15 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

केजीएमयू ने हॉस्टल मेस में नॉनवेज पर लगाई तत्काल रोक, राज्यपाल के निरीक्षण के बाद बड़ा फैसला

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
केजीएमयू ने हॉस्टल मेस में नॉनवेज पर लगाई तत्काल रोक, राज्यपाल के निरीक्षण के बाद बड़ा फैसला

सारांश

केजीएमयू ने हॉस्टल मेस में नॉनवेज पर तत्काल रोक लगा दी — राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के स्वच्छता संबंधी आपत्तियों के बाद। साधु-संतों ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे पूरे देश के हॉस्टलों में लागू करने की माँग की।

मुख्य बातें

केजीएमयू, लखनऊ ने 15 जुलाई 2026 से सभी हॉस्टल मेस और कैंटीन में नॉनवेज भोजन बनाने और परोसने पर तत्काल प्रतिबंध लगाया।
यह फैसला राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के कैंपस निरीक्षण के दौरान स्वच्छता मानकों पर जताई गई चिंता के बाद लिया गया।
छात्र व्यक्तिगत स्तर पर बाहर से नॉनवेज मंगाने या स्वयं पकाने के लिए स्वतंत्र रहेंगे।
संत सतेंद्र दास वेदांत महाराज और महामंडलेश्वर विष्णु दास सहित कई धार्मिक हस्तियों ने फैसले का स्वागत किया।
रामादल ट्रस्ट के अध्यक्ष कल्कि राम ने इसे 'ऐतिहासिक और साहसिक कदम' बताया।

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ ने 15 जुलाई 2026 को अपने सभी हॉस्टल मेस और कैंटीन में नॉनवेज भोजन बनाने और परोसने पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लागू कर दिया है। यह निर्णय उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के हालिया कैंपस निरीक्षण के बाद लिया गया, जिसमें उन्होंने नॉनवेज भोजन तैयार किए जाने वाले स्थानों पर स्वच्छता मानकों को लेकर चिंता व्यक्त की थी। इस फैसले के बाद बुधवार को साधु-संतों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की इस पहल का खुलकर स्वागत किया।

प्रतिबंध का दायरा और छात्रों की स्वतंत्रता

विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध केवल हॉस्टल मेस और कैंटीन परिसर तक सीमित है। छात्र व्यक्तिगत पसंद के अनुसार बाहर से नॉनवेज भोजन मंगाने या स्वयं पकाने के लिए स्वतंत्र रहेंगे। प्रशासन के अनुसार, राज्यपाल ने निरीक्षण के दौरान उन स्थानों की स्वच्छता स्थिति पर आपत्ति जताई थी जहाँ मांसाहारी भोजन तैयार किया जाता था, जिसके बाद यह कदम उठाया गया।

संतों की प्रतिक्रिया और राष्ट्रव्यापी लागू करने की माँग

संत सतेंद्र दास वेदांत महाराज ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, 'मैं राज्यपाल के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करना चाहता हूँ। मुझे उम्मीद है कि यह निर्णय केवल लखनऊ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश में लागू किया जाएगा। जहाँ भी हॉस्टल संचालित हो रहे हैं, वहाँ इस तरह का प्रतिबंध लागू किया जाना चाहिए।' उन्होंने आगे कहा कि छात्रों को नॉनवेज भोजन परोसने और ऐसी खानपान की आदतों को बढ़ावा देने की प्रथा समाप्त होनी चाहिए।

महामंडलेश्वर विष्णु दास ने भी इस पहल की सराहना की। उनका कहना था, 'यह बहुत अच्छा निर्णय है कि केजीएमयू में नॉनवेज खाना नहीं बनाया जाएगा। नॉनवेज भोजन करने से स्वास्थ्य बेहतर नहीं होता और न ही ताकत मिलती है — यह केवल कई लोगों की आदत बन गई है।'

रामादल ट्रस्ट का समर्थन

रामादल ट्रस्ट के अध्यक्ष कल्कि राम ने भी इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे दुर्गंध से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलेगी और परिसर में स्वच्छ वातावरण बनाए रखने में सहायता मिलेगी। उनके शब्दों में, 'यह एक स्वागत योग्य और ऐतिहासिक फैसला है। हालाँकि यह देर से आया है, लेकिन यह एक साहसिक कदम है।'

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के कई विश्वविद्यालयों में खानपान नीतियों को लेकर बहस जारी है। गौरतलब है कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने हाल ही में उत्तर प्रदेश के कई सरकारी विश्वविद्यालयों का दौरा कर परिसर प्रबंधन पर सक्रिय निर्देश दिए हैं। अब यह देखना होगा कि प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालय इस फैसले का अनुसरण करते हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन धार्मिक हस्तियों की त्वरित और उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि इस फैसले के सामाजिक और सांस्कृतिक आयाम स्वच्छता तर्क से कहीं अधिक गहरे हैं। यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या किसी सार्वजनिक चिकित्सा विश्वविद्यालय की खानपान नीति केवल राज्यपाल के एक दौरे के आधार पर बदली जानी चाहिए, और क्या इस प्रक्रिया में छात्रों — विशेषकर विभिन्न राज्यों से आए उन छात्रों — की राय ली गई जिनकी खाद्य आदतें भिन्न हैं। एक मेडिकल विश्वविद्यालय से, जहाँ पोषण विज्ञान पाठ्यक्रम का हिस्सा है, यह अपेक्षा रहती है कि नीतिगत निर्णय साक्ष्य-आधारित हों।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केजीएमयू ने हॉस्टल मेस में नॉनवेज पर प्रतिबंध क्यों लगाया?
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, यह निर्णय राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के कैंपस निरीक्षण के बाद लिया गया, जिसमें उन्होंने नॉनवेज भोजन तैयार किए जाने वाले स्थानों पर स्वच्छता मानकों को लेकर आपत्ति जताई थी।
क्या केजीएमयू के छात्र अब बिल्कुल नॉनवेज नहीं खा सकते?
नहीं, प्रतिबंध केवल हॉस्टल मेस और कैंटीन में नॉनवेज बनाने और परोसने पर है। छात्र बाहर से नॉनवेज मंगाने या व्यक्तिगत स्तर पर स्वयं पकाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।
इस फैसले पर साधु-संतों की क्या प्रतिक्रिया रही?
संत सतेंद्र दास वेदांत महाराज, महामंडलेश्वर विष्णु दास और रामादल ट्रस्ट के अध्यक्ष कल्कि राम सहित कई धार्मिक हस्तियों ने फैसले का स्वागत किया। उन्होंने इसे पूरे देश के हॉस्टलों और शिक्षण संस्थानों में लागू करने की माँग भी की।
क्या अन्य उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में भी ऐसा प्रतिबंध लागू होगा?
अभी तक किसी अन्य विश्वविद्यालय में ऐसे प्रतिबंध की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। हालाँकि संतों ने राष्ट्रव्यापी लागू करने की माँग की है और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने हाल ही में कई सरकारी विश्वविद्यालयों का निरीक्षण किया है।
केजीएमयू का यह फैसला कब से लागू हुआ?
केजीएमयू प्रशासन ने यह प्रतिबंध 15 जुलाई 2026 को तत्काल प्रभाव से लागू किया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 14 घंटे पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले