केजीएमयू ने हॉस्टल मेस में नॉनवेज पर लगाई तत्काल रोक, राज्यपाल के निरीक्षण के बाद बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ ने 15 जुलाई 2026 को अपने सभी हॉस्टल मेस और कैंटीन में नॉनवेज भोजन बनाने और परोसने पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लागू कर दिया है। यह निर्णय उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के हालिया कैंपस निरीक्षण के बाद लिया गया, जिसमें उन्होंने नॉनवेज भोजन तैयार किए जाने वाले स्थानों पर स्वच्छता मानकों को लेकर चिंता व्यक्त की थी। इस फैसले के बाद बुधवार को साधु-संतों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की इस पहल का खुलकर स्वागत किया।
प्रतिबंध का दायरा और छात्रों की स्वतंत्रता
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध केवल हॉस्टल मेस और कैंटीन परिसर तक सीमित है। छात्र व्यक्तिगत पसंद के अनुसार बाहर से नॉनवेज भोजन मंगाने या स्वयं पकाने के लिए स्वतंत्र रहेंगे। प्रशासन के अनुसार, राज्यपाल ने निरीक्षण के दौरान उन स्थानों की स्वच्छता स्थिति पर आपत्ति जताई थी जहाँ मांसाहारी भोजन तैयार किया जाता था, जिसके बाद यह कदम उठाया गया।
संतों की प्रतिक्रिया और राष्ट्रव्यापी लागू करने की माँग
संत सतेंद्र दास वेदांत महाराज ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, 'मैं राज्यपाल के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करना चाहता हूँ। मुझे उम्मीद है कि यह निर्णय केवल लखनऊ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश में लागू किया जाएगा। जहाँ भी हॉस्टल संचालित हो रहे हैं, वहाँ इस तरह का प्रतिबंध लागू किया जाना चाहिए।' उन्होंने आगे कहा कि छात्रों को नॉनवेज भोजन परोसने और ऐसी खानपान की आदतों को बढ़ावा देने की प्रथा समाप्त होनी चाहिए।
महामंडलेश्वर विष्णु दास ने भी इस पहल की सराहना की। उनका कहना था, 'यह बहुत अच्छा निर्णय है कि केजीएमयू में नॉनवेज खाना नहीं बनाया जाएगा। नॉनवेज भोजन करने से स्वास्थ्य बेहतर नहीं होता और न ही ताकत मिलती है — यह केवल कई लोगों की आदत बन गई है।'
रामादल ट्रस्ट का समर्थन
रामादल ट्रस्ट के अध्यक्ष कल्कि राम ने भी इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे दुर्गंध से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलेगी और परिसर में स्वच्छ वातावरण बनाए रखने में सहायता मिलेगी। उनके शब्दों में, 'यह एक स्वागत योग्य और ऐतिहासिक फैसला है। हालाँकि यह देर से आया है, लेकिन यह एक साहसिक कदम है।'
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के कई विश्वविद्यालयों में खानपान नीतियों को लेकर बहस जारी है। गौरतलब है कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने हाल ही में उत्तर प्रदेश के कई सरकारी विश्वविद्यालयों का दौरा कर परिसर प्रबंधन पर सक्रिय निर्देश दिए हैं। अब यह देखना होगा कि प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालय इस फैसले का अनुसरण करते हैं या नहीं।