। इसके अलावा 69 हजार शिक्षकों को अब तक नियुक्ति नहीं मिली है, जबकि देश में बेरोज़गारी लगातार बढ़ रही है।

अन्य मुद्दों पर राजपूत के बयान

मंदिर ट्रस्ट में सीईओ पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाने पर राजपूत ने सवाल उठाया कि पहले नियुक्तियाँ बिना आवेदन के क्यों हुईं और कथित घोटाले के बाद अब यह प्रक्रिया महज दिखावा है। उनका आरोप है कि यह पद पहले से ही किसी विशेष विचारधारा के व्यक्ति के लिए तय किया गया है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP — शरद पवार गुट) के नेताओं की कथित बैठक पर राजपूत ने कहा कि अटकलों पर टिप्पणी उचित नहीं है। उन्होंने शरद पवार को एक अनुभवी नेता बताते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों में उनके बारे में इस तरह की अफवाहें फैलती रही हैं, जो कभी सच साबित नहीं हुईं।

दलबदल की राजनीति पर राजपूत ने BJP पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाते हुए कहा कि अन्य दलों के सांसदों को तोड़ना इतिहास में काले अध्याय के रूप में दर्ज होगा और जनता समय आने पर ऐसे नेताओं को जवाब देगी।

पश्चिम बंगाल में पिछड़ा वर्ग की सूची में 17 मुस्लिम जातियों को शामिल किए जाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और गुजरात सहित कई राज्यों में मुस्लिम समुदाय की कुछ जातियाँ पहले से पिछड़ा वर्ग में हैं — यह कोई नई बात नहीं है। उनके अनुसार BJP इसे भी सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रही है।

धीरेंद्र शास्त्री के भाई से जुड़े मामले पर राजपूत ने स्पष्ट कहा कि परिवार का कोई भी सदस्य यदि अपराध करता है तो उसे कानून के अनुसार कठोर दंड मिलना चाहिए — कानून सभी के लिए समान है।

केजीएमयू का नॉनवेज प्रतिबंध अब केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं रहा — यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता, संवैधानिक अधिकारों और सरकार की भूमिका पर एक व्यापक राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे लेकर जो राजनीतिक बहस छिड़ी है वह एक गहरे सवाल को उजागर करती है — क्या सार्वजनिक संस्थाएँ व्यक्तिगत खानपान की आदतों को नियंत्रित कर सकती हैं? विपक्ष का यह आरोप कि BJP असली मुद्दों से ध्यान भटका रही है, नया नहीं है — लेकिन 69 हजार शिक्षकों की लंबित नियुक्ति और नीट विवाद जैसे ठोस उदाहरण इस आरोप को वज़न देते हैं। दूसरी ओर, केजीएमयू प्रशासन ने अभी तक इस प्रतिबंध के पीछे की आधिकारिक वजह सार्वजनिक नहीं की है, जो इस पूरे विवाद को और अधिक अस्पष्ट बनाता है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केजीएमयू में नॉनवेज बैन क्या है?
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ ने अपने सभी हॉस्टल मेस और कैंटीन में नॉनवेज खाना बनाने और परोसने पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। इस फैसले ने छात्रों और राजनीतिक दलों में तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न की है।
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने BJP पर क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने BJP पर हिंदू-मुस्लिम की राजनीति करने और लोगों के खानपान पर नियंत्रण थोपने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद का भोजन करने की स्वतंत्रता देता है और इस पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध असंवैधानिक है।
राजपूत ने नीट और बेरोज़गारी के बारे में क्या कहा?
राजपूत के अनुसार नीट विवाद से 22 लाख परिवार और 22 लाख बच्चे प्रभावित हुए हैं और 69 हजार शिक्षकों को अभी तक नौकरी नहीं मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP इन असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए खानपान जैसे विषयों को उछाल रही है।
पश्चिम बंगाल में 17 मुस्लिम जातियों को पिछड़ा वर्ग में शामिल करने पर राजपूत ने क्या कहा?
राजपूत ने कहा कि महाराष्ट्र और गुजरात सहित कई राज्यों में मुस्लिम समुदाय की कुछ जातियाँ पहले से ही पिछड़ा वर्ग में शामिल हैं, इसलिए पश्चिम बंगाल का यह निर्णय कोई असाधारण नहीं है। उनके अनुसार BJP इसे सांप्रदायिक रंग देकर हिंदू-मुस्लिम की राजनीति कर रही है।
केजीएमयू नॉनवेज बैन का छात्रों पर क्या असर होगा?
यह प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू है, जिससे केजीएमयू के हॉस्टल में रहने वाले उन छात्रों और कर्मचारियों पर सीधा असर पड़ेगा जो नॉनवेज खाना पसंद करते हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अभी तक इस फैसले के पीछे की आधिकारिक वजह सार्वजनिक नहीं की है।
राष्ट्र प्रेस
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